Justice Yashwant Varma: इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा एक बार फिर से सुर्खियों में आ गए हैं. उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके दिल्ली स्थित आवास से भारी मात्रा में जले हुए नोट मिले थे. इसके बाद से ही उनके खिलाफ आंतरिक जांच चल रही थी. पिछले साल से वो विवादों में घिरे थे.
जस्टिस यशवंत वर्मा
Justice Yashwant Varma: इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा एक बार फिर से सुर्खियों में आ गए हैं. उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके नई दिल्ली स्थित आवास से भारी मात्रा में जले हुए नोट मिले थे. इसके बाद से ही उनके खिलाफ आंतरिक जांच चल रही थी. पिछले साल एक साल से अधिक समय से वह विवादों में घिरे हुए थे.
यहां पर बता दें कि जस्टिस यशवंत वर्मा को पहले विवाद के बाद दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था. हालांकि वह पर वकील इसके विरोध में उतर आए थे. इसके बाद अब जाकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है. यह इस्तीफा उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर कथित तौर पर बिना हिसाब-किताब वाली नकदी मिलने को लेकर हुए विवाद के लगभग एक साल बाद आया. पिछले साल ही उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया तेज हो गई थी. यहां पर तक कि 140 से अधिक लोकसभा सदस्यों ने उन्हें पद से हटाने की मांग वाले प्रस्ताव का समर्थन किया था.
यह विवाद पिछले साल मार्च का है, जब दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर आग लग गई थी. आग बुझाने के दौरान मौके पर नकदी के ढेर मिले थे. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, ये ढेर 1.5 फीट से भी ऊंचे थे, हालांकि, इसकी आधिकारिक पु्ष्टि नहीं हो पाई थी. इस घटना के बाद जनता के भारी विरोध हुआ था. तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, संजीव खन्ना ने एक आंतरिक जांच का आदेश दिया और जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया. जांच पूरी होने तक उनसे न्यायिक कार्य वापस ले लिया गया था.
वहीं, अगस्त 2025 में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने आरोपों की जांच के लिए ‘जजेस (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968’ के तहत तीन सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया था, इस पैनल में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस मनिंदर मोहन, और वरिष्ठ वकील बी.वी. आचार्य शामिल है. इससे भी पहले आंतरिक जांच समिति, जिसमें जस्टिस शील नागू, जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस अनु शिवरामन ने पहली नज़र में पाया कि जिस कमरे में कथित तौर पर नकदी मिली थी, उस पर जस्टिस वर्मा और उनके परिवार का नियंत्रण था.
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