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Assam Election 2026: ऊपरी और निचले असम की राजनीति में इतना बड़ा अंतर क्यों? समझिए असली ‘गेम प्लान’

असम चुनाव 2026: क्या ब्रह्मपुत्र नदी सिर्फ भूगोल नहीं, बल्कि राजनीति भी बांटती है? जानिए ऊपरी और निचले असम के वो छिपे मुद्दे, जो बदल सकते हैं सत्ता का पूरा समीकरण...

Upper vs Lower Assam: असम की राजनीति को गहराई से समझने के लिए ऊपरी असम और निचले असम के बीच के अंतर को समझना बहुत जरूरी है. यह सिर्फ़ एक भौगोलिक बंटवारा नहीं है बल्कि ये दो अलग-अलग दुनिया दिखाते हैं सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से. हर इलाके से जुड़े मुद्दे अलग-अलग हैं और उनकी अपनी-अपनी बातें भी और यह अंतर उनके वोटिंग पैटर्न तक भी फैला हुआ है.

ऊपरी असम बनाम निचला असम

यह सच है कि ऊपरी और निचले असम के सामने अलग-अलग मुद्दे हैं. इस अंतर का असर चल रहे चुनाव अभियानों में साफ दिख रहा है. फिर भी BJP और कांग्रेस दोनों ही एक- दूसरे के प्रभाव वाले इलाकों में अपने-अपने वोटर बेस को बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रही हैं. 2021 के चुनावों की तरह ही इस बार भी वोटरों का मुख्य ध्यान असोमिया अस्मिता यानी असमिया पहचान पर बना हुआ है. BJP बांग्लादेशी घुसपैठ, जमीन के मालिकाना हक और असम की देसी संस्कृति को बचाने जैसे मुद्दों पर खास ज़ोर दे रही है. इसके अलावा, CAA और NRC जैसे विवादित मुद्दे लोगों की सोच में सबसे आगे हैं. कांग्रेस अपनी तरफ़ से अपने कैंपेन को सेक्युलर पॉलिटिक्स पर फोकस कर रही है जबकि AIUDF के बदरुद्दीन अजमल माइनॉरिटी को खुश करने की पॉलिटिक्स को प्राथमिकता दे रहे हैं, यह एक ऐसी स्ट्रैटेजी है जिसे उन्होंने पहले भी लगातार अपनाया है. अभी के हालात को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि जो भी पॉलिटिकल पार्टी असमिया पहचान के मुद्दे को असरदार तरीके से उठाकर वोट हासिल करने में कामयाब होगी, उसके दोबारा सरकार बनाने की सबसे ज़्यादा संभावना होगी.

ऊपरी असम: पहचान, रिसोर्स और अस्मिता की पॉलिटिक्स

ऊपरी असम में डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, जोरहाट और शिवसागर जैसे ज़िले आते हैं. इसे बड़े पैमाने पर असमिया पहचान और नेचुरल रिसोर्स के इर्द-गिर्द घूमने वाली पॉलिटिक्स का सेंटर माना जाता है. इस इलाके की खासियत है कि यहां चाय के बागानों के साथ-साथ तेल और गैस के भंडार भी हैं. पुराने समय से, यह इलाका यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम (ULFA) की गतिविधियों का गढ़ रहा है. इसलिए इंसर्जेंसी और डेवलपमेंट के बीच का अंतर लंबे समय से इस इलाके में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना हुआ है. आज भी ऊपरी असम में वोटिंग का ट्रेंड उन राजनीतिक पार्टियों के पक्ष में जाता है जो असमिया पहचान की वकालत करती हैं, स्थानीय अधिकारों की वकालत करती हैं और घुसपैठ के खिलाफ सख्त रवैया अपनाती हैं. सर्बानंद सोनोवाल जैसे नेताओं ने पुराने समय से इसी इलाके में एक मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई है. 

निचला असम: ज़्यादा गणित, कम पहचान

निचले असम में बारपेटा, धुबरी, नागांव और बोंगाईगांव जैसे इलाके आते हैं. यहां की राजनीति काफी हद तक डेमोग्राफिक है. यानी आबादी के स्ट्रक्चर पर आधारित है. इस इलाके में मुस्लिम आबादी काफी ज़्यादा है  इसलिए चुनावी कहानी सेक्युलरिज़्म बनाम राजनीतिक ध्रुवीकरण के थीम के इर्द-गिर्द घूमती है. बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) का असर खास तौर पर निचले असम में ज़्यादा है. इस इलाके में मुद्दे अक्सर नागरिकता, NRC, CAA और सोशल सिक्योरिटी पर केंद्रित होते हैं.

अलग मुद्दे अलग चुनावी एजेंडा

जहां ऊपरी असम में जमीन के अधिकार, रोज़गार, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट और असमिया कल्चर मुख्य चुनावी मुद्दे हैं, वहीं निचले असम में मुख्य चिंताएं पहचान, सुरक्षा, नागरिकता और रिप्रेजेंटेशन हैं. उदाहरण के लिए NRC और CAA का असर दोनों इलाकों में काफी अलग रहा है. ऊपरी असम में, इन उपायों को घुसपैठ रोकने के कदम के तौर पर देखा गया; इसके उलट  निचले असम में उन्हें अस्तित्व के लिए खतरा माना गया.

2026 का चुनाव दिलचस्प क्यों है?

2026 का असम चुनाव खास तौर पर दिलचस्प होने वाला है क्योंकि यह अब सिर्फ़ ऊपरी और निचले असम के बीच की चुनावी लड़ाई नहीं रह गई है. यह तेज़ी से पहले से बनी-बनाई बातों और डेवलपमेंट के एक नए मॉडल के बीच मुकाबला बनता जा रहा है.

Shivani Singh

शिवानी सिंह पिछले 5 वर्षों से डिजिटल मीडिया में सब-एडिटर, एंकर और कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट के रूप में सक्रिय हैं. उन्होंने पत्रकारिता में हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा, महाराष्ट्र से एमए की पढ़ाई पूरी की है. 'Chakde Cricket', 'InKhabar' और 'Bihari News' जैसे प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ काम करने के बाद वर्तमान में 'इंडिया न्यूज़' में अपनी सेवाएं दे रही हैं. क्रिकेट से जुड़ी खबरों के साथ-साथ राजनीति, बिजनेस, सरकारी योजनाओं, पर्सनल फाइनेंस और मनोरंजन से जुड़े विषयों पर लेखन और कंटेंट तैयार करने का अनुभव है. ट्रेंडिंग खबरों पर भी उनकी खास नजर रहती है. जटिल विषयों को आसान और स्पष्ट भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है.

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