What Is Autism: ऑटिज्म बच्चों में होने वाली एक न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें बच्चे का दिमाग सामान्य से अलग तरीके से काम करता है. इससे बच्चे के बोलने, समझने, दूसरों से जुड़ने और व्यवहार करने के तरीके पर असर पड़ सकता है. आइए जानते हैं इसके कारण, लक्षण और बचाव के बारे में.
ऑटिज्म क्या होता है?
Autism Symptoms: ऑटिज्म का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता है, लेकिन आनुवंशिक और गर्भावस्था से जुड़े कुछ कारक इसकी संभावना बढ़ा सकते हैं. इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, पर समय पर पहचान और सही थेरेपी से बच्चे के विकास में काफी सुधार लाया जा सकता है.
ऑटिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे का दिमाग सामान्य तरीके से थोड़ा अलग तरह से काम करता है. यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि दिमाग के काम करने के तरीके में अंतर है. यही वजह है कि ऑटिज्म से जुड़ा लक्ष्य ‘इलाज करके ठीक करना’ नहीं होता, बल्कि बच्चे की खूबियों को समझकर उसे सही दिशा में सहयोग देना होता है.आज के समय में ऑटिज्म को एक पहचान (Identity) के रूप में भी देखा जाता है, सिर्फ एक मेडिकल डायग्नोसिस के रूप में नहीं. ऑटिज्म से जुड़े बच्चे और बड़े लोग अलग-अलग तरह की क्षमताओं और चुनौतियों के साथ जीवन जीते हैं.
क्लीवलैंड क्लिनिक(cleveland clinic) की एक रिपोर्ट के अनुसार ऑटिज्म का पूरा मेडिकल नाम ‘ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD)’ है. ‘स्पेक्ट्रम’ का मतलब है कि इसके लक्षण और असर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं.कुछ बच्चों में इसके हल्के लक्षण होते हैं, जबकि कुछ को ज्यादा सहयोग की जरूरत होती है. अमेरिका में लगभग हर 31 बच्चों में से 1 बच्चा ASD से प्रभावित पाया गया है.
यह मुख्य रूप से दो भागों को प्रभावित करता है:
ऑटिज्म के लक्षण उम्र के साथ अलग-अलग रूप में दिख सकते हैं.
छोटे बच्चे अपना नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देते, आंखों में कम देखते हैं या इशारों को फॉलो नहीं करते. वे अक्सर अकेले खेलना पसंद करते हैं और ‘पीक-ए-बू’ जैसे खेलों में रुचि नहीं दिखाते. वहीं कुछ बच्चे एक ही शब्द या वाक्य बार-बार दोहराते हैं (इकोलालिया) या हाथ हिलाना, झूलना, घूमना जैसे दोहराव वाले व्यवहार करते हैं. दिनचर्या में बदलाव से वे बहुत परेशान हो सकते हैं.
बड़े बच्चों को बातचीत शुरू करने या आगे बढ़ाने में कठिनाई हो सकती है. वे सीमित विषयों पर ही बात करते हैं या दूसरों की भावनाओं को समझने में दिक्कत महसूस करते हैं.उन्हें व्यंग्य (sarcasm) समझने में परेशानी हो सकती है, आंखों में कम संपर्क रखते हैं और सामाजिक नियमों को समझने में कठिनाई होती है. वे किसी खास विषय में बहुत गहरी रुचि भी रख सकते हैं.
ऑटिज्म का कोई एक निश्चित कारण नहीं मिला है. माना जाता है कि यह ‘जेनेटिक्स (आनुवंशिक कारणों)’ और गर्भावस्था से जुड़े कुछ कारकों से जुड़ा होता है.कुछ स्थितियां जो खतरा बढ़ा सकती हैं, उनमें 35 साल से ज्यादा उम्र में गर्भधारण, गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज, समय से पहले जन्म या गर्भ में ऑक्सीजन की कमी शामिल हैं.हालांकि, इन कारकों के होने का मतलब यह नहीं कि बच्चा जरूर ऑटिस्टिक होगा.
ऑटिज्म का कोई ‘इलाज’ नहीं है, लेकिन कई तरह की थेरेपी उपलब्ध हैं जो बच्चे को बेहतर तरीके से सीखने और आगे बढ़ने में मदद करती हैं. जैसे स्पीच थेरेपी, ऑक्युपेशनल थेरेपी और बिहेवियरल थेरेपी आम तौर पर दी जाती हैं. जितनी जल्दी सहयोग शुरू हो जाए, उतना ज्यादा फायदा होता है,अगर बच्चे को साथ में ADHD, एंग्जायटी या अन्य समस्या भी है, तो उसके लिए अलग इलाज या काउंसलिंग दी जा सकती है.
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