<

FAQ Explainer: आईवीएफ से जन्मे बच्चों का पालन-पोषण कठिन होता है? क्या भविष्य में बीमारियों का रहता जोखिम, डॉक्टर जानिए सबकुछ

In Vitro Fertilization (IVF): आजकल लोगों की सोच के साथ उनकी दिनचर्या में भी तेजी से बदल हो रहा है. इसी का नतीजा है कि आज 20-30 की उम्र में भी लोगों को इनफर्टिलिटी का सामना करना पड़ रहा है. इस स्थिति को देखते हुए विज्ञान ने आईवीएफ (In Vitro Fertilization) तकनीक निकाली. हालांकि, आईवीएफ को लेकर लोगों में कई सवाल होते हैं. इससे जुड़े कई सवालों पर बात कर रही हैं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक-

In Vitro Fertilization (IVF): महिला और पुरुष दोनों के लिए 20 से 30 साल की उम्र सबसे अच्छी मानी जाती है. यही वो उम्र होती है, जिसमें बीमारियों का जोखिम बेहद कम होता है. यानी शरीर काफी हेल्दी होता है. फर्टिलिटी के लिहाज से भी यह उम्र सबसे अच्छी मानी जाती है. किसी भी दंपति को इस उम्र में बच्चे पैदा करने में कोई परेशानी नहीं होती है. लेकिन, समय के साथ लोगों की सोच में भी तेजी से बदल आ रहा है. लोगों की दिनचर्या और खानपान बदल गया है. इसी का नतीजा है कि आज 20-30 की उम्र में भी लोगों को इनफर्टिलिटी का सामना करना पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स की मानें तो पहले यह समस्या 35 से 40 की उम्र के बाद देखी जाती थी, लेकिन अब यह युवाओं में भी कॉमन हो गई है. इस स्थिति को देखते हुए विज्ञान ने आईवीएफ (In Vitro Fertilization) तकनीक निकाली. दुनिया भर में यह तकनीक काफी कारगर साबित हो रही है. आज बड़ी संख्या में बच्चे पैदा करने के लिए दंपति इस तकनीक को अपना रहे हैं. अब सवाल है कि, आखिर आईवीएफ तकनीक क्या है? क्या आईवीएफ से जन्मे बच्चों का पालन-पोषण कठिन होता है? क्या इन बच्चों को भविष्य कोई परेशानी होती है? इस बारे में India News को बता रही हैं नोएडा की सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मीरा पाठक-

आईवीएफ तकनीक क्या है?

एक्सपर्ट के मुताबिक, आईवीएफ (In Vitro Fertilization) या 'टेस्ट ट्यूब बेबी' एक सहायक प्रजनन तकनीक है. इस तकनीक के जरिये महिला के अंडाशय से अंडे निकालकर उन्हें लैब में पुरुष के शुक्राणु के साथ निषेचित किया जाता है. हालांकि, यह प्रक्रिया का सहारा वे दंपति लेते हैं, नेचुरली गर्भधारण करने में असमर्थ हैं. यह प्रक्रिया में 2-6 दिनों तक भ्रूण विकसित करने के बाद, उसे महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है. अच्छी बात यह है कि, आईवीएफ से बच्चा होने के बाद स्वाभाविक रूप से गर्भवती होने की संभावना काफी अधिक हो जाती है. यानी लगभग 5 में से 1, जिसके बारे में दंपतियों को पता होना चाहिए.

क्या आईवीएफ से जन्मे बच्चों का पालन-पोषण कठिन होता है?

डॉ. पाठक कहती हैं कि, कई लोगों को लगता है कि आईवीएफ से जन्मे बच्चों का पालन-पोषण कठिन होता है. लेकिन, ऐसा बिलकुल भी नहीं है. क्योंकि, आईवीएफ (IVF) से जन्मे बच्चों का पालन-पोषण करना नेचुरली जन्मे बच्चों की तरह ही सामान्य होता है. इन बच्चों कोई जन्मजात बीमारियों का जोखिम भी नहीं होता है. ये बच्चे भी सामान्य रूप से जन्मे बच्चों जितने ही स्वस्थ भी होते हैं. हालांकि, लंबे और कठिन आईवीएफ उपचार के बाद, माता-पिता को अत्यधिक भावनात्मक और शारीरिक थकान हो सकती है, जिससे शुरुआती देखभाल काफी चुनौतीपूर्ण हो सकती है. 

आईवीएफ में किन कठिनाइयों का करना पड़ता सामना

डॉक्टर की मानें तो, आईवीएफ तकनीक से जन्मे बच्चे शारीरिक या मानसिक रूप से अलग नहीं होते और न ही उनमें जन्मजात बीमारियां ज्यादा होती हैं. हालांकि, आईवीएफ की महंगी और दर्दनाक प्रक्रिया के बाद माता-पिता शारीरिक और मानसिक रूप से थकान जरूर महसूस कर सकते हैं. इस तरह का तनाव शुरुआत में हो सकता है, लेकिन समय के साथ सब ठीक हो जाता है. इसलिए मानसिक और शारीरिक थकान पर ध्यान देने की जरूरत होती है.

युवाओं में क्यों घट रही फर्टिलिटी

एक्सपर्ट कहते हैं कि, युवाओं में फर्टिलिटी घटने की सबसे बड़ी वजह लाइफस्टाइल में बदलाव है. देर रात तक जागना, नींद पूरी न होना, जंक फूड का ज्यादा सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ देती है. पुरुषों में इससे स्पर्म काउंट और क्वालिटी प्रभावित होती है, जबकि महिलाओं में ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है. लंबे समय तक ऐसा रुटीन फर्टिलिटी कमजोर कर सकता है. युवाओं को अपनी फर्टिलिटी को बेहतर बनाए रखने के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करना पड़ेगा.

लंबा होता है आईवीएफ प्रोसेस

गायनेकोलॉजिस्ट बताती हैं कि आईवीएफ एक महीने का नहीं, बल्कि समय लेने वाला प्रोसेस है. आमतौर पर इसमें 2 से 3 महीने तक का वक्त लग सकता है. आईवीएफ की शुरुआत डॉक्टर से कंसल्टेशन से होती है. इसके बाद कपल्स के कुछ जरूरी टेस्ट कराए जाते हैं. इन टेस्ट रिपोर्ट्स के आधार पर डॉक्टर महिला को कुछ सप्लीमेंट्स और दवाएं लेने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर को आगे के ट्रीटमेंट के लिए तैयार किया जा सके. इसके बाद आगे की प्रक्रिया होती है.

Lalit Kumar

Recent Posts

Dhurandhar 2 Controversy: शूटिंग के बहाने वर्करों की जान से खिलवाड़! ‘धुरंधर 2’ के मेकर्स पर भड़का AICWA, ब्लैकलिस्ट करने उठी मांग!

धुरंधर 2 के सेट पर नियमों की उड़ी धज्जियां! AICWA ने आदित्य धर और उनके…

Last Updated: February 17, 2026 21:20:05 IST

जब 15 हजार फैंस को ‘चूना’ लगा गए थे गोविंदा! आयोजकों ने ‘नकली’ हीरो से बचाई थी अपनी जान

म्यूजिक कंपोजर अबू मलिक ने खुलासा किया कि एक बार गोविंदा अपने ही जीजा के…

Last Updated: February 17, 2026 21:05:53 IST

एक दो बार नहीं….आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप से बाहर हुई ऑस्ट्रेलिया की टीम, जानें- अब तक कैसा रहा प्रदर्शन?

Australia in T20 World Cup 2026: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ग्रुप स्टेज से…

Last Updated: February 17, 2026 20:56:23 IST

बाइक रिपेयरिंग के लिए गई लेकिन…ओला के सीईओ भाविश अग्रवाल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, जानें क्या है पूरा मामला?

Bhavish Aggarwal Arrest Warrant: देश की जानी-मानी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाइक बनाने वाली कंपनी ओला इलेक्ट्रिक…

Last Updated: February 17, 2026 20:17:46 IST

मौत का फोटोशूट! बेंगलुरु में 3 साल के बच्चे की डूबने से मौत, क्या लापरवाही ने ली मासूम की जान?

बेंगलुरु में मैटरनिटी फोटोशूट के दौरान एक 3 साल के बच्चे की पानी में डूबने…

Last Updated: February 17, 2026 20:15:08 IST

Zihaale-E-Miskin: क्या आप ‘ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन…’ का मतलब जानते हैं? अर्थ समझते ही गीत का मजा हो जाएगा दोगुना!

Zihaale-E-Miskin Song: 1985 में आई मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म ‘गुलामी’ का एक गाना 'ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन…

Last Updated: February 17, 2026 19:58:40 IST