<
Categories: देश

चिश्ती की दरगाह से जुड़ी याचिका खारिज, जानें कितनी पुरानी है अजमेर शरीफ दरगाह में चादर चढा़ने की परम्परा?

Ajmer Sharif: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फैसले में अजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) को सिरे से खारिज कर दिया है.

Ajmer Sharif: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार कोअजमेर स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से जुड़ी एक जनहित याचिका (PIL) को सिरे से खारिज कर दिया है. बता दें कि ये याचिका विश्व वैदिक सनातन संघ की ओर से दायर की गई थी. याचिका में प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से हर साल दरगाह पर चढ़ाई जाने वाली चादर की परंपरा पर तुरंत रोक लाने की मांग की गई थी. जस्टिस सूर्य कांत की अध्याक्षता वाली पीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए इसे विचार योग्य नहीं माना और याचिकाकर्ता को खाली हाथ वापस भेज दिया गया.

बता दें कि अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के सालाना उर्स पर प्रधानमंत्री की तरफ से चादर चढाने के लिए भेजा जाता है. ये चादर खासतौर से पीएमो की तरफ से आती है.

अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के सालाना उर्स पर पीएमओ लगातार चादर चढाने के लिए भेजता है. ये चादर खासतौर पर वहां से आती है और दरगाह पर चढ़ाई जाती है. कई दशकों से अगाध ऐसा हो रहा है. नेहरू से लेकर मोदी तक सभी प्रधानमंत्री ऐसा करते रहे हैं. राजस्थान के राज्यपाल और मुख्यमंत्री की ओर से ये होता है. यही नहीं हर यहां पाकिस्तान और बांग्लादेश सरकार भी उर्स के दौरान चादर चढ़ाती हैं. 

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी की अजमेर दरगाह पर पीएम की ओर से चादर चढ़ाने की परंपरा सालों से चली आ रही है और उसे रोका जाना चाहिए. उन्होने ये तर्क दिया था कि सरकार या देश के पीएम की ओर से ऐसे किसी भी स्पेशल धार्मिक स्थल पर इस तरह के ट्रेडिशन का पालन नहीं होना चाहिए.

दिया था ये तर्क

याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि अजमेर दरगाह पर प्रधानमंत्री की ओर से चादर चढ़ाने की जो परंपरा वर्षों से चली आ रही है, उसे रोका जाना चाहिए. उनका तर्क था कि सरकारी तंत्र या देश के प्रधानमंत्री की ओर से किसी विशिष्ट धार्मिक स्थल पर इस तरह की परंपरा  का पालन नहीं किया जाना चाहिए.

याचिका कर्ता की ओर से पेश किए गए वकील वरुण सिन्हा ने कहा कि यह धार्मिक स्थल नहीं बल्कि चिश्तिया संप्रदाय का इलाका है. 

कब हुआ था परंपरा का आगाज?

पीएमओ की ओर से अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सालाना उर्स के मौके पर चादर चढ़ाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. ये परंपरा आजादी के बाद से शुरू हुई थी. तब पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने अजमेर शरीफ पर चादर भेजा था. नेहरू के बाद इस परंपरा को इंदिरा गांधी, राजीव गांधी सहित सभी प्रधानमंत्रियों ने इसे जारी रखा. 

पीएम मोदी भी 2014 से लागातर हर साल इस परंपरा की पालन करते हैं और चादर भेजते हैं. आमतौर पर इसे अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री या प्रतिनिधि के माध्यम से पेश की जाती है. 

Ajmer Sharif

कितनी पुरानी है अजमेर शरीफ दरगाह ?

वहीं अगर अजमेर शरीफ की बात करें तो ये दरगाह करीब 800 साल पुरानी है. यह सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (जन्म 1141-1143 ई., मृत्यु 15 मार्च 1236 ई.)की मजार है. ख्वाजा साहब 1192 में अजमेर आएं जिसके बाद वह यहीं के हो गए.

ख्वाजा साहब के मौत के बाद उनकी कब्र पर एक साधारण सा मकबरा बनाया गया. जिसे बाद में दिल्ली  दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इल्तुतमिश ने खास तरीके से बनवाया. मुगल काल में इसका और विस्तार किया गया. ये भारत की सबसे प्रमुख सूफी दरगाहों में से एक है. 

Ajmer Sharif 2

चादर क्यों चढ़ाई जाती है?

चादर चढ़ाना श्रद्धा, आदर और भक्ति का प्रतीक है. यह परंपरा 800 साल से भी ज़्यादा पुरानी है और सूफ़ी परंपराओं से जुड़ी है. शुरू में, चादर मज़ार को ढकने और उसका सम्मान करने के लिए चढ़ाई जाती थी. अब, यह भक्ति का प्रतीक बन गई है. भक्त अपनी मुराद पूरी होने पर प्रार्थना करते हैं और चढ़ावा चढ़ाते हैं.

ख्वाजा साहब की बरसी यानी सालाना उर्स पर हज़ारों चादरें चढ़ाई जाती हैं. बड़ी चादरें 42 गज की होती हैं और मज़ार को पूरी तरह से ढक लेती हैं, जबकि छोटी चादरें दूसरी मज़ारों पर भेजी जाती हैं.

Ajmer Sharif 3

पाकिस्तान और बांग्लादेश की ओर से भी

पाकिस्तानी सरकार और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के मानने वाले रेगुलर चादरें भेजते हैं. अक्सर दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन या पाकिस्तानी डिप्लोमैट चादरें चढ़ाते हैं. पाकिस्तानी भक्त कभी-कभी खुद आकर चादर चढ़ाते हैं. बांग्लादेश सरकार भी अपने रिप्रेजेंटेटिव के जरिए चादरें भेजती है या चढ़ावा चढ़ाती है. यह प्रोसेस दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के ज़रिए होता है. बांग्लादेश में सूफी परंपराएं भी बहुत मज़बूत हैं, और वहां ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को बहुत सम्मान दिया जाता है. इस तरह अजमेर शरीफ न सिर्फ़ भारत के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए एक ज़रूरी आध्यात्मिक सेंटर है.
Ajmer Sharif 1

किस तरह मनाया जाता है सालाना उर्स ?

सुफी परंपरा में उर्स शादी कहलाता है. उर्स की का आगाज  बुलंद दरवाजे पर झंडा फहराकर की जाती है.उर्स के दौरान ये विशेष दरवाजा श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाता है. उर्स के दौरान इससे गुजरना पुण्य माना जाता है. इस दौरान लाखों श्रद्धालु चादर, फूल, इत्र चढ़ाते हैं. इस दौरान सरकारी और विदेशी चादरें भी पेश की जाती हैं.

उर्स के दौरान, कव्वाल पूरी रात सूफी कव्वाली करते हैं. खास नमाज़, ज़िक्र और मुख्य रस्में छठे दिन, "छठी शरीफ़" को होती हैं. यह त्योहार शांति, प्यार और गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक है. यह मुख्य रूप से छह दिनों तक चलता है. उर्स जो इस्लामी कैलेंडर के रजब महीने के पहले छह दिनों में पड़ता है, लाखों भक्तों को आकर्षित करता है. हर साल लगभग 2-5 मिलियन लोग भारत के कोने-कोने से आते हैं. विदेश से भी लोग आते हैं, खासकर पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान, ईरान, इराक, मध्य एशिया, मलेशिया, इंडोनेशिया, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा से. यह दुनिया के सबसे बड़े सूफी समारोहों में से एक है, जो सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता का एक अनोखा उदाहरण पेश करता है.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

Recent Posts

Zihaale-E-Miskin: क्या आप ‘ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन…’ का मतलब जानते हैं? अर्थ समझते ही गीत का मजा हो जाएगा दोगुना!

Zihaale-E-Miskin Song: 1985 में आई मिथुन चक्रवर्ती की फिल्म ‘गुलामी’ का एक गाना 'ज़े-हाल-ए-मिस्कीं मकुन…

Last Updated: February 17, 2026 19:58:40 IST

सहेलियों ने घर बुलाया, भाई ने नशीला पदार्थ पिलाया… बरेली में नाबालिग हुई दरिंदगी का शिकार

बरेली नाबालिग दुष्कर्म केस: वाबगंज थाना इलाके में हाई स्कूल की स्टूडेंट अपनी दो सहेलियों के घर…

Last Updated: February 17, 2026 19:36:26 IST

गाजियाबाद में हिंदू संगठन ने मजार पर चलाया हथौड़ा, मिटा दिया नामोनिशान; वीडियो वायरल होने के बाद जागी पुलिस

UP Ghaziabad Viral Video: गाजियाबाद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल…

Last Updated: February 17, 2026 19:22:02 IST

आदत से मजबूर शोएब मलिक? लाइव शो में लड़की से फ्लर्ट करना पड़ा भारी, मिला ऐसा जवाब कि हो गई बोलती बंद!

पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक एक लाइव शो में महिला से फ्लर्ट करने के चक्कर में…

Last Updated: February 17, 2026 19:21:25 IST

जाने दो, टाइम देखो… गिड़गिड़ाती रही ऑर्केस्ट्रा गर्ल, लेकिन नहीं रुका DJ, वीडियो वायरल

ऑर्केस्ट्रा गर्ल वायरल वीडियो: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो…

Last Updated: February 17, 2026 19:10:35 IST