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BlueBird Block-2 लॉन्च क्यों है ISRO के लिए गेम-चेंजर? कमर्शियल स्पेस रेस में भारत की बड़ी छलांग, यहां देखें LIVE लॉन्च

BlueBird Block-2 Satellite Launch: यह मिशन US-बेस्ड AST स्पेसमोबाइल के ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 स्पेसक्राफ्ट को ले जाएगा, जो LVM3 लॉन्च व्हीकल की छठी ऑपरेशनल फ़्लाइट होगी.

ISRO’s BlueBird Block-2 Satellite Launch:  इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (ISRO) आज थोड़ी देर में अपना हेवी-लिफ्ट LVM3-M6 रॉकेट लॉन्च करने वाला है. यह रॉकेट US-बेस्ड AST स्पेसमोबाइल का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट ले जाएगा. यह किसी इंडियन लॉन्च व्हीकल द्वारा उड़ाया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड होगा. 6100 kg का यह कम्युनिकेशन सैटेलाइट सुबह 8.54 बजे लॉन्च होने वाला है और लॉन्च के लगभग 15 मिनट बाद इसे लगभग 520 km की लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में इंजेक्ट किया जाएगा. ISRO ने कहा कि यह मिशन LVM-3 की छठी ऑपरेशनल फ़्लाइट और इसका तीसरा कमर्शियल लॉन्च होगा.

ISRO ने कहा, LVM3-M6/ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन एक डेडिकेटेड कमर्शियल लॉन्च है और यह अब तक का सबसे बड़ा कमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट में डिप्लॉय करेगा.”

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 क्या है?

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को AST स्पेसमोबाइल ने डायरेक्ट-टू-मोबाइल कनेक्टिविटी देने के मकसद से नेक्स्ट-जेनरेशन सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन के हिस्से के तौर पर डिज़ाइन किया है. पारंपरिक कम्युनिकेशन सैटेलाइट के उलट, जो खास ग्राउंड स्टेशनों से सिग्नल भेजते हैं, यह सिस्टम सीधे स्टैंडर्ड स्मार्टफोन से कनेक्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

ISRO ने कहा, “सैटेलाइट को स्पेस-बेस्ड सेलुलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को सीधे स्टैंडर्ड मोबाइल स्मार्टफोन से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है.”

AST SpaceMobile के मुताबिक, यह ग्रुप 4G और 5G सर्विस को सपोर्ट करेगा, जिसमें वॉयस कॉल, टेक्स्ट मैसेजिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और डेटा एक्सेस शामिल हैं, यहां तक ​​कि दूर-दराज और कम सुविधाओं वाले इलाकों में भी.

यह मिशन क्यों ज़रूरी है

यह लॉन्च ग्लोबल कमर्शियल लॉन्च मार्केट में अपनी पहुंच बढ़ाने की ISRO की कोशिश का एक और कदम है. LVM-3 ने पहले 2022 और 2023 में OneWeb के लिए दो बड़े कमर्शियल मिशन किए हैं, जिसमें यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के उन्हें लॉन्च करने से मना करने और यूरोप के Ariane-5 लॉन्चर के रिटायर होने के बाद 72 सैटेलाइट तैनात किए गए थे.

जहां SpaceX के Falcon 9 और यूरोप के Ariane 6 जैसे हेवी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल मार्केट में छाए हुए हैं, वहीं ISRO LVM-3 को कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्च के लिए कम लागत वाले विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है.

बुधवार का मिशन तीसरी बार होगा जब LVM-3 किसी सैटेलाइट को लो अर्थ ऑर्बिट में भेजेगा. असल में इसे पृथ्वी से लगभग 36,000 km ऊपर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में पेलोड ले जाने के लिए डिज़ाइन किया गया था, बाद में इस रॉकेट को LEO मिशन के लिए बदला गया और इसका नाम बदलकर GSLV-Mk3 से LVM-3 कर दिया गया.

तेज़ टर्नअराउंड, भारी पेलोड

यह लॉन्च LVM3-M5 मिशन के दो महीने से भी कम समय बाद हुआ है, जिसने 2 नवंबर को CMS-03 कम्युनिकेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक ऑर्बिट में भेजा था. दोनों मिशन के बीच का छोटा गैप व्हीकल के लिए अब तक का सबसे तेज़ टर्नअराउंड दिखाता है और यह ISRO की भारी मिशन को तेज़ी से असेंबल करने और लॉन्च करने की बढ़ती क्षमता को दिखाता है.

6,100 kg के साथ, ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 ने वनवेब लॉन्च के दौरान बनाए गए ISRO के पिछले LEO पेलोड रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया. एजेंसी ने पिछले महीने इसी रॉकेट का इस्तेमाल करके अपने अब तक के सबसे भारी सैटेलाइट — 4,410 kg CMS-03 — को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में रखकर एक अलग माइलस्टोन भी बनाया. विज्ञापन

भविष्य के मिशन के लिए अपग्रेड

ISRO ने कहा कि यह मिशन भविष्य के प्रोग्राम के लिए LVM-3 को अपग्रेड करने की चल रही कोशिशों से मेल खाता है, जिसमें गगनयान ह्यूमन स्पेसफ्लाइट मिशन और प्लान किया गया भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन शामिल है.

स्पेस एजेंसी क्रायोजेनिक अपर स्टेज के थ्रस्ट को बढ़ाकर लिफ्ट कैपेसिटी बढ़ाने पर काम कर रही है और दूसरे स्टेज के लिए सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के इस्तेमाल पर भी विचार कर रही है. इन बदलावों से गाड़ी की पेलोड कैपेसिटी लगभग 10,000 kg से LEO तक बढ़ सकती है.

ISRO क्रायोजेनिक इंजन के लिए एक “बूटस्ट्रैप रीइनिशन” सिस्टम भी डेवलप कर रहा है, जो अपर स्टेज को बिना बाहरी गैसों के रीस्टार्ट करने देगा. इससे एफिशिएंसी में सुधार होगा और कई सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट वाले ज़्यादा कॉम्प्लेक्स मिशन को इनेबल किया जा सकेगा.

एजेंसी ने कहा, “इन अपग्रेड का मकसद पेलोड कैपेसिटी को बढ़ाना, लागत कम करना और LVM-3 की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी को बढ़ाना है.” ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन के साथ, ISRO अपनी कमर्शियल लॉन्च क्षमताओं और आने वाले सालों में ज़्यादा मुश्किल स्पेस मिशन के लिए अपनी तैयारी, दोनों को दिखाना चाहता है.

यहां देखें लाइव

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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