NEET Success Story: साफ लक्ष्य और सही रणनीति के दम पर बिहार के एक लड़के ने कमाल कर दिया है. उन्होंने नीट यूजी की परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 हासिल की हैं.
NEET Success Story: अक्सर कहा जाता है कि अगर लक्ष्य साफ हो और रणनीति सही हो, तो बड़ी से बड़ी परीक्षा भी जीती जा सकती है. बिहार के कटिहार से ताल्लुक रखने वाले शशांक सिन्हा (Shashank Sinha) की कहानी इसी बात को साबित करती है. शशांक ने NEET UG 2023 में 720 में से 712 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक 20 प्राप्त की और आज वह देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान AIIMS, नई दिल्ली में MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं.
शशांक उन चुनिंदा छात्रों में शामिल हैं, जिन्होंने पहले ही प्रयास में NEET जैसी कठिन परीक्षा को क्रैक किया. महज 18 साल की उम्र में मिली यह सफलता किसी चमत्कार का नतीजा नहीं, बल्कि अनुशासित तैयारी, सही रणनीति और मानसिक संतुलन का परिणाम है. उन्होंने बताया कि लगातार रिवीजन, मॉक टेस्ट और तनाव को सही तरीके से संभालना उनकी सफलता की बड़ी वजह रही.
उनकी शुरुआती प्रेरणा परिवार से ही मिली. हेल्थकेयर से जुड़े माहौल में पले-बढ़े शशांक बताते हैं कि उनकी मां नर्सिंग सुपरिटेंडेंट हैं. वह बताते हैं कि घर में इलाज और मरीजों की बातें सुनते हुए बड़ा हुआ, इसलिए उनके मन में हमेशा डॉक्टर बनने की इच्छा रही, ताकि वह भी लोगों की मदद कर सकूं.
शशांक (Shashank Sinha) ने स्कॉटिश पब्लिक स्कूल, कटिहार से पढ़ाई की और कक्षा 10वीं में 98.8 प्रतिशत तथा कक्षा 12वीं में 97.4 प्रतिशत अंक हासिल किए. इसके बावजूद उन्होंने NEET को लेकर खुद पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डाला. शशांक बताते हैं कि उनके पास बैकअप प्लान भी था और उन्होंने तय किया था कि दो साल से ज्यादा NEET के पीछे नहीं जाएंगे.
तैयारी की शुरुआत उन्होंने जल्दी की, लेकिन बिना किसी जल्दबाजी के. उनका मानना था कि पहले से पढ़ना सिर्फ सिलेबस खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि कॉन्सेप्ट को समझने के लिए होना चाहिए. वह अक्सर क्लास में पढ़ाए जाने वाले टॉपिक को पहले ही पढ़ लेते थे, जिससे क्लास उनके लिए रिवीजन जैसी बन जाती थी.
शशांक ने ऑनलाइन कोचिंग ली, जहां क्लास दोपहर से शाम तक चलती थीं. सुबह का समय वह खुद की पढ़ाई के लिए रखते थे और कोचिंग के बाद नए टॉपिक के बजाय उन्हीं विषयों को मजबूत करते थे, जो पढ़ाए जा चुके होते थे. वह मानते हैं कि पढ़ाई में ब्रेक लेना भी उतना ही जरूरी है, जितना पढ़ना.
उनकी तैयारी का सबसे अहम नियम था—टेस्ट कभी न छोड़ना. चाहे तैयारी पूरी हो या नहीं, हर मॉक टेस्ट देना उनके लिए अनिवार्य था. उनका कहना है कि टेस्ट से यह समझ आता है कि सवाल किस तरह पूछे जाते हैं और किस टॉपिक पर ज्यादा फोकस करना चाहिए. यही रणनीति उन्हें NEET जैसी कंपटीटिव परीक्षा में सफलता दिला सकी.
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