Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज को खोला (Unfurl) जाता है, जबकि स्वतंत्रता दिवस पर झंडा फहराया (Hoist) जाता है. आमतौर पर लोग इन दोनों शब्दों को एक-जैसा समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में फर्क है.
15 अगस्त पर देशभक्ति के जोश में तिरंगे से जुड़ी ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी
Republic Day 2026: दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. कर्तव्य पथ पर हुई शानदार परेड में देश की मिलिट्री ताकत दिखाई गई, जिसमें मिसाइलें, नई यूनिट्स, एलीट मार्चिंग टुकड़ी और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल किए गए कई देसी हथियार सिस्टम शामिल थे. यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्ट के तौर पर शामिल हुए. कर्तव्य पथ इवेंट की थीम “वंदे मातरम” के 150 साल थी. परेड के दौरान मिलिट्री की तीन पीढ़ियों ने अपनी बहादुरी दिखाई.
दिल्ली के कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज खोला गया, जिसके बाद राष्ट्रगान गाया गया. इसके साथ ही स्वदेशी रूप से विकसित 105 मिमी लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की गूंजदार सलामी दी गई. यब यहां पर आप सोच रहे होंगे कि झंडा फहराया क्यों (Hoist) नहीं गया. खोला (Unfurl) क्यों गया. और इन दोनों में क्या अंतर है?
रिपब्लिक डे पर, झंडे को ज़मीन से ऊपर नहीं फहराया जाता बल्कि ऊपर पहले से बंधे एक पोल से झंडे को खोलकर फहराया जाता है. इस सेरेमनी को अनफर्लिंग कहते हैं. यह सम्मान भारत के प्रेसिडेंट नई दिल्ली में कर्तव्य पथ (पहले राजपथ) पर देते हैं. इसके बाद राष्ट्रगान और दूसरे सेरेमोनियल इवेंट्स होते हैं.
झंडा खोलने की यह परंपरा इसलिए है क्योंकि भारत 1947 में आज़ाद हुआ था. 1950 में जब संविधान लागू हुआ, तब भारत पहले से ही आज़ाद था. इसलिए, 26 जनवरी को झंडा खोलने, न कि उसे फहराना, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सम्मान का प्रतीक माना जाता है.
| विषय | झंडा फहराना (Flag Hoisting) | झंडा खोलना (Flag Unfurling) |
|---|---|---|
| प्रक्रिया | झंडा खंभे के नीचे से ऊपर चढ़ाया जाता है | झंडा पहले से खंभे के ऊपर लगा होता है |
| तरीका | रस्सी के सहारे झंडे को ऊपर खींचा जाता है | झंडे को खोलकर पूरी तरह फैलाया जाता है |
| प्रतीक | स्वतंत्रता प्राप्ति का प्रतीक | संविधान, लोकतंत्र और गणराज्य का प्रतीक |
| अवसर | स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) | गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) |
| मुख्य अतिथि | प्रधानमंत्री झंडा फहराते हैं | राष्ट्रपति झंडा खोलते हैं |
स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं, जबकि गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराते हैं. यह अंतर भारत की ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ा है आजादी से लेकर संवैधानिक गणराज्य बनने तक. राष्ट्रपति देश के राष्ट्राध्यक्ष और संविधान के संरक्षक होते हैं, इसलिए वे गणतंत्र दिवस पर ध्वज फहराकर भारत के संप्रभु गणराज्य होने की पुष्टि करते हैं. वहीं प्रधानमंत्री सरकार के प्रमुख और जनता के प्रतिनिधि होते हैं, इसलिए स्वतंत्रता दिवस पर ध्वज फहराकर आजादी के आंदोलन को सम्मान देते हैं. यह परंपरा हर साल निभाई जाती है, जिसमें गणतंत्र दिवस 2026 भी शामिल है.
भारत ने 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी पाई. स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा फहराते हैं, जो यह दर्शाता है कि सत्ता अब जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में है.
26 जनवरी को भारत ने खुद को एक संप्रभु गणराज्य घोषित किया और नागरिकों ने अपने लिए संविधान अपनाया जो न्याय, स्वतंत्रता और समानता की गारंटी देता है. इसलिए संविधान के संरक्षक होने के नाते राष्ट्रपति इस दिन तिरंगा फहराते हैं.
गणतंत्र दिवस संविधान की सर्वोच्चता और कानून के शासन का उत्सव है. राष्ट्राध्यक्ष, संविधान के संरक्षक और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में राष्ट्रपति नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर ध्वज फहराकर समारोह का नेतृत्व करते हैं. इससे यह संदेश जाता है कि देश व्यक्तियों से नहीं, सिद्धांतों से चलता है.
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