Vinod Suryavanshi Struggle life: एक्टर विनोद सूर्यवंशी, जिन्होंने 'पंचायत' के तीसरे सीज़न में 'सचिव जी' का किरदार निभाया है, उन्होंने अपनी ज़िंदगी का एक बेहद दिल को छू लेने वाला किस्सा शेयर किया है. जिसे जानने के बाद आपकी आंखों से आंसू आ जाएंगे. अपनी जिंदगी में आने वाली मुश्किलों को लेकर उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने मुश्किलों से जूझते हुए पहचान बनाई.
who is vinod suryavanshi
Who Is Vinod Suryavanshi: एक्टर विनोद सूर्यवंशी, जिन्होंने ‘पंचायत’ के तीसरे सीज़न में ‘सचिव जी’ का किरदार निभाया है, उन्होंने अपनी ज़िंदगी का एक बेहद दिल को छू लेने वाला किस्सा शेयर किया है. जिसे जानने के बाद आपकी आंखों से आंसू आ जाएंगे. अपनी जिंदगी में आने वाली मुश्किलों को लेकर उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने मुश्किलों से जूझते हुए पहचान बनाई. उनकी कहानी में सालों का संघर्ष झलकता है. गरीबी, घर की अस्थिर हालतें और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने से पहले की कड़ी मेहनत.
बड़े होते समय, विनोद का बचपन आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से भरा रहा. उनकी माँ नौकरानी का काम करती थीं, जबकि उनके पिता मज़दूरी करके घर चलाते थे, जिनकी कमाई का कोई भरोसा नहीं था. जिन दिनों काम नहीं मिलता था, उनके पिता अक्सर शराब पीकर घर लौटते थे, जिससे घर का माहौल और खराब रहता था और दुख भरा हो जाता था. घर में अक्सर होने वाले झगड़े और हिंसा को देखकर विनोद के मन पर गहरा असर पड़ा. लेकिन उनके मन में अपने पिता के लिए कोई नफ़रत नहीं थी, फिर भी उनके लिए उनसे तालमेल बिठाना मुश्किल था.
एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले, विनोद ने गुज़ारा करने के लिए कई छोटी-मोटी नौकरियाँ कीं. उनकी पहली नौकरी एक लिफ़्ट ऑपरेटर के तौर पर थी, जिसमें उन्हें बहुत कम तनख्वाह दी जाती थी. बाद में उन्होंने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में ऑफ़िस असिस्टेंट के तौर पर काम किया और आखिर में एक सिक्योरिटी गार्ड बन गए. इन नौकरियों में उन्हें लंबे समय तक काम करना पड़ता था और काफ़ी शारीरिक मेहनत लगती थी. गार्ड के तौर पर उन्हें लंबे समय तक खड़े रहना पड़ता था. कभी-कभी तो पूरे आधे दिन तक चाहे मौसम कैसा भी हो. तेज़ बारिश के दिनों में, उनके जूतों में पानी भर जाता था, जिससे उन्हें काफ़ी तकलीफ़ होती थी.
एक्टिंग की दुनिया में उनकी एंट्री अचानक हुई. एक दोस्त ने उन्हें बताया कि एक फ़िल्म की शूटिंग में भीड़ का हिस्सा बनने का मौका मिल रहा है, जिसके लिए उन्हें उस दिन के हिसाब से कुछ पैसे भी मिलेंगे. शुरुआत में उन्हें एक्टिंग से ज़्यादा उसके फ़ायदों में दिलचस्पी थी. जैसे सेट पर रोज़ाना भरपेट खाना मिलना और अपनी पिछली नौकरियों के मुकाबले ज़्यादा रोज़ाना कमाई होना. इसी बात से हिम्मत पाकर, उन्होंने एक जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम करना जारी रखा. धीरे-धीरे उनकी कमाई बढ़ी और उनकी पिछली नौकरियों से मिलने वाली कमाई से कहीं ज़्यादा हो गई.
लेकिन, ये दौर भी उनके लिए चुनौतियों से खाली नहीं था. जूनियर आर्टिस्टों को अक्सर सेट पर नज़रअंदाज़ किया जाता था और उनके साथ बदतमीज़ी भी की जाती थी; असिस्टेंट डायरेक्टर अक्सर उनसे बहुत सख़्ती से बात करते थे. इसके बावजूद, विनोद ने बताया कि बड़े और जाने-माने एक्टर आम तौर पर उनके साथ इज़्ज़त से पेश आते थे. जैसे-जैसे उन्होंने ज़्यादा अहम भूमिकाएँ पाने की कोशिश शुरू की, उन्हें बार-बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा, जिसका अक्सर उनकी शक्ल-सूरत से लेना-देना होता था. कास्टिंग करने वालों की पसंद अक्सर एक सँवरी हुई या अमीर दिखने वाली शक्ल की तरफ़ ज़्यादा होती थी, यहाँ तक कि उन भूमिकाओं के लिए भी, जिनकी ज़रूरत असल में ऐसी नहीं होती थी.
एक बार तो ऐसा भी हुआ कि उन्हें शुरू में एक भूमिका के लिए चुन लिया गया था, लेकिन बाद में उनके साँवले रंग की वजह से उन्हें हटा दिया गया; इस घटना ने इंडस्ट्री में फैले पूर्वाग्रहों को उजागर किया. ऐसे अनुभव हतोत्साहित करने वाले थे, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. सालों की मेहनत के बाद, विनोद को आखिरकार टेलीविज़न में एक सार्थक अवसर मिला, जो उनके सफ़र का एक अहम मोड़ साबित हुआ. इस भूमिका से न सिर्फ़ उन्हें बेहतर आमदनी हुई, बल्कि उनकी लगन भी साबित हुई, और इसी ने उस पहचान का रास्ता खोला, जिसका आनंद वे आज उठा रहे हैं.
सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत में, विनोद सूर्यवंशी ने बताया कि कर्नाटक में उनके गाँव में आज भी जातिवाद किस तरह मौजूद है. उन्होंने समझाया कि गाँव दो अलग-अलग हिस्सों में बँटा हुआ है. एक ऊँची जातियों के लिए और दूसरा नीची जातियों के लिए, जो पूरी तरह से अलग-थलग हिस्से में रहते हैं. उन्होंने अपने बचपन की एक घटना भी याद की, जब वे 12 साल के थे. अपने पिता के साथ गाँव की यात्रा के दौरान, उन्होंने एक होटल में खाना खाया था, जहाँ पैसे देने के बावजूद उन्हें अपनी प्लेटें खुद ही धोनी पड़ी थीं. उन्होंने आगे यह भी बताया कि गाँव में आज भी एक ऐसा मंदिर है, जिसमें उन्हें प्रवेश करने की अनुमति नहीं है.
ODI Double Century List: सचिन तेंदुलकर ने फरवरी 2010 में हिस्ट्री रची थी जब वह…
Karwa Chauth: करवा चौथ पर कुंवारी लड़कियां भी अपने मंगेतर के लिए व्रत रख सकती…
Ind vs Nz 2nd T20 Playing 11: बीसीसीआई ने शुक्रवार को बताया कि ईशान किशन…
Diljit Dosanjh Threat Email: मुंबई की मेयर के कार्यालय, कई स्कूलों, दिलजीत दोसांझ के कार्यक्रम…
IND vs NZ 2nd T20I Live Streaming:भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी20…
Dhanashree Verma Viral photo controversy: सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर को लोग धनश्री वर्मा की…