JNU Student Protest Case: दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट ने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के सभी प्रदर्शनकारी छात्रों को जमानत दे दी है.
JNU स्टूडेंट प्रोटेस्ट केस
JNU Student Protest Case: पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) स्टूडेंट प्रोटेस्ट केस में सभी आरोपी स्टूडेंट्स को जमानत दे दी. गुरुवार को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट प्रोटेस्टर्स को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था. स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर शांतिश्री धुलिपुडी पंडित के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे थे. जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) की लीडरशिप में प्रोटेस्टर्स की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनकी ज्यूडिशियल कस्टडी मांगी थी लेकिन कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी. इस केस में करीब 51 स्टूडेंट्स को गिरफ्तार किया गया था.
पटियाला हाउस कोर्ट ने हर आरोपी को 25,000 रुपये का बेल बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया. कोर्ट ने बेल बॉन्ड के वेरिफिकेशन का भी आदेश दिया. पुलिस के यूनिवर्सिटी गेट बंद करने और प्रोटेस्टर्स को बैरिकेड्स पार करने से रोकने के बाद दोनों पक्षों के बीच हाथापाई हो गई जिसके कारण 14 स्टूडेंट्स को हिरासत में लिया गया. दिल्ली पुलिस ने JNU स्टूडेंट प्रोटेस्टर्स पर सिक्योरिटी वालों पर हमला करने का आरोप लगाया था.
गुरुवार को एक प्रोटेस्ट मार्च पुलिस के साथ झड़प में बदल गया जिसके बाद JNUSU के चार अधिकारियों समेत कुल 51 प्रोटेस्टर को हिरासत में लिया गया. गुरुवार देर रात वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन की पुलिस ने प्रोटेस्टर के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (IPC) की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया.इनमें धाराएं 221 (जानबूझकर किसी सरकारी कर्मचारी को उसकी ड्यूटी करने से रोकना), 121(1) (जानबूझकर किसी सरकारी कर्मचारी को उसकी ड्यूटी करने से रोकने के लिए चोट पहुंचाना), 132 (किसी सरकारी कर्मचारी को उसकी ऑफिशियल ड्यूटी करने से रोकने के लिए हमला या क्रिमिनल फोर्स का इस्तेमाल करना), और 3(5) (कॉमन इंटेंशन) शामिल हैं.
पुलिस के मुताबिक करीब 300 प्रोटेस्टर्स ने बिना परमिशन के लॉन्ग मार्च निकालने की कोशिश की. जब पुलिसवालों ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की तो प्रोटेस्टर्स ने कथित तौर पर हाथापाई की और अधिकारियों पर हमला किया. पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं था और झड़प के दौरान कई पुलिसवालों को चोटें आईं. जांच एजेंसी ने कोर्ट को यह भी बताया कि कई आरोपी पहले भी ऐसे प्रोटेस्ट में शामिल रहे हैं जहां कथित तौर पर बल का इस्तेमाल किया गया था और इसी तरह की घटनाओं के संबंध में पहले भी चार अलग-अलग FIR दर्ज की गई थीं.
ज्यूडिशियल कस्टडी की अर्जी का विरोध करते हुए आरोपियों के वकील ने कहा कि छात्र जांच में सहयोग करने को तैयार हैं और इस बारे में कोर्ट के सामने एक लिखित अंडरटेकिंग देने को तैयार हैं. दोनों पक्षों को सुनने के बाद, कोर्ट ने सभी 14 आरोपियों को 25,000 रुपये के बेल बॉन्ड भरने पर बेल दे दी. यह टकराव गुरुवार को तब हुआ जब छात्रों ने JNU कैंपस के बाहर मार्च करने की कोशिश की जबकि यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा था कि यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर प्रोटेस्ट की परमिशन नहीं दी गई है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने हिंसा की, जिसमें अधिकारियों पर मारपीट भी शामिल है, जबकि छात्रों और JNU टीचर्स एसोसिएशन ने “ज़्यादा बल प्रयोग और लोकतांत्रिक अधिकारों के उल्लंघन” की निंदा की है.
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