Tips For Menopause: मेनोपॉज में महिलाओं के शरीर में कई प्रकार के हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसकी वजह से महिलाओं को कई प्रकार की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती है. रुजुता दिवेकर ने हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए पतियों को चेताया है कि, वे अपनी पत्नियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें. आइए जानते हैं और क्या कहा रुजुता दिवेकर ने-
मेनोपॉज के कठिन दौर में रुजुता दिवेकर की पतियों को खास सलाह. (Canva)
Tips For Menopause: मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक नेचुरल चरण है, जिसमें पीरियड्स स्थायी रूप से बंद हो जाते हैं. यह आमतौर पर 45 से 55 की उम्र में होता है. इस दौर में महिलाओं के शरीर में कई प्रकार के हार्मोनल बदलाव होते हैं जिसकी वजह से महिलाओं को कई प्रकार की हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती है. इसका मुख्य कारण एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टेरोन लेवल में कमी आना है. इस स्थिति में कामेक्षा में कमी, हॉट फ्लैश, रात में पसीना, मूड स्विंग, नींद की कमी और वजन बढ़ने जैसे लक्षण दिखते हैं. कुल मिलाकर कह सकते हैं कि, मेनोपॉज महिलाओं की ज़िंदगी का एक मुश्किल समय होता है. मेनोपॉज के मुश्किल दौर को समझते हुए सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर (Rujuta Diwekar) ने हाल ही में पतियों को कुछ सलाह दी हैं.
रुजुता दिवेकर ने हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए पतियों को चेताया है कि, वे अपनी पत्नियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें. खासकर जब वे मध्य आयु के करीब पहुंच रही हों. उन्होंने लिखा, ‘अगर आपकी पत्नी मेनोपॉज के शुरुआती दौर या रजोनिवृत्ति से गुजर रही हैं, तो बधाई हो. आपने कुछ तो अच्छा किया है कि वह अब भी आपके साथ हैं. अब इन तीन चीजों को करके उनके लिए इसे सार्थक बनाएं. और इन्हें करते समय चुप रहें.” इस कठिन में पत्नियों से जोर-जबरदस्ती करना ठीक नहीं है.
1. प्रतिदिन भोजन या पेय से संबंधित एक कार्य करें. जैसे- जब वह चावल या पराठा खा रही हो तो उसके लिए अचार मेज पर रखना सुनिश्चित करें. उसकी कॉफी का कप उठाना.
2. स्कूल से संबंधित कोई एक काम करें. बच्चों को स्कूल से लाने-ले जाने की जिम्मेदारी लें, या फिर स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा बनें.
3. जब आपकी मां, बहन, बच्चा या घरेलू नौकरानी आपकी पत्नी के बारे में गेंलत टिप्पणी करें तो ध्यान दें. ऐसे में चुप रहने के बजाय उसे चुप रहने को कहें.
आदित्य बिरला एजुकेशन ट्रस्ट की एमपावर- हेल्पलाइन की वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक रीमा भंडकर ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, महिलाएं आमतौर पर प्रीमेनोपॉज और मेनोपॉज के दौरान चुपचाप पीड़ा सहती हैं, जबकि यह वह समय होता है जब उन्हें अधिक समर्थन और सहानुभूति की जरूरत होती है. इस दौरान पति उनकी भावनाओं को समझें. उनसे किसी भी तरह की जोर-जबरदस्ती ठीक नहीं होती है. क्योंकि, इस दौरान कामेक्षा में भी कमी आती है.
मेनोपॉज के बारे में जब भी बात की जाती है, ज्यादातर समय इस तरह की बातें होती हैं, जैसे ये कोई बीमारी है. या डरने वाली बात है. ना तो मेनोपॉज बीमारी है और ना ही इससे डरने की जरूरत है. यह सिर्फ एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसके बाद आप प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं कर पाएंगी. बस, इसके सिवा आपके जीवन में कोई बदलाव नहीं होने वाला है और आपकी सेक्स लाइफ भी शानदार रहेगी.
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