<
Categories: देश

शाही सुगंध से लेकर कैसे बना 1,785 करोड़ के साम्राज्य तक का सफर, यहां जानें मैसूर सैंडल सोप की अनोखी कहानी

मैसूर सैंडल सोप (Mysore Sandal Soap) की यात्रा एक संकट को अवसर में बदलने की कहानी पर आधारित है. जहां, महाराजा (Maharaja) के विजन और शुद्ध चंदन (Pure Chandan) के तेल के इस्तेमाल ने एक वैश्विक पहचान दिलाई है.

Mysore Sandal Soap: ऐसा कहा जाता है कि मैसूर सैंडल सोप सिर्फ और सिर्फ एक साबुन नहीं, बल्कि भारतीय विरासत और शुद्धता का प्रतीक माना जाता था. दरअसल, इसकी शुरुआत साल 1916 में मैसूर के महाराजा कृष्णराज वाडियार चतुर्थ और महान दूरदर्शी सर एम. विश्वेश्वरैया के एक साहसिक फैसले के साथ हुई थी. जब, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मैसूर से चंदन की लकड़ी का निर्यात रुक गया, तो महाराजा ने इसे विदेशों में बेचने के बजाय घर में ही मूल्यवान उत्पाद बनाने का महतच्वपूर्ण फैसला लिया था. 

एक शाही प्रयोग की शुरुआत

इसके अलावा महाराजा ने अपनी प्रजा के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन साबुन बनाने का सपना देखा था. जिसके लिए उन्होंने एक युवा वैज्ञानिक, एस.जी. शास्त्री को लंदन भेजा ताकि वे साबुन बनाने की तकनीक को अच्छी तरह से सीख सकें. तो वहीं, दूसरी तरफ शास्त्री जी ने वहां से लौटकर चंदन के शुद्ध तेल (Sandalwood Oil) के साथ एक बेहद ही अनोखा फॉर्मूला तैयार करने की शुरुआत की. देखते-देखते ही मैसूर सैंडल सोप दुनिया का एकमात्र साबुन बन गया जिसमें 100 प्रतिशत शुद्ध चंदन का तेल इस्तेमाल किया जाता था. 

ब्रांड की पहचान और विशिष्टता

तो वहीं, दूसरी तरफ इस साबुन की पहचान इसका अंडाकार (Oval) आकार और इसकी विशेष पैकिंग ही इससे सबसे ज्यादा अलग बनाने का काम करती है.  इसके लोगो पर ‘शरभा’ (एक पौराणिक जीव जो शेर और हाथी का मिश्रण है) देखने को मिलता है, जो शक्ति और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. इसके अलावा, दशकों तक, इस ब्रांड ने अपनी गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का कोई भी समझौता नहीं किया है. 

1,785 करोड़ का टर्नओवर: आधुनिक सफलता

हालांकि, आज यह ब्रांड कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (KSDL) के अंतर्गत आता है. जहां, वित्तीय साल 2023-24 तक, इस कंपनी ने 1 हजार 785 करोड़ रुपये से सबसे ज्यादा का कारोबार कर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर पूरीदुनिया को हैरान कर दिया था और इसकी सफलता के पीछे तीन मुख्य वजह बताए जाते हैं. पहला, शुद्धता का भरोसा, जहां, उपभोक्ताओं को पता है कि यह असली चंदन से बनाया जाता है. दूसरा, इसे मिलने वाले GI टैग ने इसकी नकल को रोका और वैश्विक पहचान दिलाने में एक बड़ी सफलता हासिल की थी. 

अब यह ब्रांड केवल साबुन तक सीमित नहीं है, बल्कि अगरबत्ती, बॉडी वॉश और टैलकम पाउडर के साथ युवाओं को भी अपनी तरह तेजी से आकर्षित कर रहा है. जहां,लोग इसकी जमकर खरीददारी कर रहे हैं. 

Darshna Deep

Recent Posts

Vivo T5 Lite 44W 5G vs Oppo Find X10: कौन से फोन में मिलेंगे स्मार्ट और एडवांस फीचर्स? किसमें मिलेगा अच्छा कैमरा

दोनों ही स्मार्टफोन्स फीचर्स में किफायती होने के साथ ही सात परफॉर्मेंस के मामले में…

Last Updated: May 30, 2026 21:47:34 IST

Yamaha FZX vs Jawa 42: पावर से लेकर परफॉर्मेंस तक कौन किससे बेहतर? किसमें मिलेंगे लेटेस्ट फीचर्स

दोनों बाइकें अपने सेगमेंट की बेस्ट मानी जाती हैं साथ ही साथ दोनों बाइकों में…

Last Updated: May 30, 2026 22:19:51 IST

इश्क, रफ्तार और मौत! दरोगा की क्रेटा ने पलभर में कुचल दी 3 जिंदगियां, लखनऊ हादसे पर मचा बवाल

Lucknow Road Accident: लखनऊ में लापरवाही और तेज रफ़्तार से गाड़ी चलाने से जुड़ा एक…

Last Updated: May 30, 2026 19:24:50 IST

यूनिफार्म सिविल कोड सभी भाजपा और एनडीए शासित राज्यों में होगा लागू ! केन्द्र सरकार की नई पहल

UCC NEWS: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 10 जून को दिल्ली में भाजपा और एनडीए शासित…

Last Updated: May 30, 2026 18:57:46 IST

UP पुलिस का साहसिक कार्य, 1 लाख के इनामी बदमाश एहसान को किया ढ़ेर

Saharanpur News: यूपी के सहारनपुर में दिनदहाड़े पुलिस की बदमाशों के साथ आमने-सामने की मुठभेड़…

Last Updated: May 30, 2026 18:53:40 IST

केन्द्र सरकार की नई पहल, अब हवाई जहाज से पहुंचेगा NEET परीक्षा का पेपर

NEET UG 2026: NEET UG री- एग्जाम की गोपनियता को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के…

Last Updated: May 30, 2026 18:51:54 IST