CAPF Act 2026: सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स यानी CAPF के अधिकारियों के एक ग्रुप ने हाल ही में बने CAPF एक्ट के कुछ नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
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Supreme Court petition on CAPF Act: सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स यानी CAPF के अधिकारियों के एक ग्रुप ने हाल ही में बने CAPF एक्ट के कुछ नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पिटीशनर में गैलेंट्री मेडल जीतने वाले और कुछ महिला अधिकारी शामिल हैं.
सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इन अधिकारियों का आरोप है कि इस कानून से उनके करियर में आगे बढ़ने के मौके कम हो जाएंगे. कोर्ट के डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर अगस्त के पहले हफ्ते में सुनवाई तय की है.
अधिकारियों और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने बताया कि सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF), बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF), इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP), सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF), और सशस्त्र सीमा बल (SSB) समेत पांच सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के लगभग 3,000 कैडर अधिकारियों ने पिटीशन फाइल की हैं.
ये पिटीशन संविधान के आर्टिकल 32 के तहत फाइल की गई हैं, जो नागरिकों को अपने फंडामेंटल राइट्स की रक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार देता है. पिटीशनर का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए मजबूर हुए क्योंकि उन्हें लगता है कि नए कानून ने उन्हें इंसाफ नहीं दिया है और सुप्रीम कोर्ट के मई 2025 के निर्देशों का पालन नहीं किया गया है.
अधिकारियों का मानना है कि नया कानून CAPF कैडर अधिकारियों के रुके हुए प्रमोशन की लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान नहीं करेगा. उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया है कि CAPF (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट, 2026 के सेक्शन 3 और 4 को अल्ट्रा वायर्स घोषित किया जाए और केंद्र सरकार को मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पूरी तरह से लागू करने का निर्देश दिया जाए.
अपने 23 मई, 2025 के फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज में इंस्पेक्टर जनरल (IG) लेवल तक इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) अधिकारियों का डेपुटेशन धीरे-धीरे कम किया जाना चाहिए ताकि उन कैडर अधिकारियों को ज़्यादा मौके मिल सकें जिनके प्रमोशन में देरी से फोर्सेज के मनोबल पर बुरा असर पड़ सकता है.
सुप्रीम कोर्ट ने इस ऑर्डर के खिलाफ केंद्र सरकार की रिव्यू पिटीशन भी खारिज कर दी. इसके बाद, केंद्र सरकार ने पार्लियामेंट में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल पेश किया, जिसे अप्रैल में कानून के तौर पर नोटिफाई किया गया. इस एक्ट का सेक्शन 3 सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज में भर्ती और सर्विस की शर्तों को रेगुलेट करता है, जबकि सेक्शन 4 केंद्र सरकार को शेड्यूल में बदलाव करने का अधिकार देता है.
सूत्रों के मुताबिक, पिटीशन फाइल करने वाले अधिकारियों ने रिक्वेस्ट की कि CAPFs में एडिशनल डायरेक्टर जनरल (ADG) लेवल के पदों को सिर्फ IPS अधिकारियों के डेप्युटेशन से भरने के बजाय, संबंधित फोर्सेज के कैडर अधिकारियों को भी तय क्वालिफिकेशन के आधार पर मौके दिए जाने चाहिए. सरकार का कहना है कि इस एक्ट का मकसद सभी सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज में कर्मचारियों की सर्विस की शर्तों के लिए एक जैसा कानूनी फ्रेमवर्क बनाना है, जिससे कैडर अधिकारियों और IPS से डेप्युटेशन पर आए अधिकारियों के लिए अलग-अलग सर्विस नियमों का मौजूदा सिस्टम खत्म हो जाएगा.
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