Global First Heart Surgery in RML: भगवान के बाद अगर कोई जीवनदान देने वाला है तो वो हैं डॉक्टर. इसका जीता जागता एक उदाहरण नई दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML) में देखने को मिला. यहां के चिकित्सकों ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी न की हो. आइए जानते हैं क्या है यह बीमारी और कैसे संभव हुआ सफल ऑपरेशन-
दिल्ली के आरएमएल हॉस्पिटल में बहुत दुर्लभ बीमारी का सफल ऑपरेशन. (Canva)
Global First Heart Surgery in RML: भगवान के बाद धरती पर डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया गया है. क्योंकि, वहीं तो हैं जो मरीजों को नया जीवन और उम्मीद प्रदान करते हैं. यदि डॉक्टर नहीं होते तो स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं हो सकती है. डॉक्टर की निष्ठा किसी भी गंभीर मरीज को जीवनदान दे सकता है. इसी का जीता जागता एक उदाहरण नई दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML) में देखने को मिला. यहां के चिकित्सकों ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी न की हो. बता दें कि, 31 साल की एक महिला के दिल की बहुत ही जटिल सर्जरी सिर्फ 4 सेंटीमीटर के छोटे चीरे से कर दी. अस्पताल के अनुसार, महिला का दिल सामान्य से उल्टी दिशा दाईं तरफ था और वह जन्मजात दिल की बीमारी से जूझ रही थी. यही नहीं उसका लिवर, तितली और पेट कोई भी अपनी जगह नहीं थे.
आमतौर पर इंसान का दिल सीने के बीच में थोड़ा बायीं ओर होता है, जबकि लिवर पेट के ऊपर दायीं ओर होता है. वहीं, तिल्ली यानी स्पिलीन पेट के ऊपरी लेफ्ट साइड में पसलियों में होती है. लेकिन, आरएमएल अस्पताल में 31 साल की एक ऐसी महिला मरीज पहुंची, जिसके शरीर के सभी अंग एकदम उल्टे थे. एक बार तो डॉक्टर भी यह देख चकित रह गए. बता दें कि, मरीज का दिल उसके राइट साइड में था और लिवर बायीं ओर. डॉक्टर ने मरीज की गंभीरता को भांपते हुए मरीज का अस्पताल में सफल ऑपरेशन किया गया. अस्पताल का दावा है कि इतनी जटिल सर्जरी दुनिया में पहली बार हुई है. इस क्रिटिकल कंडीशन वाली मरीज की आरएमएल के सीटीवीएस सर्जरी विभाग के डायरेक्टर और एचओडी डॉ. नरेंद्र झाझरिया और उनकी टीम ने सर्जरी की.
हेल्थ एक्सपर्ट की माने तो, शरीर में उल्टे अंगों की बीमारी को मेडिकल भाषा में साइटस इन्वर्सस के नाम से जानते हैं. आरएमएल में इलाज के लिए पहुंची मरीज रामबाई को भी यही दुर्लभ बीमारी थी, जिसमें शरीर के सभी अंग उल्टे (शीशे की तरह) होते हैं. जन्म से दिल की बीमारी यानि कंजेनिटल हार्ट डिजीज से जूझ रही महिला के शरीर में पार्शियल एट्रियोवेंट्रिकुलर कैनल डिफेक्ट के साथ ही साइटस इन्वर्सस टोटालिस और ड्रेक्स्ट्रोकार्डिया भी था, जिसमें दिल बायीं की जगह दायीं ओर होता है.
डॉ. झाझरिया कहते हैं कि, ‘ऐसी सर्जरी में सीने की हड्डी काटनी पड़ती है, लेकिन आरएमएल में महिला की हार्ट सर्जरी बाएं ब्रेस्ट के नीचे केवल 4 सेमी का छोटा चीरा लगाकर की गई. साथ ही हार्ट-लंग मशीन (Cardiopulmonary bypass) को शरीर की बाहरी नसों से जोड़ा गया. वहीं, हार्ट की परेशानी को ठीक करने के लिए दिल के ऊपर की झिल्ली (pericardium) से एक पैच लेकर लगाया गया. इस दौरान सावधानी से टांके लगाए गए ताकि दिल के वाल्व और नसों को नुकसान न हो.’
डॉक्टर कहते है कि, दरअसल अस्पताल में जो महिला इलाज के लिए आई वह जन्मजात इस बीमारी से पीड़ित थी. दिल के वाल्व के बहुत पास थी. साथ ही शरीर के सभी अंग उल्टे होने के कारण ऑपरेशन करने में भी कई चुनौतियां थीं. मरीज को हार्ट-लंग मशीन पर भी रखना पड़ा. साथ ही हार्ट वाली जगह पर सिर्फ 4 सेमी के छोटे चीरे से ऑपरेशन करना बहुत हाई लेवल की सर्जरी स्किल मांगता है, हालांकि डॉ. जसविंदर कौर कोहली एंड टीम (हेड,कार्डियक एनेस्थीसिया) और मरीज के ब्लड सर्कुलेशन (परफ्यूजन) को सीनियर परफ्यूजनिस्ट जगदीश चंद्र और उनकी टीम की प्रिसाइज एप्रोच और सहयोग से सब ऑपरेशन सफल हो गया.
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