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‘ब्राह्मण होना योग्यता नहीं किसी भी जाति का…’,ब्राह्मणों को लेकर RSS चीफ मोहन भागवत ने ऐसा क्या कहा? जिसे सुन दंग रह गया हर शख्स

Mohan Bhagwat: मुस्लिम इलाकों में काम करने की चुनौतियों का जिक्र करते हुए RSS चीफ भागवत ने कहा कि गाली-गलौज पर रिएक्ट नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे झगड़ा बढ़ता है. उन्होंने भाषा के झगड़े को 'लोकल बीमारी' बताया और कहा कि इसे फैलने नहीं देना चाहिए.

Mohan Bhagwat: मुंबई में हुई “मुंबई लेक्चर सीरीज़” के दूसरे दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के चीफ मोहन भागवत ने कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बात की. जाति के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि RSS में किसी भी जाति का व्यक्ति सबसे ऊंचे पदों पर पहुंच सकता है. उनके अनुसार अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का होना कोई रुकावट नहीं है, और ब्राह्मण होना कोई खास योग्यता नहीं है. उन्होंने माना कि हालांकि RSS में शुरू में ब्राह्मणों की संख्या ज़्यादा थी, लेकिन संगठन सभी जातियों के लिए काम करता है.

इस इवेंट में मोहन भागवत ने कहा कि लोग RSS की फंडिंग के बारे में जानने को उत्सुक हैं लेकिन संगठन मुख्य रूप से अपने वॉलंटियर्स के सपोर्ट से चलता है. उन्होंने बताया कि अपनी यात्राओं के दौरान बाहर खाने के बजाय वर्कर वॉलंटियर्स के घरों पर रहते हैं और उनके दिए गए खाने पर गुजारा करते हैं.

इस प्रोग्राम में RSS के काम करने के तरीकों, जाति व्यवस्था, भाषा के झगड़े, धर्म परिवर्तन और अवैध प्रवासियों जैसे टॉपिक पर फोकस किया गया. मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें इंग्लिश से कोई नफरत नहीं है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जहां मुमकिन नहीं है वहां वे इंग्लिश का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि उन्होंने अपनी मातृभाषा या हिंदी इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर जोर दिया.

भाषा के झगड़े को बताया लोकल बीमारी

मुस्लिम इलाकों में काम करने की चुनौतियों का जिक्र करते हुए RSS चीफ भागवत ने कहा कि गाली-गलौज पर रिएक्ट नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे झगड़ा बढ़ता है. उन्होंने भाषा के झगड़े को ‘लोकल बीमारी’ बताया और कहा कि इसे फैलने नहीं देना चाहिए.

अलग-अलग धार्मिक विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए-मोहन भागवत

“घर वापसी” पर उन्होंने कहा कि अलग-अलग धार्मिक विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन जबरदस्ती धर्म बदलने के मामलों में लोगों को अपनी मर्जी से वापस लाया जाना चाहिए. मोहन भागवत ने “घर वापसी” पर कहा, “हमारा मानना ​​है कि धार्मिक विचार अलग-अलग हो सकते हैं. नारायण वामनराव ने ईसाई धर्म अपनाया था. वह एक अच्छे कवि थे. हम उनका सम्मान करते हैं. लेकिन जिनका जबरदस्ती धर्म बदला गया, उन्हें पूरी तरह से घर वापसी के जरिए वापस लाया जाना चाहिए.”

गैर-कानूनी इमिग्रेंट्स के बारे में उन्होंने सरकार से उनकी पहचान करने और उन्हें डिपोर्ट करने की अपील की. ​​उन्होंने यह भी कहा कि भारतीयों को उनके धर्म की परवाह किए बिना बिज़नेस दिए जाने चाहिए. इस इवेंट में फिल्म इंडस्ट्री और एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस की कई हस्तियां भी मौजूद थीं. इनमें अनन्या पांडे, करण जौहर, एक्टर जैकी श्रॉफ और सीनियर IAS ऑफिसर मिलिंद म्हैसकर और मनीषा म्हैसकर शामिल थे. संघ की 100वीं सालगिरह के मौके पर यह इवेंट काफी अहम था.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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