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रसोइए के बेटे और धोबी के बच्चे ने पार की IMA की दहलीज, अब कहलाएंगे भारतीय सेना के ‘Officer’

भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) की इस साल की Passing Out Parade ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सफलता किसी की विरासत नहीं होती. जहां एक रसोइए के बेटे और एक धोबी के बच्चे ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर अधिकारी पद (Officer's Rank) हासिल किया है.

When Hard Work Replaced Privilege: भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), उत्तराखंड के देहरादून में हाल ही में आयोजित पासिंग आउट परेड (POP) ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि भारतीय सेना में ‘योग्यता’ (Merit) ही सर्वोपरि है. तो वहीं, इस साल की सबसे प्रेरित कहानियों में एक रसोइए (Cook) के बेटे और एक धोबी (Washerman) के बच्चे का सेना में अधिकारी बनने के बाद पूरे देश को हैरान कर दिया है.  यह खबर दर्शाती है कि कैसे कड़ी मेहनत आपकी पूरी जिंदगी को बदल सकता है. 

रसोइए के बेटे का संघर्ष और सफलता

भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त रसोइए के बेटे ने जब कंधे पर सितारे लगाए, तो पूरे अकादमी की आँखें नम हो गईं. जहां, उनके पिता ने कई सालों तक मेस में खाना बनाकर अधिकारियों की सेवा की थी, और आज उनका अपना बेटा उसी अकादमी से एक लेफ्टिनेंट बनकर निकला है. उनके बेटे ने अपने पिता के संघर्ष के दिनों को बेहद ही करीब से देखा था और आज उनकी कई सालों की कड़े मेनहनत रंग लेकर आई है. 

सीमित संसाधनों के बावजूद भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी, NDA (National Defence Academy) और फिर IMA की कठिन ट्रेनिंग को पार कर पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है. इसके साथ ही  उनके पिता के लिए यह गर्व का क्षण था जब उन्होंने अपने बेटे को उसी वर्दी में देखा जिसे वह जीवनभर सम्मान देते रहे हैं. 

धोबी के बच्चे ने पूरी की अपने सपनों की उड़ान

इसी तरह, एक धोबी के बेटे ने अपनी नियति को बदलते हुए सेना में कमीशन प्राप्त करने में बड़ी सफलता हासिल की है. इसके साथ ही उनके परिवार का गुजारा दूसरों के कपड़े धोकर और प्रेस करके होता था. तो वहीं दसूरी तरफ आर्थिक तंगी इतनी थी कि कभी-कभी फॉर्म भरने तक के पैसे जुटाना बेहद ही मुश्किल हो पाता था. उन्होंने अपनी पढ़ाई और फिजिकल ट्रेनिंग पर ध्यान केंद्रित कर हर किसी को यह साबित कर दिया कि वर्दी किसी भी विरासत नहीं बल्कि उनकी मेहनत को पूरे देश के सामने उजागर करती है. उनकी सफलता उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो यह सोचते हैं कि सेना में उच्च पदों पर केवल बड़े घरानों के बच्चे ही पहुंच सकते हैं. 

लाखों बच्चों को इन से प्रेरणा लेने की है सबसे ज्यादा जरूरत

IMA की यह पासिंग आउट परेड केवल एक सैन्य समारोह नहीं था, बल्कि उन पिताओं के संघर्षों का सम्मान था जिन्होंने अपने बच्चों को बड़े सपने देखने की हिम्मत दी. जब एक पिता अपने बेटे को पहली बार ‘सैल्यूट’ (Salute) करता है, तो वह पल गरीबी पर जीत का प्रतीक बन जाता है. फिलहाल,  इन युवाओं ने साबित कर दिया कि सेना में ‘विशेषाधिकार’ (Privilege) नहीं, बल्कि ‘जोश और जज्बा’ सबसे ज्यादा मायने रखता है. 

Darshna Deep

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