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8 साल की उम्र में बनीं दरभंगा महाराज की तीसरी पत्नी, 64 साल तक रहीं विधवा; निधन के बाद किसको मिलेगी संपत्ति

Darbhanga Maharani: दरभंगा महाराज रियासत की आखिरी महारानी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया है. यह वही रियासत है, जिसने अपनी अकूत संपत्ति देश के लिए दान दी. जानिए कुछ अहम बातें.

Darbhanga Maharani: आपने अक्सर एक कहावत सुनी होगी- ‘तुम कहीं के कलेक्टर हो क्या?’ ठीक इसी तरह से बिहार में भी एक कहावत काफी पॉपुलर है, ‘दरभंगा महाराज है का रे’ इसका मतलब अपनी हैसियत से ज्यादा दम नहीं बताओ. इसे यूं ही नहीं कहा गया. बल्कि, इसके पीछे एक इतिहास छुपा हुआ है. यह बात बिहार के एक राजघराने दरभंगा महाराज को लेकर प्रसिध्द हुई. यह उनकी आर्थिक सम्पन्नता के बारे में भी जानकारी देती है. आज इसी राजघराने की आखिरी महारानी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया है. तो जानते हैं इस राजघराने को लेकर कुछ जरूरी बातें.

सोमवार को दरभंगा राज की आखिरी महारानी कामसुंदरी देवी का निधन हो गया. उन्होंने 94 साल की उम्र में आखिरी सांस ली. उनके दाह-संस्कार के दौरान विवाद की स्थिति भी देखी गई. हालांकि, मौजूदा सरकार के मंत्री और प्रशासन की पहल पर महारानी कामसुंदरी का अंतिम संस्कार संपन्न किया गया. दरभंगा रियासत की गिनती देश के देश के सबसे अमीर राजघरानों में होती रही. साल 1962 में आखिरी महाराज कामेश्वर सिंह के देहांत के वक्त दरभंगा महाराज की संपत्ति करीब 2000 करोड़ के लगभग थी. अगर आज की इससे तुलना की जाए तो यह 4 हजार करोड़ रुपये से अधिक होती. महाराज कामेश्वर सिंह के निधन के बाद उनके ट्रस्टियों ने इस अकूत धन को जमकर लुटाया.

कौन थीं कामेश्वरी देवी?

जानकारी के अनुसार, महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा के आखिरी किंग कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी थीं. उनका जन्म 22 अक्तूबर 1932 को मधुबनी जिले के मंगरौनी गांव में हुआ था. उनका विवाह सिर्फ 8 साल की उम्र में कर दिया गया था. महाराजा के 1962 में निधन के बाद महारानी ने 64 सालों तक विधवा की तरह सादगीपूर्व जीवन जिया. बिहार सरकार की ओर से उन्हें राजकीय सम्मान दिया गया और पोते रत्नेश्वर सिंह ने उन्हें मुखाग्नि दी. उनकी मृत्यु का समाचार सुनते ही हजारों की तादाद में लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े. वे महाराज की तीसरी पत्नी थीं. 

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युध्द के वक्त देश को दिया 600 किलो सोना

जानकारी के अनुसार, जब भारत-चीन युध्द हुआ तो सरकार ने दरभंगा राजपरिवार से मदद के लिए कहा. तब दरभंगा के इंद्रभवन मैदान में 15 मन मतलब 600 किलो सोना तौलकर सहायता के लिए देश को दान कर दिया था. इसके अलावा तीन एयरक्राफ्ट भी लड़ाई के दौरान दान कर दी थी. उन्होंने अपनी 90 एकड़ जमीन एयरपोर्ट के लिए दान दी थी, जो कि आज भी इसी भूमि पर दरभंगा एयरपोर्ट बना है. उनके इस कार्य ने सरकार की काफी मदद की और यह इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया.

कई विश्वविद्यालयों के लिए किया दान

महाराजा ने शिक्षा के लिए अपने राज दरबार के गेट खोल दिए. उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में काफी योगदान दिया. बता दें कि दरभंगा परिसर में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय बना हुआ है. इसके अलावा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, कलकत्ता यूनिवर्सिटी और पटना यूनिवर्सिटी को उन्होंने बहुत मात्रा में अनुदान दिया. दरभंगा में बना फेमस दरभंगा मेडिकल कॉलेज इसी राजपरिवार की देन है.

औद्योगिक विकास में किया योगदान

राज परिवार ने रोजगार के लिए औद्योगिक विकास क्षेत्रों में भी खूब योगदान दिया. सकरी, रैयाम और हसनपुर चीनी मिलें, पंडौल में सूत मिल, हायाघाट में अशोक पेपर मिल जैसी कई मिलों को स्थापित करवाने में भी काफी मदद की. देश में विमान सेवा की शुरुआत को दरभंगा राज से ही माना जाता है. वहीं, लंदन से लेकर भारत तक के कई बड़े शहरों में उनके परिवार का दरभंगा हाउस नाम से आवास हैं. यहां तक कि बनारस का दरभंगा घाट भी इसी राजवंश के नाम पर है. 

कितनी संपत्ति है राज परिवार के पास?

वर्तमान समय की बात की जाए तो इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है कि दरभंगा राज के पास कितनी संपत्ति है. आखिरी वक्त में राजा कामेश्वर सिंह के देहांत के समय संपत्ति करीब 2000 करोड़ रुपए आंकी गई थी. अगर इसे वर्तमान के मार्केट मूल्य से तुलना हो तो यह 4 लाख करोड़ रुपए रही होगी. इनमें 14 बड़ी कंपनियां, दुनियाभर में फैले बंगले, जेबरात, जमीन, शेयर मार्केट का निवेश शामिल था.

महाराजा ने तीन शादियां की थीं, लेकिन उनके कोई संतान नहीं हुई. हालांकि, इसके बारे में दरभंगा महाराज के उत्तराधिकारी कपिलेश्वर के बयान के मुताबिक, एक पूरी नदी थी, जो छोटा सा गड्ढा बचा है, जिसे लूटने की कोशिश हो रही है. महारानी के जाने के बाद उनके उत्तराधिकार को लेकर बहस चल रही है. राजघराने में उत्तराधिकारी कपिलेश्वर को बनाया गया था. वे ही ट्रस्ट को संभाल रहे थे. अब देखना होगा कि आगे क्या नया मोड़ आता है.  

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