हैदराबाद में मद्रास रेजीमेंट से हथियार उड़ाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. बोल्लारम पुलिस ने मद्रास रेजीमेंट से हथियार चोरी के मामले में शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 सेवारत सैन्यकर्मियों समेत 7 और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड पूर्व हवलदार यू. मल्लेश था. मल्लेश ने चुराए गए हथियारों को पश्चिम बंगाल के संपर्कों के जरिए बेचने के साथ-साथ बैंकों में डकैती और नेताओं से रंगदारी वसूलने की पूरी योजना तैयार की थी.
7 लोगों को किया गिरफ्तार
मुख्य आरोपी मल्लेश से 10 दिनों की पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ के बाद पुलिस को इस पूरे नेटवर्क का सुराग मिला. इसके बाद पुलिस ने साजिश में शामिल मद्रास रेजीमेंट के सिपाही के. शेषुलु, शस्त्रागार (कोटे) के प्रभारी नायक विनोद कुमार, 16वीं बटालियन के हवलदार के. प्रवीण, जूस विक्रेता बीरबल शॉ, पश्चिम बंगाल से अवैध हथियार सप्लायर अवि दे, मल्लेश के चचेरे भाई यू. मल्लिकाअर्जुन और किराना दुकान चलाने वाले सीएच निरंजन को गिरफ्तार कर लिया.
मल्काजगिरि की पुलिस कमिश्नर बी. सुमति ने बताया कि मल्लेश को जून में घुटने की बीमारी और अनुशासनात्मक कारणों से 16 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त कर दिया गया था. वह तीन साल और नौकरी करना चाहता था, जिसके चलते उसके मन में वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति नाराजगी थी.
डकैती की मंशा
सेवानिवृत्ति पर मल्लेश को 22 लाख रुपये मिले थे, लेकिन हाल ही में नागरकर्नूल में मकान बनाने, प्लॉट खरीदने और कार लेने के कारण उसके पास पैसों की तंगी थी. मल्लेश का आपराधिक इतिहास रहा है; सेना में शामिल होने से पहले भी वह दो चोरियों में शामिल था. समय से पहले सेवानिवृत्ति के बाद उसने हथियार चुराकर मोटी कमाई करने और ज्वैलरी शॉप व बैंकों में डकैती डालने की योजना बनाई.
ऐसे रची गई पूरी साजिश
पुलिस के अनुसार, मल्लेश ने जुलाई में अपने साथियों शेषुलु, विनोद और प्रवीण के सामने इस योजना का खुलासा किया था. शस्त्रागार प्रभारी विनोद ने उसे वहां के सुरक्षा इंतजामों की जानकारी दी. इसके बाद मल्लेश ने 24 से 29 अगस्त के बीच इलाके की रेकी की और सीसीटीवी कैमरों से बचने वाले रास्तों की पहचान की.
30 अगस्त की रात मल्लेश ने रेजीमेंट परिसर में घुसकर हथियार चुराए और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए साथियों को “काम हो गया” की सूचना दी. चोरी के बाद हथियारों को अपने पिता के घर में छुपा दिया गया. इन हथियारों में असॉल्ट राइफलों को 5 लाख रुपये और पिस्तौल को 2 लाख रुपये में बेचने का सौदा तय हुआ था.
कमिश्नर बी. सुमति ने स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में इस मामले का किसी भी आतंकी संगठन से संबंध सामने नहीं आया है. सभी सातों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद चंचलगुड़ा जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.