<
Categories: देश

अब पिता ही नहीं, मां की जाति से भी होगी बच्चे की पहचान, Supreme Court के फैसले ने बदली सदियों पुरानी परंपरा

Supreme Court Historic Judgment on Caste: सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया हैं, जिसमें नाबालिग बच्ची की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, उसकी मां की जाति के आधार पर SC सर्टिफिकेट जारी करने की मंज़ूरी दे दी.

Supreme Court SC Certificate Verdict: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया हैं, जिसमें नाबालिग बच्ची की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, उसकी मां की जाति आदि द्रविड़’ के आधार पर अनुसूचित जाति (SC) सर्टिफिकेट जारी करने की मंज़ूरी दे दी. इस फैसले को दूरगामी असर वाला माना जा रहा है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही कई याचिकाएं पेंडिंग हैं, जो उस पारंपरिक नियम को चुनौती देती हैं जिसके तहत बच्चे की जाति पिता की जाति के आधार पर तय होती है.

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, मामला पुडुचेरी की एक महिला से जुड़ा है, जिसने अपने तहसीलदार को आवेदन देकर अपनी जाति के आधार पर अपने तीन बच्चों – दो बेटियों और एक बेटे – के लिए अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अनुरोध किया था. महिला ने अपने आवेदन में कहा था कि उसके माता-पिता और दादा-दादी सभी हिंदू आदि द्रविड़ समुदाय के थे. उसने यह भी बताया कि शादी के बाद उसका पति उसके साथ उसके मायके में रह रहा था. इस मामले में केंद्र सरकार द्वारा जारी पुरानी अधिसूचनाओं का भी ज़िक्र किया गया. 5 मार्च, 1964 और 17 फरवरी, 2002 को जारी राष्ट्रपति अधिसूचनाओं और गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, किसी व्यक्ति की जाति मुख्य रूप से उसके पिता की जाति और निवास स्थान के आधार पर तय की जाती थी.

रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को पलटने से इनकार कर दिया, जिसमें पुडुचेरी की लड़की को SC सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि अगर लड़की को समय पर जाति प्रमाण पत्र नहीं मिला, तो उसका भविष्य प्रभावित हो सकता है.

CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट बेंच ने यह भी साफ किया कि वह इस मामले में बड़े कानूनी सवाल को अभी खुला रख रही है. सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी ने एक नई बहस छेड़ दी। उन्होंने कहा कि जब समय के साथ हालात बदल रहे हैं, तो मां की जाति के आधार पर जाति प्रमाण पत्र क्यों नहीं जारी किया जा सकता?  इस टिप्पणी को सामाजिक और कानूनी नज़रिए से एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है. अगर भविष्य में यह सिद्धांत स्थापित हो जाता है, तो इसका मतलब होगा कि अनुसूचित जाति की महिला और उच्च जाति के पुरुष के बच्चे, भले ही वे उच्च जाति के सामाजिक माहौल में पले-बढ़े हों, फिर भी SC सर्टिफिकेट के हकदार हो सकते हैं.

बच्चे की जाति पिता की जाति से होती है तय

बच्चों की जाति उनके पिता की जाति से तय होती थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी कई मामलों में इस सिद्धांत को माना है, जिसमें कहा गया है कि बच्चे की जाति आम तौर पर पिता की जाति से तय होती है. 2003 के ‘पुनीत राय बनाम दिनेश चौधरी’ मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आरक्षण से जुड़े मामलों में, जाति तय करने का निर्णायक आधार पिता की जाति होगी, और पारंपरिक हिंदू कानून के तहत, बच्चा अपनी जाति पिता से पाता है, मां से नहीं.

हालांकि, 2012 के ‘रमेशभाई डबाई नाइका बनाम गुजरात सरकार’ मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने इस सिद्धांत को थोड़ा और लचीला बनाया. उस फैसले में, कोर्ट ने कहा कि अंतर-जातीय विवाह या आदिवासी और गैर-आदिवासी व्यक्ति के बीच शादी से पैदा हुए बच्चे की जाति सिर्फ़ पिता की जाति के आधार पर तय नहीं की जा सकती. फैसले में यह भी कहा गया कि ऐसे मामलों में यह माना जा सकता है कि बच्चा पिता की जाति का है, लेकिन यह अनुमान अंतिम और पक्का नहीं है.

जाति तय करने के पिछले नियम क्या थे?

उस फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर कोई बच्चा यह साबित कर सकता है कि उसे अपनी मां के सामाजिक माहौल में पाला-पोसा गया है, जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से है, और उसने उस समुदाय के अन्य सदस्यों की तरह ही सामाजिक भेदभाव, अपमान और वंचित होने का सामना किया है, तो उसे उस समुदाय का माना जा सकता है.
अब, नवीनतम फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए, मां की जाति के आधार पर SC सर्टिफिकेट जारी करने की अनुमति दी है, लेकिन यह भी साफ किया है कि जाति निर्धारण से जुड़े बड़े कानूनी सवालों पर अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा. इस फैसले से पूरे देश में जाति प्रमाण पत्र, आरक्षण और अंतर-जातीय विवाह से जुड़े अधिकारों के बारे में एक नई बहस शुरू होने की संभावना है. कानूनी विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अगर भविष्य में अदालतें मां की जाति को एक निर्णायक कारक के रूप में मानने की दिशा में आगे बढ़ती हैं, तो यह सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है.
Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing 3 months intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024. She Worked in Inkhabar Haryana 9 months there she cover full Haryana news. Currently In India News her speciality is hard news, lifestyle, entertainment, Business.

Recent Posts

IND VS WI: दूसरे मुकाबले से पहले बैड न्यूज,जिस पर था टीम को नाज, वहीं स्टार खिलाड़ी टीम से बाहर; सदमे में फैंस

IND VS WI: तिरुवनंतपुरम मैच में वेस्टइंडीज को पहले बैटिंग करने का न्योता मिला. ग्रीव्स,…

Last Updated: September 30, 2026 09:03:00 IST

World Cup 2027: कब खेला जाएगा भारत और पाकिस्तान विश्व कप मुकाबला? इस दिन जारी होगा वर्ल्ड कप का शेड्यूल; नोट कर लें डेट

World Cup 2027 Schedule: 2027 वर्ल्ड कप ODI शेड्यूल की तारीखों का खुलासा किया गया…

Last Updated: September 30, 2026 08:50:49 IST

गधे ने कर ली Nursing? MP में जारी हुआ सर्टिफिकेट, पिता के कॉलम में लिखा ‘डंकी फादर’

Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल की ऑनलाइन प्रक्रिया पर सवाल उठे, जब गधे…

Last Updated: September 30, 2026 08:28:45 IST

Asian Games 2026 में भारत को मिला सातवां गोल्ड, चीन को हराकर बेटियों ने रचा इतिहास; वर्ल्ड रिकॉर्ड भी किया अपने नाम

Asian Games 2026 India Gold Medal in Archery:भारत की चिकिता, प्रीतिका और ज्योति ने मिलकर…

Last Updated: September 30, 2026 08:22:38 IST

The Vvaan Box Office Collection: छठी मैया का दिखा असर? The Vvaan की कमाई ने अचानक पकड़ी रफ्तार, आंकड़े कर देंगे हैरान!

The Vvaan Box Office Collection: सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की 'द वन' ने बॉक्स…

Last Updated: September 30, 2026 08:03:57 IST