PM Modi Speech in Parliament: संसद में आज से विशेष सत्र की शुरुआत हो चुकी है. महिला आरक्षण से जुड़े 3 अहम विधेयकों पर चर्चा शुरू हो गई है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी बात रखी. आइए जानते हैं कि उन्होंने क्या-क्या कहा?
महिला आरक्षण विधेयक पर पीएम मोदी का भाषण
PM Modi Speech in Parliament: संसद में आज से विशेष सत्र की शुरुआत हो चुकी है. महिला आरक्षण से जुड़े 3 अहम विधेयकों पर चर्चा शुरू हो गई है. जानकारी सामने आ रही है कि इस चर्चा से पहले गृहमंत्री अमित शाह अहम बैठक कर रहे हैं. बैठक में कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल, किरेन रिजिजू समेत कई नेता शामिल हैं. महिला आरक्षण और परिसीमन पर तीन दिन के विशेष सत्र के दौरान संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण खत्म हो गया है.
पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि जिस किसी ने भी महिलाओं को मिले अधिकारों का विरोध किया है, महिलाओं ने उसका बहुत मजबूती से सामना किया है. भारत की विकास यात्रा में सांसदों को महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाने का अवसर मिला है.
आज जो लोग इसका विरोध करेंगे उसको लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी. विशेष संसद सत्र के दौरान लोकसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत की महिलाओं ने उन लोगों को माफ नहीं किया है. जिन्होंने महिला आरक्षण बिल का विरोध किया था. उनकी यह टिप्पणी विधायिकाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर चल रही बहस के बीच आई.
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह भावना महिलाओं के मज़बूत राजनीतिक सशक्तिकरण की लंबे समय से चली आ रही उम्मीदों को दर्शाती है, क्योंकि संसद प्रस्तावित कोटा व्यवस्था और उसके कार्यान्वयन पर चर्चा जारी रखे हुए है. प्रस्तावित कोटा देश को “एक नई दिशा” देगा. उन्होंने सांसदों से कहा कि वे इस सुधार के ज़रिए देश को एक नई दिशा देने वाले हैं. व्यापक दृष्टिकोण पर ज़ोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य कानून को और अधिक संवेदनशील बनाना है और यह 21वीं सदी में भारत के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है, जबकि देश का वैश्विक कद लगातार बढ़ रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए कहा कि भारत एक निर्णायक लोकतांत्रिक मोड़ पर खड़ा है. उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के जीवन में कुछ अहम पल समाज की सोच और नेतृत्व की उन पलों को सही ढंग से भुनाने की क्षमता से एक स्थायी विरासत का रूप ले लेते हैं. पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है, उसे अपनी आधी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करके एक नया आयाम जोड़ने का पवित्र अवसर मिला है.
उन्होंने सांसदों से आग्रह किया कि वे इस अवसर को हाथ से न जाने दें. उन्होंने कहा कि देश सामूहिक रूप से शासन-प्रशासन को एक नई दिशा देने और व्यवस्था में संवेदनशीलता को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि इस संसदीय मंथन से निकलने वाला अमृत न केवल राजनीति के स्वरूप को बल्कि राष्ट्र की दिशा और दशा को भी आकार देगा.
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