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‘हर पाकिस्तानी आतंकवादी या गुंडा है…’, स्वरा भास्कर की मां ने ‘धुरंधर’ पर साधा निशाना; कही बड़ी बात

Swara Bhasker Mother: स्वरा भास्कर की मां इरा भास्कर ने आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर' की आलोचना की है. उन्होंन कहा कि यह फिल्म हिंदुत्व की विचारधारा को दर्शाती है.

Ira Bhasker on Dhurandhar: अभिनेत्री स्वरा भास्कर, जो अपने बेबाक अंदाज की वजह से सुर्खियों में रहती हैं. अब उनकी मां इरा भास्कर का एक बयान सामने आया है, जिससे वो चर्चाओं में हैं. उन्होंने धुरंधर फिल्म की आलोचना की. उनका कहना है कि फिल्म तकनीकी रूप से अच्छी हो सकती है, लेकिन इसमें मुसलमानों और पाकिस्तान को जिस तरह दिखाया गया है, वह परेशान करने वाली रूढ़ियों को बढ़ावा देता है.

ईरा भास्कर ने क्या कहा?

अभिनेत्री स्वरा भास्कर की मां इरा भास्कर, जो जेएनयू में सिनेमा अध्ययन की पूर्व सहायक प्रोफेसर रहीं. उन्होंने यूट्यूब पर ‘कारवां-ए-मोहब्बत’ के एक एपिसोड में अपने विचार साझा किए. उन्होंने हाल के वर्षों में प्रतिबंधों या सेंसरशिप का सामना करने वाली फिल्मों के बारे में बात की. बातचीत के दौरान ईरा भास्कर ने फिल्म ‘धुरंधर’ की व्यावसायिक सफलता का भी जिक्र किया और फिल्म में मौजूद वैचारिक संदेश की आलोचना की. उन्होंने कहा, ‘मैं ‘धुरंधर’ का उदाहरण देना चाहूंगीजो बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों कमा रही है. चूंकि यह इसका सबसे ताजा उदाहरण है, इसलिए यह बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन भी कर रही है. यह एक ऐसे फिल्मकार द्वारा बनाई गई फिल्म का उदाहरण है जो वैचारिक रूप से हिंदुत्व और हिंदुत्व की विचारधारा से प्रेरित है.’ आपको बता दें कि यह इंटरव्यू पुराना है, यह इस समय ट्रेंड कर रहा है कि क्योंकि ‘धुरंधर 2’ रिलीज होने वाली है. 

फिल्म में मुसलमानों के चित्रण की आलोचना की

ईरा भास्कर ने आगे सवाल उठाया कि क्या सिनेमाई तकनीक को उन विचारों से अलग किया जा सकता है जिन्हें कोई फिल्म बढ़ावा देती है. उन्होंने फिल्म में मुसलमानों के चित्रण की भी आलोचना की. ईरा भास्कर ने कहा, ‘यह बेहद हिंसक है. और इसकी हिंसा एक ऐसी विचारधारा की नींव पर की जाती है जिसके अनुसार मुसलमान बहुत हिंसक लोग होते हैं. पाकिस्तान एक बहुत हिंसक राष्ट्र है. आपको वहां कोई सामान्य मुसलमान नहीं दिखेगा. हर कोई आतंकवादी या गुंडा है, जो एक प्रोपेगेंडा की तरह दिखाया जाता है.’ उनके अनुसार, ऐसी फिल्में किसी विशेष वैचारिक दृष्टिकोण का समर्थन करने के लिए चुनिंदा रूप से घटनाओं और कथाओं का उपयोग करती हैं. 

सामाजिक परिदृश्य पर हुई चर्चा

ये चर्चा इस बात पर केंद्रित रही कि फिल्मों में किस प्रकार से मुसलमान, दलित या समाज के अन्य लोगों को प्रदर्शित किया जाता है. 

Kamesh Dwivedi

पिछले चार वर्षों से डिजिटल मीडिया में कार्यरत. जी न्यूज और अमर उजाला डिजिटल में सेवाएं दे चुके हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय से परास्नातक की पढ़ाई. वायरल-ट्रेंडिंग कंटेंट के साथ मनोरंजन की खबरों में रुचि. क्रिकेट, राजनीति के अलावा कविताएं लिखने और पढ़ने का भी शौक है.

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