Kidney Disease Symptoms: मोटापा किडनी की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है. जब शरीर का वजन ज्यादा होता है, तो किडनी को खून फिल्टर करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे समय के साथ किडनी को नुकसान हो सकता है और क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है. आइए जानते हैं इसके लक्षण और बचाव के तरीकों के बारे में.
क्या मोटापा चुपचाप आपके किडनी को नुकसान पहुंचा रहा है?
Kidney Disease Symptoms: किडनी की बीमारी अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में इसके साफ लक्षण दिखाई नहीं देते. कई लोगों को इसका पता तब चलता है जब वे किसी सामान्य हेल्थ चेकअप के लिए टेस्ट करवाते हैं. इसी वजह से क्रॉनिक किडनी डिजीज को आज एक साइलेंट बीमारी भी माना जाता है.डॉक्टर पहले से ही डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले बड़े कारण मानते हैं. लेकिन अब एक और वजह तेजी से सामने आ रही है-मोटापा.
जब शरीर का वजन ज्यादा होता है तो शरीर के कई अंगों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. किडनी भी उन्हीं में से एक है. किडनी का काम खून को फिल्टर करना और शरीर से गंदे पदार्थ बाहर निकालना होता है. जब वजन बढ़ जाता है तो किडनी को ज्यादा खून फिल्टर करना पड़ता है, जिससे समय के साथ उस पर दबाव बढ़ सकता है.
डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादा वजन होने पर किडनी को सामान्य से ज्यादा काम करना पड़ता है. इस स्थिति को ‘हाइपरफिल्ट्रेशन’ कहा जाता है, जिसमें किडनी जरूरत से ज्यादा तेजी से खून फिल्टर करने लगती है.शुरुआत में शरीर इस बदलाव के साथ एडजस्ट कर लेता है, लेकिन अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो किडनी के छोटे-छोटे फिल्टर (नेफ्रॉन) को नुकसान पहुंच सकता है. धीरे-धीरे किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है.
मोटापा अक्सर अकेला नहीं आता. इसके साथ कई दूसरी समस्याएं भी जुड़ जाती हैं, जैसे:
ये सभी समस्याएं किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं. उदाहरण के लिए, डायबिटीज किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है, जबकि हाई ब्लड प्रेशर किडनी के फिल्टर पर अतिरिक्त दबाव डालता है. जब ये समस्याएं एक साथ होती हैं तो किडनी रोग का खतरा और बढ़ जाता है.
किडनी की बीमारी के शुरुआती चरण में अक्सर कोई खास लक्षण नहीं होते. लेकिन बीमारी बढ़ने पर कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं, जैसे:
अगर ऐसे लक्षण दिखें तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है.
किडनी की बीमारी को जल्दी पकड़ने के लिए नियमित जांच बहुत मददगार होती है. इसके लिए दो टेस्ट आम तौर पर किए जाते हैं:
eGFR टेस्ट- यह बताता है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है.
uACR टेस्ट- इससे पता चलता है कि पेशाब में प्रोटीन तो नहीं जा रहा.
जिन लोगों का वजन ज्यादा है या जिन्हें डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर है, उन्हें समय-समय पर ये टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है.
किडनी हमारे शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है. यह लगातार खून को साफ करती है, शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखती है और कई जरूरी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है.मोटापा इन अंगों पर लंबे समय तक दबाव डाल सकता है. लेकिन अगर समय रहते सही जीवनशैली अपनाई जाए, नियमित जांच करवाई जाए और वजन संतुलित रखा जाए, तो किडनी से जुड़ी कई समस्याओं के खतरे को कम किया जा सकता है.
.Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.
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