Toxic Review: यश की फिल्म 'टॉक्सिक' बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई लेकिन मेकर्स को जैसी उम्मीद थी, दर्शकों को फिल्म उतनी लुभाने में नाकामयाब रही. फिल्म में एक्शन, स्टाइल और प्रेजेंस तो देखने को मिला लेकिन कहानी ने उलझा दिया.
टॉक्सिक रिव्यू
Toxic Review: यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है. फिल्म के शुरू होते ही साफ हो जाता है कि मेकर्स ने इसे किसी छोटी फिल्म की तरह नहीं बनाया है. फिल्म का विशाल सेट, दमदार बैकग्राउंड म्यूजिक, स्टाइलिश किरदार और यश की जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस मिलकर ऐसा माहौल तैयार करते हैं, जिसे देखकर लगता है कि आगे कुछ बड़ा देखने को मिलेगा. हालांकि जैसे-जैसे फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है, यही फिल्म अपनी सबसे बड़ी कमजोरी के सामने खड़ी हो जाती है. करीब 3 घंटे 14 मिनट 12 सेकंड लंबी यह फिल्म आंखों को तो खूब आकर्षित करती है लेकिन दिमाग को लगातार सवालों में उलझाती रहती है. फिल्म देखकर दर्शकों ने जो ऑनलाइन पोस्ट शेयर किए, उनमें किसी ने फिल्म को दमदार और यश की एक्टिंग को ‘Fabulos’ कहा, तो किसी ने इसे बकवास और टॉर्चर कहा. दर्शकों का कहना है कि फिल्म की कहानी काफी उलझाने वाली है.
फिल्म की कहानी की बात करें, तो कहानी की शुरुआत 1940 के दशक के गोवा में होती है. उस दौर में ड्रग्स का कारोबार गैंग्स के बीच ताकत और वर्चस्व की लड़ाई हुआ करती थी. इसी अंधेरी दुनिया में राया यानी यश की एंट्री होती है. राया केवल एक गैंगस्टर नहीं है, उसके पीछे एक इतिहास छुपा होता है. पुराने रिश्तों की दरारें हैं और ऐसे कुछ हिसाब जो चुकता करने थे. इसमें बदला, धोखा, गैंगवार और कुछ बड़ा खेल देखने को मिला है. ड्रग्स, परिवार, बदला और गैंगस्टर वर्ल्ड का कॉम्बिनेशन फिल्म को एक मजबूत बेस देता है लेकिन फिल्म इस कहानी को इतनी तेजी से और इतने सारे किरदारों के साथ आगे बढ़ाती है. हालांकि कुछ समय बाद दर्शक कहानी के साथ जुड़ने के बजाय उसे समझने की कोशिश करने लगते हैं. लोगों को समझ में ही नहीं आता कि कौन किसके साथ है और किससे बदला लेने की कोशिश कर रहा है? ऐसे कई सवाल लोगों को दिमाग घुमा देते हैं.
टॉक्सिक में यश ने लोगों को लगातार ध्यान खींचा है. राया के किरदार में उनका स्वैग लुक, चाल-ढाल और स्क्रीन प्रेजेंस ने पर्दे पर आग लगा दी. वह कैमरे के सामने आते हैं, कई बार कहानी की कमियां भी पीछे छूटती हुई नजर आती हैं. कुछ सीन्स में उनकी परफॉर्मेंस असरदार है और खासकर एक्शन वाले हिस्सों में उनके स्टारडम की झलक देखने को मिली.
फिल्म में यश के साथ कियारा, नयनतारा, हुमा कुरेशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे तमाम बेहतरीन कलाकार हैं. इतने सारे एक्टर्स को साथ देखकर लोगों की उम्मीदें ज्यादा बढ़ जाती है लेकिन फिल्म में स्टारकास्ट तो बड़ा है लेकिन किरदार छोटे हैं. हर किरदार की मजबूत कहानी की उम्मीद लेकर गए दर्शकों को ऐसा कुछ नहीं दिखा.
गीतू मोहनदास ने फिल्म की दुनिया को बड़े कैनवास पर उतारने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. फिल्म का स्केल बड़ा है और हर फ्रेम में कुछ नया दिखाने की कोशिश नजर आती है. उनका यही दाव कहानी पर भारी पड़ गया. फिल्म एक्शन से दूसरे एक्शन पर तेजी से जाती है. कोई किरदार आता है, गोली चलती है, कोई घटना होती है और फिर कहानी अगले मोड़ पर पहुंच जाती है. घटनाएं सभी सामने ही होती हैं लेकिन उनका इमोशनल कनेक्शन महसूस नहीं होता.
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