Kuldeep Singh Sengar: उन्नाव पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए मामला वापस दिल्ली हाईकोर्ट भेज दिया और हाईकोर्ट को एक हफ्ते के भीतर सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया.
कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं
Kuldeep Singh Sengar: उन्नाव पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए मामला वापस दिल्ली हाईकोर्ट भेज दिया और हाईकोर्ट को एक हफ्ते के भीतर सुनवाई शुरू करने का निर्देश दिया. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 10 साल की सजा पर फिलहाल रोक लगाने से भी इनकार कर दिया और सभी संबंधित अपीलों को साथ-साथ सुनने के निर्देश दिए.
कोर्ट ने कहा कि नैतिक अधमता वाले मामलों में रिमिशन का दावा बेहद विवादास्पद होता है. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सजा की अवधि एक कारक हो सकती है, लेकिन वह निर्णायक नहीं है, साथ ही यह भी ध्यान दिलाया कि सेंगर एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा भी काट रहा है. अदालत ने कहा कि पीड़ित और दोषी के अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी है. वहीं, मामले में मीडिया इंटरव्यू देने पर वकील को सीजेआई ने कड़ी फटकार भी लगाई.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ सेंगर की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के 19 जनवरी के आदेश को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. सेंगर की ओर से वकील ने कहा कि वह 10 साल की सजा में से 7 साल 7 महीने काट चुके हैं. वहीं सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि मुख्य अपील 11 फरवरी 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है और इसे जल्दी सुना जा सकता है.
पीड़िता की ओर से वकील ने मांग की कि सेंगर की सजा को धारा 304 से बदलकर धारा 302 के तहत उम्रकैद में बदला जाए. सेंगर की तरफ से दलील दी गई कि तय अवधि की सजा वाले मामलों में अपील लंबित रहने के दौरान सजा पर रोक देना सामान्य बात होती है. इस पर कोर्ट ने कहा कि सेंगर दूसरे मामले में पहले से उम्रकैद की सजा काट रहे हैं, इसलिए यह भी एक महत्वपूर्ण तथ्य है.
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने मामले पर मीडिया में बयान देने को लेकर पीड़िता के वकील को फटकार भी लगाई और कहा कि चल रहे केस पर मीडिया ट्रायल ठीक नहीं है.
इस मामले की पृष्ठभूमि में, अप्रैल 2018 में नाबालिग पीड़िता के पिता को आरोपियों ने पीटा था. अगले ही दिन पुलिस ने उन्हें अवैध हथियार रखने के आरोप में गिरफ्तार किया और बाद में हिरासत में उनकी मौत हो गई. सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2019 में इस मामले से जुड़े पांचों केस उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर कर दिए थे. दिसंबर 2019 में सेंगर को रेप केस में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी गई थी. मार्च 2020 में उन्हें पीड़िता के पिता की मौत की साजिश में भी दोषी पाया गया. जून 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी सजा पर रोक की मांग खारिज कर दी थी और जनवरी 2026 में दूसरी बार भी उनकी याचिका ठुकरा दी गई थी. हालांकि हाल ही में हाईकोर्ट ने रेप केस में उनकी सजा पर रोक लगाई थी, जिसे कुछ दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्थगित कर दिया.
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