Cyclone Murasu School Holiday: चक्रवात मुरासु के खतरे के चलते तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में भारी बारिश का अलर्ट जारी है. कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद हैं. जानें 3 नवंबर का ताजा अपडेट.
Cyclone Murasu School Holiday: बंगाल की खाड़ी में उठे गंभीर चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ ने दक्षिण भारत के कई राज्यों में चिंता बढ़ा दी है. मौसम विभाग ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई है. तेज हवाओं और जलभराव के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा के लिए कई जिलों में स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला किया है. हालांकि, चक्रवात का असर सभी जिलों में एक जैसा नहीं है. इसी वजह से कहीं एक दिन तो कहीं तीन दिन तक शिक्षण संस्थानों में छुट्टी घोषित की गई है. ऐसे में विद्यार्थियों और अभिभावकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि 3 नवंबर को स्कूल खुलेंगे या छुट्टी रहेगी? आइए जानते हैं किन राज्यों और जिलों में स्कूल बंद रखने का आदेश जारी किया गया है.
चक्रवात मुरासु के प्रभाव को देखते हुए तमिलनाडु के चेन्नई और तिरुवल्लूर जिलों में सोमवार, 2 नवंबर 2026 को सभी स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित की गई थी. जिला प्रशासन ने यह फैसला मौसम विभाग की भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी और संभावित जलभराव को ध्यान में रखते हुए लिया था. प्रशासन का उद्देश्य खराब मौसम के दौरान विद्यार्थियों को किसी भी तरह के खतरे से बचाना है. फिलहाल चेन्नई और तिरुवल्लूर में 3 नवंबर के लिए छुट्टी बढ़ाने का कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है. ऐसे में विद्यार्थियों को स्कूल जाने से पहले प्रशासन और अपने शिक्षण संस्थान की ओर से जारी ताजा सूचना जरूर देखनी चाहिए.
चक्रवात मुरासु के कारण मौसम तेजी से बदल सकता है. ऐसे में अभिभावकों और विद्यार्थियों को सलाह दी जाती है कि स्कूल जाने से पहले अपने जिले के कलेक्टर, शिक्षा विभाग या स्कूल प्रबंधन की ओर से जारी ताजा निर्देश जरूर जांच लें.
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मौसम विभाग (IMD) के 2 नवंबर के अपडेट के अनुसार, चक्रवात मुरासु के 2 नवंबर की रात करीब 11:30 बजे से 3 नवंबर की सुबह 4 बजे के बीच दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है. चक्रवात का संभावित लैंडफॉल नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के आसपास बताया गया है. इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. वहीं, हवा के तेज झोंकों की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है. तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण तटीय इलाकों में नुकसान, जलभराव और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है. इसी को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें अलर्ट पर हैं.
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