EPF New Rule: सरकार ने भविष्य निधि की अधिकतम सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दी है. इस महत्वपूर्ण कदम का उद्देश्य कई कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज का विस्तार करना है. प्रशासन इस पहल के लिए प्रतिवर्ष लगभग 11,339 करोड़ रुपये आवंटित करेगा.
अश्विनी वैष्णव
PF Salary Limit Hike: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि सरकार ने भविष्य निधि कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है. इस कदम के तहत सरकार कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज को व्यापक बनाने के उद्देश्य से हर साल लगभग 11,339 करोड़ रुपये खर्च करेगी.
वैष्णव ने कहा कि व्यापक कवरेज से कर्मचारियों को अधिक स्थिरता मिलेगी और नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों को बनाए रखने में मदद मिलेगी. इस निर्णय से भविष्य निधि कवरेज के लिए उपयोग की जाने वाली वेतन सीमा में प्रति माह 10,000 रुपये की वृद्धि हुई है, जिससे इस लाभ के लिए पात्र कर्मचारियों का दायरा बढ़ गया है.
इस बदलाव से 15,000 रुपये से 25,000 रुपये प्रति माह कमाने वाले कर्मचारी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा ढांचे के दायरे में आ जाएंगे. व्यावहारिक रूप से, अब पहले की तुलना में अधिक श्रमिक औपचारिक सेवानिवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के अंतर्गत आ सकेंगे, क्योंकि पहले वेतन सीमा से अधिक होने के कारण उन्हें अनिवार्य ईपीएफ कवरेज से बाहर रहना पड़ता था.
पात्र कर्मचारियों के लिए, विस्तारित कवरेज का अर्थ है लागू योजना प्रावधानों के अधीन भविष्य निधि बचत, पेंशन सुरक्षा और बीमा कवर तक पहुंच. इस पहल से 51 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ मिलेगा सरकार को उम्मीद है. यह प्रस्ताव श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा पेश किया गया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया.
विस्तारित ढांचा लागू प्रावधानों के अधीन, कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत पेंशन लाभ और कर्मचारी जमा से जुड़ी बीमा योजना (ईडीएलआई) के तहत बीमा सुरक्षा तक पहुंच प्रदान करेगा.
ईपीएफओ की वेतन सीमा में आखिरी बार सितंबर 2014 में संशोधन किया गया था, जब इसे बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया था. इससे पहले, 2004 से 2014 के बीच यह सीमा अपरिवर्तित रही थी. सरकार ने कहा कि नवीनतम संशोधन में इस बीच की अवधि में लगातार वेतन वृद्धि, बढ़ती आय और औपचारिक रोजगार के विस्तार को ध्यान में रखा गया है.
इस वृद्धि के बाद वार्षिक सरकारी व्यय लगभग 11,339 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जबकि मौजूदा वार्षिक बजटीय सहायता लगभग 10,250 करोड़ रुपये है.
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