Brain Detox tips: जब याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है तो छोटी छोटी बातें भी भूलने लगते हैं और इसका सीधा असर काम और निजी जिंदगी दोनों पर पड़ता है. हालांकि, सही हैबिट्स अपनाई जाएं और लाइफस्टाइल में स्मार्ट बदलाव किए जाएं तो दिमाग की ताकत बढ़ाई जा सकती है और मेमोरी कई गुना बेहतर हो सकती है. इन टिप्स को बता रहे हैं न्यूरो कंसलटेंट डॉ. अजय कुमार प्रजापति-
ब्रेन को बूस्ट करने के टिप्स. (Canva)
Brain Detox tips: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी कई गंभीर बीमारियों को जन्म दिया है. तनाव ऐसी ही परेशानियों में से एक है. बता दें कि, ऑफिस की टेंशन, घर की परेशानियां और घंटों फोन पर स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग से हमारा दिमाग बुरी तरह थक जाता है. जब याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है तो छोटी छोटी बातें भी भूलने लगते हैं और इसका सीधा असर काम और निजी जिंदगी दोनों पर पड़ता है. ऐसा होने से मेमोरी धीरे-धीरे कम होने लगती है. कई लोग सोचते हैं कि याददाश्त सुधरना किस्मत की बात है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है. इसके लिए आपको डिटॉक्स की जरूरत महसूस होती है. अगर सही हैबिट्स अपनाई जाएं और लाइफस्टाइल में स्मार्ट बदलाव किए जाएं तो दिमाग की ताकत बढ़ाई जा सकती है और मेमोरी कई गुना बेहतर हो सकती है. अगर आपके साथ भी ऐसा ही है तो आप कुछ टिप्स फॉलो कर सकते हैं. ऐसा करने से न सिर्फ आपका दिमाग तरोताजा महसूस करेगा बल्कि याददाश्त भी मजबूत होगी. अब सवाल है कि आखिर दिमाग को रिफ्रेश करने के लिए कौन सी आदतें अपनाएं? मेमोरी पावर बढ़ाने के टिप्स क्या हैं? हमारी कौन सी आदतें थकान और तनाव दूर कर सकती हैं? इस बारे में को बता रहे हैं मैक्स हॉस्पिटल वैशाली के न्यूरो कंसलटेंट डॉ. अजय कुमार प्रजापति-
अच्छी नींद: तनाव दूर करने के लिए अच्छी नींद लेना बेहद जरूरी है. बता दें कि, नींद के दौरान ब्रेन दिन भर की जानकारी को सहेजता है, उन्हें छांटता है और लंबे समय की मेमोरी में बदलता है. इसलिए रोजाना सात से आठ घंटे की नींद याददाश्त बढ़ाने की सबसे जरूरी शर्त है. दरअसल, बहुत से लोग सोचते हैं कि कम सोकर ज्यादा काम करना प्रोडक्टिविटी बढ़ाता है लेकिन असल में यह दिमाग को कमजोर कर देता है.
पैदल चलें: शारीरिक मेहनत का सीधा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है. डॉक्टर कहते हैं कि, अगर आप दिन भर में सिर्फ 3,000 से 7,500 कदम भी चलते हैं, तो भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) का खतरा काफी कम हो जाता है. पैदल चलना दिमाग की उम्र बढ़ने की रफ्तार को धीमा कर देता है.
फोन से दूरी: एक्सपर्ट के मुताबिक, हर इंसान को हफ्ते में एक दिन ‘नो फोन डे’ रखें. आम दिनों में भी फोन को अपनी आंखों से दूर रखें. अगर यह मुश्किल लगे, तो कुछ ऐसा काम करें जहां फोन ले जाना मुमकिन न हो, जैसे स्विमिंग. फोन से दूरी आपको असल जिंदगी से जोड़ेगी.
दोस्तों से मस्ती-मजाक: हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, जो लोग 80 की उम्र में भी 20-30 साल के युवाओं जैसा तेज दिमाग रखते हैं, उनमें एक बात कॉमन होती है, वो सोशलाइज होते हैं. दोस्तों के साथ बात करना और समय बिताना दिमाग को बूढ़ा होने से बचाता है.
कानों की देखरेख: एक्सपर्ट कहते हैं कि, सुनने की क्षमता कम होने से भी याददाश्त पर असर पड़ता है. तेज शोर वाली जगहों पर ईयरप्लग्स का इस्तेमाल करें और समय-समय पर हियरिंग टेस्ट करवाते रहें. इससे आपकी मेमोरी बूस्ट हो सकती है.
खुद को माफी दें: अक्सर हम दूसरों की गलती तो माफ कर देते हैं, लेकिन खुद के लिए बहुत सख्त हो जाते हैं. ऐसे में अगर कभी आपको बुरा महसूस हो, तो खुद से कहें, “कोई बात नहीं, मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूं या कर रही हूं.” खुद को दिलासा देना तनाव कम करने का पहला स्टेप है.
प्रकृति के बीच समय बिताएं: डॉ. कहते हैं कि हर इंसान को प्रतिदिन कुछ समय प्रकृति के बीच बिताना चाहिए. अगर काम में मन नहीं लग रहा, तो किसी पार्क या हरियाली वाली जगह पर टहलने जाएं. पेड़ों और पानी के बीच रहने से दिमाग को आराम मिलता है और फोकस अच्छी होता है.
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