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नेहरू और इंदिरा ने कब पेश किया था बजट?, बस इस मंत्री से पीछे हैं निर्मला सीतारमण, ब्लैक बजट क्या था? बजट से जुड़े दिलचस्प किस्सों पर डालें नजर

Budget Interesting Facts: बजट पेश होने में बस अब कुछ ही घंटों की देर है. लेकिन, क्या आपको आजादी से पहले और बाद में बजट के कई पहलुओं के बारे में पता है. यहां पर ऐसी अहम जानकारियां हैं जिसे आपने शायद पहले कभी नहीं सुना होगा.

Budget Interesting Facts: बजट पेश होने में बस अब कुछ ही घंटों की देर है. सभी तैयारियां हो गई हैं. इससे पहले हम आपके लिए बजट से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां और इंटरेस्टिंग फैक्ट्स बताने जा रहे हैं. क्योंकि, आम बजट का प्रभाव सिर्फ आर्थिक आंकड़ों पर ही नहीं बल्कि, राजनीति, परंपरा और बदलते इतिहास पर भी पड़ता है. जो कई दिलचस्प कहानियां भी छोड़ जाता है. बजट कभी इंग्लैंड के संसद के टाइम के मुताबिक शाम 5 बजे पेश किया जाता था, लेकिन वर्तमान की बात करें तो यह सुबह 11 बजे देश के सामने पेश किया जाता है. एक तरफ जहां पहले ब्रीफकेस में बजट आता था, वहीं अब यह लाल रंग के कवर वाले टैबलेट से संसद के पटल पर दिखाई पड़ता है. तो चलिए ऐसी ही मजेदार और बातों के बारे में चर्चा करते हैं, जो बजट से जुड़ी हैं. 

किसने किया था भारत का पहला बजट पेश?

शायद आपको पता होगा कि भारत का पहला बजट 166 वर्ष पहले 1860 में पेश किया गया था. तब उस वक्त भारत में ब्रिटिश राज चलता था. देश का बजट उस वक्त किसी भारतीय ने नहीं बल्कि स्कॉटलैंड के अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन ने बनाकर तैयार किया था. ब्रिटिश शासन के दौरान भारत का पहला बजट इसलिए तैयार हुआ, जिससे कि तत्कालीन प्रशासनिक और सैन्य खर्चों को सिस्टेमैटिक किया जा सके. 

इस वक्त हुआ आजाद भारत में पहला बजट पेश

बता दें कि स्वतंत्रता मिलने के बाद देश का पहला आम बजट 26 नवंबर 1947 को आरके शनमुगम चेट्टी के द्वारा पेश किया गया. इस बजट में सबसे खास बात यह थी कि यह बजट सिर्फ 7.5 महीने के लिए पेश किया गया था. इसकी वजह देश का नई व्यवस्था के अनुरूप ढलना था. यह बजट स्वतंत्र भारत की आर्थिक सोच को दर्शाता था. यही पहला आत्मनिर्भरता और योजना आधारित विकास की ओर बढ़ता कदम था.

वित्त मंत्री भी रहे जवाहरलाल नेहरू

यह बहुत कम लोग जानते हैं कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी एक बार वित्त मंत्री के पद पर रहे. उन्होंने यह जिम्मेदारी सिर्फ 13 फरवरी से 13 मार्च 1958 तक संभाली थी. देश के इतिहास में इसे किसी भी वित्त मंत्री का सबसे छोटा कार्यकाल के तौर पर देखा जाता है. 

जानें पहली महिला वित्त मंत्री कौन थीं?

अक्सर लोगों को लगता है कि निर्मला सीतारमण पहली महिला फाइनेंसियल मिनिस्टर हैं. लेकिन, भारत की दिग्गज नेत्री और आयरन लेडी के नाम से मशहूर इंदिरा गांधी ने पीएम रहते हुए एक बार बजट पेश किया था. यह तब हुआ जब 1970 में मोरारजी देसाई ने बैंकों के राष्ट्रीयकरण के खिलाफ में फाइनेंस मिनिस्टर के पद से रिजाइन दे दिया था. तब इंदिरा गांधी ने वित्त मंत्रालय की अतिरिक्त कमान संभाली थी. हांलांकि, पूर्णकालिक पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ही हैं. उन्होंने साल 2019 में पूर्णकालिक वित्त मंत्री के तौर पर बजट पेश किया था. इस तरह वे देश की पहली महिला वित्त मंत्री भी बन गईं.

इनके नाम है बजट पेश करने का रिकॉर्ड

बता दें कि मोरारजी देसाई के नाम भारत में सबसे अधिक बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है. देसाई के नाम 10 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है. लेकिन, अब वह दिन दूर नहीं दिखाई देता जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम यह रिकॉर्ड होगा. सीतारमण इस बार 9वां बजट पेश करेंगी. इसके अलावा उनके नाम वित्त मंत्री के तौर पर कई रिकॉर्ड भी हैं. मोरारजी देसाई के बाद अगर इस रिकॉर्ड में किसी का नाम है तो वह हैं निर्मला सीतारमण. भारत में बजट भाषण के सबसे लंबे रिकॉर्ड को देखें तो यह निर्मला सीतारमण के नाम है, जो कि उन्होंने साल 2020 के बजट भाषण के दौरान दिया. यह भाषण 2 घंटे से ज्यादा तक पढ़ा गया था. वित्त मंत्री थक गईं थी, इसके लिए उन्हें रुकना भी पड़ा था. 

1973 का ‘ब्लैक बजट’ ने बटोरी थीं सुर्खियां

समय था साल 1973 का, तब देश के वित्त मंत्री यशवंतराव बी चव्हाण हुआ करते थे. उन्होंन जो बजट पेश किया उसे इतिहास में ‘ब्लैक बजट’ के नाम से जाना गया. इसका सबसे बड़ा कारण राजकोषीय घाटा था. तब राजकोषीय घाटा 550 करोड़ रुपए का था. इसने सभी को चौंका दिया था. क्योंकि, उस दौर में यह बहुत बड़ी रकम थी. देश में इस बजट पर एक अलग ही बहस छेड़ दी थी. इसे बेहद चिंताजनक माना गया था. उस वक्त तेल संकट और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक दबावों ने भारत की इकॉनॉमी की जड़ें हिलाकर रख दी थीं. 

टाइमिंग में भी हुआ बदलाव

क्या आप जानते हैं कि आजादी के पहले और उसके बाद भी 1998 तक बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था? अगर स्वतंत्रता से पहले की बात की जाए तो यह ब्रिटिश संसद के मुताबिक पेश किया जाता था, जिसका समय सुबह 11.30 था और यही वक्त भारत में शाम 5 बजे होता था. यह परंपरा साल 1999 तक चलती रही. फिर, यशवंत सिन्हा ने बजट को पेश करने के वक्त में बदलाव किया और यह सुबह 11 बजे पेश करने की शुरुआत की. यह भी जान लें कि पहले बजट को 28 फरवरी के दिन पेश करने का नियम था. बाद में इसे 2017 से 1 फरवरी कर दिया गया. तब से बजट 1 फरवरी को पेश होता है. इसके पीछे की वजह सरकार को कामों के लिए अतिरिक्त समय निकालना था. साथ ही 2026 में आज पहला साल है जब बजट रविवार के दिन पेश होने जा रहा है. 

हलवा सेरेमनी की खासियत

इसकी जानकारी तो लगभग हर इंसान को होगी कि बजट से लगभग एक हफ्ते पहले ‘हलवा सेरेमनी’ आयोजित होती है. इसमें वित्त मंत्री बजट से जुड़े अधिकारियों को हलवा बांटती हैं और सभी अगले एक सप्ताह के लिए नॉर्थ ब्लॉक में बंद हो जाते हैं. ना ही उन्हें इस दौरान फोन करने की इजाजत होती है और ना ही इंटरनेट मिलता है. वे इस दौरान बाहर की दुनिया से कट जाते हैं. इसका मकसद बजट की गोपनीयता को बनाए रखना है. मतलब जब तक बजट संसद में पेश नहीं हो जाता, तब तक इसकी भनक नहीं लगनी चाहिए.

ब्रीफकेस की जगह जब बही खाता आया

पहले वित्त मंत्री बजट पेश करने जाते थे, तो उनके हाथ में एक ब्रीफकेस होता था. लेकिन, साल 2019 में जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद पहुंचीं, उनके हाथ में लाल रंग का पारंपरिक ‘बही-खाता’ देखा गया. हालांकि, बाद में पता चला कि यह लाल रंग के कवर में टैबलेट था. टेक्नोलॉजी और स्टाइल के साथ भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़ने का प्रतीक के तौर पर इसे देखा गया. इसी तरह बही खाते की शक्ल में लिपटे लाल रंग के कवर वाले टैबलेट से बजट आज भी पेश किया जा रहा है.

कागज से डिजिटल तक

एक वक्त ऐसा भी आया जब कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचाई. इससे कई परंपराएं और तरीकों में बदलाव हुआ. इससे देश का बजट भी अछूता नहीं रहा. साल 2021 में पहली बार देश का बजट पूरी तरह डिजिटल पेश हुआ था. महामारी के दौरान न तो पार्लियामेंट में मोटी किताबें बांटी गईं और न ही भारी-भरकम दस्तावेज की छपाई हुई. सभी सांसदों को टैबलेट पर ही बजट डॉक्युमेंट प्राप्त हुए. भारत में पहली बार इसे बड़ा तकनीकी बदलाव के तौर पर देखा गया. 

रेलवे बजट की विदाई

भारत में दशकों तक एक परंपरा और चलती रही. वह थी आम बजट से पहले रेलवे का अलग से बजट पेश करना. इस बजट को लेकर लोगों में भी काफी उत्सुकता बनी रहती थी. हालांकि, साल 2017 में इस बजट को भी आम बजट में मिला दिया गया. अगर आखिरी रेलवे बजट की बात करें तो यह सुरेश प्रभु ने 25 फरवरी 2016 को पेश किया था. इसके बाद रेलवे बजट भी आम बजट का हिस्सा बन गया. 

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