'मैडम कोई नौकरी हो तो बताना...' मैथ्स में मास्टर और B.Ed होकर भी युवक रैपिडो चलाने को है मजबूर? एक्स पर की गई इस एक पोस्ट ने सिस्टम की पोल खोल दी है. पूरी कहानी पढ़ें...
मैथ्स में मास्टर और B.Ed होकर भी युवक रैपिडो चलाने को मजबूर
क्या सिर्फ डिग्रियाँ आपकी जिंदगी संवार सकती हैं? हाल ही में सोशल मीडिया पर एक रैपिडो राइडर की कहानी ने शिक्षा और सफलता के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. मैथ्स में मास्टर और B.Ed होने के बावजूद वह सड़कों पर बाइक चलाने को मजबूर है. आखिर क्या है यह डिग्री की हकीकत, आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला 19 फरवरी को, साक्षी नाम की एक यूज़र ने X पर एक दिल को छू लेने वाली पोस्ट शेयर की. यह फ़ोटो रात (या शाम) में बाइक की पिछली सीट से ली गई थी. साक्षी ने कैप्शन में बताया कि काम से लौटते समय उसने एक रैपिडो बुक की थी. रास्ते में, राइडर ने अचानक उससे पूछा कि वह क्या कर रही है. जब साक्षी ने बताया कि वह नौकरी करती है, तो उस आदमी ने अपनी परेशानी बताई. उसने कहा कि वह बस अपनी रोज़ की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काम ढूंढ रहा था. उसने साक्षी से पूछा कि क्या वह उसे कहीं रेफर कर सकती है.
जब साक्षी ने राइडर को रेफर करने के इरादे से उसकी एजुकेशन के बारे में पूछा, तो वह जवाब सुनकर हैरान रह गई. उस आदमी के पास मैथ्स में बैचलर और मैथ्स में मास्टर (MSc) की डिग्री थी. उसके पास B.Ed भी था. इसके अलावा, उसने सरकारी टीचर बनने की चाहत में 5-6 साल एग्जाम की तैयारी की थी. लेकिन आज, वह सड़क पर रैपिडो चला रहा था. साक्षी ने इस कड़वी सच्चाई पर सवाल उठाते हुए लिखा, ‘हम हमेशा स्टूडेंट्स से कहते हैं कि मेहनत करो, डिग्री लो, एग्जाम की तैयारी करो, और ज़िंदगी स्टेबल हो जाएगी. लेकिन क्या होता है जब कोई सब कुछ सही करता है और फिर भी उसके पास पक्की नौकरी नहीं होती?’
इस पोस्ट ने इंटरनेट यूज़र्स के दिल को छू लिया है. इसे 275,000 से ज़्यादा व्यूज़ और हज़ारों लाइक्स मिल चुके हैं. लेकिन असली दर्द कमेंट्स सेक्शन में छलक रहा है, जहाँ लोग अपनी कहानियाँ शेयर कर रहे हैं. एक यूज़र का दर्द सुनकर किसी की भी रूह कांप जाएगी. उसने लिखा, ‘मैंने छह साल तक एक मार्केटिंग एजेंसी चलाई. मैंने 16 करोड़ का रेवेन्यू कमाया, लेकिन नए क्लाइंट्स की कमी के कारण मुझे कंपनी बंद करनी पड़ी. मैं पिछले नौ महीनों से बेरोज़गार हूँ और पिछले हफ़्ते गुज़ारा करने के लिए ब्लिंकिट पिकर की काम करना शुरू कर दिया. अभी ज़िंदगी बहुत बुरी चल रही है.’
कमेंट सेक्शन में “डिग्री बनाम स्किल्स” को लेकर भी बहस छिड़ गई है. एक यूज़र ने लिखा, ‘हमारा एजुकेशन सिस्टम लोगों को यह समझाने में पूरी तरह से फेल रहा है कि एजुकेशन का मुख्य मकसद पैसे कमाने वाली स्किल्स डेवलप करना है, न कि ऐसी डिग्री हासिल करना जो आपको सिर्फ़ इनडायरेक्टली नौकरी के काबिल बनाती हैं.’ इस बीच, एक और व्यक्ति ने राइडर की मदद करते हुए लिखा, ‘सिर्फ़ डिग्री लेने से कुछ नहीं होता. अगर उसके पास मैथ्स में मास्टर्स है, तो क्या उसे अब भी मैथ्स याद है? अगर हाँ, तो मैं उसे एक हफ़्ते के अंदर नौकरी दिला सकता हूँ.’
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