गणतंत्र दिवस 2026: आखिर संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी का ही दिन क्यों चुना गया? इस तारीख के पीछे छिपा है एक ऐसा ऐतिहासिक सच, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. जानें...
भारत हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाता है, जो 1950 में देश के संविधान के लागू होने के दिन की याद दिलाता है. लगभग 80 साल पहले इसी दिन, भारत एक ब्रिटिश डोमिनियन से एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य में बदल गया था, जो इसके अपने नागरिकों द्वारा बनाए गए कानूनों द्वारा शासित था.
भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली, लेकिन यह तुरंत एक गणतंत्र नहीं बना. दो साल से अधिक समय तक, देश भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत काम करता रहा. इस अवधि के दौरान, संविधान सभा ने एक व्यापक संविधान तैयार करने पर काम किया जो भारत के मूल्यों, विविधता और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करे.
26 जनवरी की तारीख को जानबूझकर चुना गया था. 26 जनवरी 1930 को, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज’ यानी ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा की थी. स्वतंत्रता संग्राम और उसके नेताओं तथा नागरिकों द्वारा किए गए बलिदानों के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में, उन्होंने 20 साल बाद उसी तारीख को संविधान लागू किया.
भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है. यह राजनीतिक व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करता है, सरकार की शक्तियों को परिभाषित करता है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों की रक्षा करता है.
गणतंत्र दिवस इस बात का वार्षिक अनुस्मारक है कि भारत संविधान द्वारा शासित है, न कि किसी व्यक्ति या अधिकारी द्वारा. यह न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों को पुख्ता करता है, जो राष्ट्र की नींव हैं.
मुख्य गणतंत्र दिवस समारोह नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित किया जाता है. कार्यक्रम की शुरुआत भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ होती है, जिसके बाद एक भव्य परेड होती है. परेड की मुख्य विशेषताएं हैं:
साल 2026 में भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा. इस वर्ष की थीम ‘वंदे मातरम’ है, जो राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में रखी गई है। यह थीम परेड, झांकियों और बीटिंग द रिट्रीट समारोह में दिखाई देगी.
यूरोपीय संघ के नेता एंटोनियो कोस्टा (यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष) और उर्सुला वॉन डेर लेयेन (यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष) को इस समारोह के लिए मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है.
90 मिनट की इस परेड में 18 मार्चिंग दस्ते, 13 सैन्य बैंड, 17 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और सेवाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली 30 झांकियां और भारत की सैन्य क्षमताओं का प्रदर्शन शामिल होगा.
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