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न्यू मॉडल पब्लिक इंग्लिश स्कूल में श्रद्धा और प्रकृति-चेतना के साथ सम्पन्न हुआ तुलसी पूजन

सूरत (गुजरात) [भारत], जनवरी 2: मानसरोवर सोसायटी, एस.एम.सी. लेक, डिंडोली, सूरत स्थित प्रतिष्ठित न्यू मॉडल पब्लिक इंग्लिश स्कूल में 24 दिसंबर को अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं आध्यात्मिक वातावरण…

सूरत (गुजरात) [भारत], जनवरी 2: मानसरोवर सोसायटी, एस.एम.सी. लेक, डिंडोली, सूरत स्थित प्रतिष्ठित न्यू मॉडल पब्लिक इंग्लिश स्कूल में 24 दिसंबर को अत्यंत श्रद्धा, गरिमा एवं आध्यात्मिक वातावरण के साथ तुलसी पूजन का आयोजन किया गया। यह आयोजन विद्यालय परिसर को भक्ति, चिंतन और प्रकृति-संवेदनशीलता के पावन केंद्र में परिवर्तित करता प्रतीत हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत तुलसी माता पर आधारित मधुर भजनों एवं भावपूर्ण कविताओं से हुआ, जिसने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इसके पश्चात पुराणों एवं उपनिषदों से श्लोकों का सस्वर उच्चारण किया गया, जिससे भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की गूढ़ चेतना विद्यार्थियों के मन में जागृत हुई।

कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा विद्यार्थियों द्वारा लिया गया “वृक्ष रक्षा संकल्प”, जिसमें सभी ने पेड़ों की रक्षा और प्रकृति के संरक्षण का प्रण लिया। यह क्षण वास्तव में दिव्य एवं अविस्मरणीय था, जिसने उपस्थित सभी जनों के हृदय को भावविभोर कर दिया।

विद्यालय के सम्माननीय प्रधानाचार्य श्री राणा जनार्दन ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन से कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान की। उन्होंने तुलसी पूजन के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को प्रकृति के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनने का संदेश दिया।

पब्लिक इंग्लिश स्कूल

तुलसी पूजन का महत्व बहुआयामी है—

  • वैज्ञानिक दृष्टि से, तुलसी औषधीय गुणों से भरपूर है और वातावरण को शुद्ध करने में सहायक है।

  • पौराणिक एवं ऐतिहासिक रूप से, तुलसी को भक्ति, पवित्रता और त्याग का प्रतीक माना गया है।

  • मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक स्तर पर, ऐसे धार्मिक अनुष्ठान मन को शांति, संतुलन और सकारात्मकता प्रदान करते हैं।

  • पर्यावरणीय संदर्भ में, तुलसी पूजन मानव और प्रकृति के बीच सामंजस्य का संदेश देता है तथा सिखाता है कि प्रकृति की रक्षा एक नैतिक एवं आध्यात्मिक कर्तव्य है।

न्यू मॉडल पब्लिक इंग्लिश स्कूल में आयोजित यह तुलसी पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संस्कृति, विज्ञान और प्रकृति के बीच सजीव संवाद था, जिसने यह सिद्ध किया कि जब शिक्षा संस्कारों से जुड़ती है, तब वह समाज को दिशा देने वाली शक्ति बन जाती है।

(The article has been published through a syndicated feed. Except for the headline, the content has been published verbatim. Liability lies with original publisher.)

Indianews Webdesk

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