Mumbai Society: मुंबई की इस सोसाइटी में रहने वाले लोग महीने का मेंटेनेंस नहीं देते और वे ऐशो-आराम की जिंदगी जीकर भी सालाना लाखों कमाते हैं.
मुंबई की यह सोसायटी अपने निवासियों को वहां रहने के लिए लाखों में क्यों देती है?
Mumbai Society: मेट्रोपॉलिटन शहरों में ऊंची-ऊंची सोसाइटी में फ्लैट बने होते हैं. मॉडर्न सुविधाओं से लेकर लग्जरी डिजाइन तक बिल्डर नया प्रोजेक्ट शुरू होने पर बहुत सारे वादे करते हैं. लोगों को पजेशन मिलने के बाद ही उन्हें असलियत का पता चलता है और इसके साथ ही उन्हें हर महीने मेंटेनेंस चेक देना होता है. हाउसिंग डॉट कॉम के मुताबिक आप जिस सोसाइटी में रहते हैं उसके आधार पर भारत में बिल्डर 2 रुपये से 25 रुपये प्रति स्क्वायर फुट तक मेंटेनेंस फीस ले सकते हैं. ज्यादा फीस का मतलब है बेहतर सुविधाएं और बिल्डिंग में प्रति स्क्वायर फुट खरीदने के लिए भारी कीमत.
लेकिन मुंबई की एक सोसाइटी ऐसी भी है, जहां रहने वाले लोग मेंटेनेंस देने के बजाय हर साल पैसे कमाते हैं. रियल एस्टेट ब्लॉगर विशाल भार्गव के मुताबिक, कफ परेड स्थित जॉली मेकर 1 सोसाइटी अपने रहवासियों को हर साल लगभग 2.5 लाख रुपये का डिविडेंड देती है.
2003 की टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार जॉली मेकर अपार्टमेंट 1 में दो 25 मंजिला इमारतें हैं. जिनमें 180 फ्लैट और 10 बंगले हैं. यह मुंबई की सबसे आलीशान सोसाइटियों में से एक मानी जाती है. इसके पास करीब 25–30 करोड़ रुपये का रिजर्व और सिंकिंग फंड है.
इस सोसाइटी के A और B टावर में रहने वाले लोगों के पास 1,285 से 2,590 स्क्वायर फुट के अपार्टमेंट हैं जिनमें से कई समुद्र के सामने हैं. लेकिन क्या आप यहां रहने के फ़ायदे जानते हैं?यहां ए और बी टावर में रहने वाले लोगों के फ्लैट 1,285 से 2,590 वर्गफुट के हैं, जिनमें से कई समुद्र के सामने हैं. खास बात यह है कि यहां रहने वाले लोगों को कोई मासिक मेंटेनेंस या नगर निगम का टैक्स नहीं देना पड़ता. सोसाइटी ही सभी बिल भरती है.
यहां रहने वाले लोग हर महीने सिर्फ एक पैसा प्रति वर्ग फुट देते हैं जो कफ परेड की दूसरी सोसाइटी में रहने वाले लोग पहले 3 से 4 रुपये प्रति वर्ग फुट देते थे. नो ब्रोकर के मुताबिक कुछ सोसाइटी में अब कीमत 8 रुपये या उससे ज्यादा है.
इस सोसाइटी के लोगों को हर साल डिविडेंड मिलता है. दरअसल, जब लोगों ने यहां फ्लैट खरीदा था, तब उन्हें नरीमन पॉइंट की एक कमर्शियल बिल्डिंग में हिस्सेदारी भी दी गई थी. आज उस बिल्डिंग से हर महीने करीब 50 लाख रुपये किराया मिलता है.नरीमन पॉइंट की इस कमाई से जॉली मेकर 1 का पूरा मेंटेनेंस चलता है और उसी से रहवासियों को डिविडेंड भी दिया जाता है.2003 में डिविडेंड की दर 100 रुपये प्रति वर्गफुट थी. यानी 2,500 वर्गफुट के फ्लैट वाले व्यक्ति को साल में करीब 2.5 लाख रुपये मिलते थे. 2012 में यह दर बढ़कर 300 रुपये प्रति वर्गफुट हो गई. यानी उसी फ्लैट से सालाना 7.5 लाख रुपये मिलने लगे. हालांकि पिछले 13–14 साल में यह दर बढ़ी या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है.
2012 में यहां का एक फ्लैट 1.11 लाख रुपये प्रति वर्गफुट के हिसाब से 29 करोड़ रुपये में बिका था. आज भी रियल एस्टेट वेबसाइट्स के अनुसार, यहां फ्लैट की कीमत 75,000 रुपये प्रति वर्गफुट से ज्यादा है.
जॉली मेकर टावर में घर होना सिर्फ एक लग्जरी नहीं बल्कि एक स्मार्ट इन्वेस्टमेंट है. यहां फ्लैट मालिकों को खर्च या मेंटेनेंस की कोई चिंता नहीं है. इसके अलावा लाखों रुपये की सालाना कमाई इस सोसाइटी को मुंबई की सबसे अनोखी और सबसे ज़्यादा पसंद की जाने वाली हाउसिंग सोसाइटी में से एक बनाती है.
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