Bombay High Court: मालेगांव ब्लास्ट केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवरा को विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया. जिसमें 4 आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मालेगांव ब्लास्ट केस में सभी 4 आरोपियों पर लगे आरोपों को किया रद्द
Malegaon Blast Case: 2006 के मालेगांव धमाकों में 7 लोगों की जान चली गई थी और 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे. इस मामले में लगभग 2 दशकों के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एक विशेष अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें चारों आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस मामले में 4 आरोपी लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर नरवारिया हैं.
चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस श्याम चांदक की बेंच ने आरोपियों द्वारा दायर अपीलों पर यह फैसला सुनाया. ये अपीलें विशेष अदालत के सितंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ थीं, जिसमें आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे. इस फैसले के साथ ही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) द्वारा शुरू किया गया मुकदमा फिलहाल के लिए खत्म हो गया है.
सुनवाई के दौरान, बचाव पक्ष ने दलील दी कि एनआईए के मामले में अहम सबूतों की कमी है. उन्होंने यह भी कहा कि कोई चश्मदीद नहीं है और न ही कोई ऐसी बरामदगी हुई है जो आरोपियों को इस अपराध से जोड़ती हो. उन्होंने मामले में प्रक्रियागत खामियों को भी उजागर किया, जिसमें घटना के छह साल बाद की गई ‘टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड’ (पहचान परेड) भी शामिल है. उन्होंने गवाहों के बयानों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए. इसके बाद एनआईए ने अदालत में इस बात की पुष्टि की कि इस मामले में कोई चश्मदीद गवाह नहीं है.
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश से लिए गए मिट्टी के नमूनों में जहां कथित तौर पर विस्फोटक तैयार किए गए थे, आरडीएक्स के कोई निशान नहीं मिले. इससे आरोपों पर संदेह पैदा होता है.
ये धमाके 8 सितंबर, 2006 को नासिक जिले के मालेगांव में स्थित एक मुस्लिम कब्रिस्तान में हुए थे. इस घटना के बाद महाराष्ट्र एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने 9 मुस्लिम पुरुषों को गिरफ्तार किया था. साल 2012 में एक विशेष MCOCA अदालत ने गिरफ्तार आरोपियों को जमानत दे दी थी. बाद में 2007 में यह मामला सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दिया गया. उस समय सीबीआई ने राज्य की एजेंसी द्वारा की गई जांच के निष्कर्षों का ही समर्थन किया था.
कई साल बाद एनआईए ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली और चार अलग-अलग आरोपियों को गिरफ्तार किया. एनआईए ने आरोप लगाया कि इस मामले में एक अलग ही साजिश रची गई थी. बाद में इन चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई और फिर बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी.
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