Supreme Court: आज वाट्सऐप के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. जिसमें वाट्सऐप ने स्वीकार किया कि वह कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ़ इंडिया (CCI) के उन निर्देशों का पालन करेगा, जिनके तहत मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म को यूज़र्स को इस बात पर ज़्यादा कंट्रोल देना होगा कि उनका डेटा दूसरी मेटा कंपनियों के साथ शेयर किया जाए या नहीं.
वाट्सऐप ने आज यानी सोमवार (23 फरवरी, 2026) को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ़ इंडिया (CCI) के उन निर्देशों का पालन करेगा
Whatsapp Case: वाट्सऐप ने आज यानी सोमवार (23 फरवरी, 2026) को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ़ इंडिया (CCI) के उन निर्देशों का पालन करेगा, जिनके तहत मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म को यूज़र्स को इस बात पर ज़्यादा कंट्रोल देना होगा कि उनका डेटा दूसरी मेटा कंपनियों के साथ शेयर किया जाए या नहीं. इसके अलावा, उन्होंने कोर्ट में कहा कि वह नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उस आदेश को चुनौती देने वाली अंतरिम एप्लीकेशन वापस लेना चाहता है, जिसमें डेटा शेयरिंग के लिए यूज़र-सहमति-आधारित फ्रेमवर्क की ज़रूरत पर CCI द्वारा ऐसे निर्देशों को लागू करने के लिए कहा गया था.
भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल पंचोली की बेंच ने इसके बाद वाट्सऐप और मेटा को एप्लीकेशन वापस लेने की इजाजत दे दी.
कोर्ट वाट्सऐप की 2021 प्राइवेसी पॉलिसी के खिलाफ CCI की कार्रवाई और NCLAT के सामने बाद की कार्यवाही से पैदा हुई अपीलों पर सुनवाई कर रहा था. वाट्सऐप और मेटा की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि कंपनी ने अपने डेटा-शेयरिंग तरीकों को समझाते हुए एक हलफनामा दायर किया है और अपीलेट ट्रिब्यूनल द्वारा तय समय-सीमा के अंदर NCLAT के साफ निर्देशों को लागू करेगी. इसके अलावा, उन्होंने बेंच को बताया कि वाट्सऐप अब इन निर्देशों पर रोक लगाने के लिए अपनी अंतरिम एप्लीकेशन पर जोर नहीं देगा, क्योंकि कंपनी ने 16 मार्च तक इनका पालन करने का फ़ैसला किया है.
कोर्ट ने सबमिशन रिकॉर्ड किया और एप्लीकेशन को दबाव में न आने के कारण खारिज कर दिया, साथ ही यह साफ किया कि वाट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी की वैलिडिटी पर दायर मुख्य अपील पेंडिंग रहेगी. कोर्ट ने वाट्सऐप को NCLAT की ज़रूरत के मुताबिक CCI के सामने यूज़र-डेटा-शेयरिंग निर्देशों पर एक कम्प्लायंस रिपोर्ट फ़ाइल करने का भी निर्देश दिया. इस मामले में CCI की अपील भी सुप्रीम कोर्ट के सामने पेंडिंग है. रेगुलेटर एडवरटाइज़िंग के मकसद से वाट्सऐप यूजर डेटा शेयर करने पर पांच साल के बैन को फिर से लागू करने की मांग कर रहा है, एक उपाय जिसे NCLAT ने खारिज कर दिया था.
सुनवाई के दौरान CCI ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह मामला प्राइवेसी और डेटा प्रोटेक्शन के मुद्दों से अलग कॉम्पिटिशन लॉ की चिंताओं को उठाता है. कोर्ट ने एक व्यक्ति द्वारा दायर एक इंटरवेंशन एप्लीकेशन को भी खारिज कर दिया, जिसमें खुद को कंज्यूमर के तौर पर पेश होने का दावा किया गया था, यह देखते हुए कि यह विवाद CCI और कंपनियों के बीच है और एप्लीकेंट कानून के अनुसार उपाय करने के लिए आजाद है.
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