Tubal Ligation Reversal: नसबंदी को आमतौर पर स्थायी गर्भनिरोधक माना जाता है, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में इसके बाद भी प्रेग्नेंसी संभव हो सकती है. यह संभावना बहुत कम होती है, फिर भी ट्यूब के दोबारा जुड़ जाने, सर्जरी से रिवर्सल कराने या IVF जैसी आधुनिक तकनीक की मदद से महिला गर्भधारण कर सकती है.इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि किन हालात में नसबंदी के बाद प्रेग्नेंसी हो सकती है, इसके क्या विकल्प हैं और डॉक्टर इस बारे में क्या सलाह देते हैं.
क्या नसबंदी के बाद भी महिला हो सकती है प्रेग्नेंट?
Pregnancy After Sterilization: नसबंदी के बाद भी कुछ महिलाओं के लिए प्रेग्नेंसी संभव हो सकती है, लेकिन यह कई बातों पर निर्भर करता है. सबसे महत्वपूर्ण है कि पहले कौन-सी नसबंदी की गई थी. इसके अलावा महिला की उम्र, पहले की फर्टिलिटी, पार्टनर की प्रजनन क्षमता और कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या जैसे एंडोमेट्रियोसिस, पेल्विक इंफेक्शन या पहले की सर्जरी भी अहम भूमिका निभाती है.
फर्टिलिटी डॉक्टर इन सभी बातों का अध्ययन करने के बाद यह तय करते हैं कि किस इलाज से सफल गर्भधारण की संभावना ज्यादा होगी. नसबंदी के बाद मुख्य रूप से दो विकल्प होते हैं- ट्यूबल लिगेशन रिवर्सल सर्जरी और इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF). हर महिला के लिए सही विकल्प अलग हो सकता है, इसलिए इलाज व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार तय किया जाता है.
Cleveland Clinic (क्लीवलैंडक्लिनिक) की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्यूबल लिगेशन रिवर्सल एक सर्जरी है जिसमें फैलोपियन ट्यूब्स के कटे या बंद हिस्सों को दोबारा जोड़ा जाता है, ताकि अंडाणु और शुक्राणु फिर से मिल सकें और प्राकृतिक रूप से गर्भधारण हो सके. सर्जरी से पहले पुरुष पार्टनर का सीमेन एनालिसिस किया जाता है, ताकि पुरुष संबंधित बांझपन की संभावना को पहले ही समझा जा सके. डॉक्टर पहले की गई नसबंदी की सर्जरी की रिपोर्ट भी देखते हैं, क्योंकि यदि ट्यूब का बड़ा हिस्सा हटाया गया हो या जला दिया गया हो, तो रिवर्सल की सफलता कम हो सकती है.अगर सर्जरी सफल रहती है, तो कपल प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण कर सकते हैं और बार-बार IVF की जरूरत नहीं पड़ती. 34 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में सफलता दर लगभग 60 से 70 प्रतिशत तक बताई जाती है, और ज्यादातर गर्भधारण सर्जरी के पहले दो साल में होते हैं.
Cleveland Clinic (क्लीवलैंडक्लिनिक) में छपी जानकारी के अनुसार IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन में फैलोपियन ट्यूब्स की जरूरत नहीं होती. इस प्रक्रिया में महिला को दवाएं दी जाती हैं ताकि अंडाणु विकसित हों. फिर अंडाणु निकालकर उन्हें लैब में शुक्राणु के साथ निषेचित किया जाता है. बने हुए भ्रूण को कुछ दिनों बाद गर्भाशय में स्थापित किया जाता है. यदि अतिरिक्त भ्रूण बनते हैं, तो उन्हें भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है.IVF का एक बड़ा फायदा यह है कि एक ही चक्र में कई अंडाणु लिए जाते हैं और उनमें से सबसे अच्छे भ्रूण को चुना जाता है. अगर भविष्य में फिर से बच्चा चाहिए, तो सुरक्षित रखे गए भ्रूण का उपयोग किया जा सकता है. इसके अलावा, IVF में एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का जोखिम ट्यूबल रिवर्सल की तुलना में काफी कम होता है.
कौन-सा इलाज बेहतर रहेगा, यह पूरी तरह महिला और उसके पार्टनर की मेडिकल स्थिति पर निर्भर करता है. कम उम्र की और अच्छी ट्यूब लंबाई वाली महिलाओं के लिए ट्यूबल रिवर्सल बेहतर हो सकता है, खासकर अगर वे एक से ज्यादा बच्चे चाहती हों. वहीं 35 वर्ष से अधिक उम्र या अन्य फर्टिलिटी समस्याओं में IVF ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है.
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