Parbhani Mayor Syed Iqbal: महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल देखने को मिल रही है. इस चुनाव के बाद बीजेपी और शिंदे गुट ने सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी पर मराठी-अमराठी और हिंदुत्व के मुद्दे पर हमला बोला.
परभणी मेयर सैयद इकबाल
Parbhani Mayor Syed Iqbal: महाराष्ट्र की राजनीति में एक और उथल-पुथल देखने को मिल रही है. परभणी महानगर पालिका में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस गठबंधन ने बाजी मार ली. शिवसेना (UBT) के सैयद इकबाल मेयर चुने के तौर पर चुने गए हैं, जबकि डिप्टी मेयर के तौर पर कांग्रेस के गणेश देशमुख को सेलेक्ट किया गया है. इस चुनाव के बाद बीजेपी और शिंदे गुट ने सीधे तौर पर उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी पर मराठी-अमराठी और हिंदुत्व के मुद्दे पर हमला बोला.
मराठवाड़ा क्षेत्र परभणी सामाजिक तौर पर मिक्स आबादी वाला क्षेत्र है. मुसलमानों की जनसंख्या यहां पर करीब 25 फीसदी है. इस क्षेत्र में सियासत को हमेशा संतुलन और गठबंधन के तौर पर देखा गया है. नगर निगम चुनावों में परभणी ने वक्त-वक्त पर कांग्रेस और शिवसेना-बीजेपी जैसे अलग-अलग सियासी दलों को देखा है.
ज्यादातर राजनीति हिंदू-मुसलमान के मुद्दे के इर्द-गिर्द ही घूमती दिखाई पड़ती है. खासकर जब उम्मीदवार मुसलमान हो. ऐसा यहां पर भी देखने को मिला जब सैयद इकबाल के मेयर चुने जाने पर प्रशासनिक योग्यता से अधिक उनकी पहचान की राजनीति पर टिक गया. भाजपा और शिंदे गुट ने इस निर्णय को मराठी मानुष की राजनीति और हिंदुत्व से समझौते के तौर पर पेश किया. वहीं दूसरी ओर शिवसेना (UBT) और कांग्रेस ने इसे समावेशी, संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पॉलिटिक्स से जोडा.
परभणी की राजनीति पर एक बार फिर से शिवसेना के भूतकाल की बात को वर्तमान से जोड़कर देखा गया. बात 1980 के दशक की है, जब शिवसेना के उभार के दौरान खान बनाम बाण का नारा सियासत की बहस का मुद्दा बना था. इसमें खान को मुसलमानी पहचान और बाण को शिवसेना और हिंदुत्व से जोड़ा गया था. उस वक्त के सियासी दौर पर नजर डालें तो वह हिंदुत्व और मराठी के आस-पास की राजनीति होती थी. बीजेपी ने इसी अतीत की ओर इशारा करते हुए कहा कि जो शिवसेना पहले खान बनाम बाण की पॉलिटिक्स खेलती थी, वही अब मुस्लिम मेयर का सपोर्ट कर रही है.
महापौर पद के लिए हुए इलेक्शन में शिवसेना (UBT) के सैयद इकबाल को 39 वोट हासिल हुए. जबकि, बीजेपी के उम्मीदवार तिरुमला खिल्लारे को 26 वोट मिले. डिप्टी मेयर के तौर पर गणेश देशमुख को 37 और नाझेमा अब्दुल रहीम को 27 वोट मिले. इस तरह कांग्रेस के सपोर्ट से उद्धव ठाकरे गुट ने परभणी में अपना मेयर बनाया और भारतीय जनता पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा.
इन आरोपों पर नवनिर्वाचित मेयर सैयद इकबाल ने भी अपनी बात को रखते हुए साफ शब्दों में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि मैं मराठी हूं और मेरी मातृभाषा मराठी है. उद्धव ठाकरे जाति या धर्म का भेद नहीं करते है. उनके पास डवलपमेंट का लक्ष्य है और उसी मार्ग पर चलकर हम परभणी शहर का चहुंओर विकास करेंगे. वहीं कांग्रेस एमएलए ने कहा कि देश में मुस्लिम राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री या मेयर नहीं बने क्या? संविधान सभी के लिए एक जैसा है. संजय राउत ने भी बीजेपी को आईना दिखाया और इकबाल का समर्थन किया.
बता दें कि सैदय इकबाल को पहली बार पार्षद बनने का मौका मिला है. फिलहाल, उन्हें एक लोकल एक्टिविस्ट के तौर पर पहचाना जाता है. वह सैयद अब्दुल खादर के छोटे भाई हैं. खादर एक अच्छे बिजनसमैन हैं और परभणी के मुस्लिम क्षेत्रों में वह मजबूत पकड़ रखते हैं. बता दें कि खादर पहले AIMIM से जुड़े थे. साथ ही उन्हें शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय जाधव का करीबी माना जाता है.
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