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केवल 7 साल की उम्र में कर दिया ऐसा कमाल, देखकर फटी रह जाएंगी आपकी आंखें

असम की 7 साल की मासूम (7 Year Old Child) ने अपने तैराकी (Swimming) से हर किसी को पूरी तरह से हैरान कर दिया है. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उम्र सिर्फ एक संख्या नहीं है.

Seven Year Old Youngest Swimmer:  असम की 7 साल की मासूम ने वो कर दिखाया है जिसके बारे में कभी किसी ने सोचा नहीं होगा. एक नन्ही सी जान ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है. आखिर क्या है पूरा मामला जानने के लिए पूरी खबर पढ़िए.

आखिर कौन है किउचेनघन फुकन?

असम की सात साल की नन्ही जलपरी, किउचेनघन फुकन (Kiuchenghan Phukan) इन दिनों सोशल मीडिया पर सभी का ध्यान अपनी तरफ तेजी से खींच रही हैं. इस छोटी सी उम्र में उन्होंने खुले समुद्र की लहरों को मात देते हुए मुंबई के समुद्री मार्ग पर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है. तो वहीं, उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ असम के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गया है. हर कोई इनकी जमकर सरहाना कर रहा है.

साहस और रिकॉर्ड का सफर

4 फरवरी, 2026 को किउचेनघन ने एलिफेंटा द्वीप (Elephanta Island) से अपनी तैराकी की शुरुआत की. इस दौरान उनका लक्ष्य गेटवे ऑफ इंडिया (Gateway of India) तक पहुंचना था. इतना ही नहीं, खुले समुद्र में तैरना किसी स्वीमिंग पूल में तैरने जैसा नहीं होता है. यहां भयंकर और विशाल लहरों का सामना करना पड़ता है. इन सबके अलावा पानी का तापमान और समुद्री जीवों की मौजूदगी जैसी कई चुनौतियों का भी डट कर मुकाबला करना होता है.

3 घंटे में अपने लक्ष्य को किया हासिल

किउचेनघन ने लगभग 13 किलोमीटर की यह विशाल दूरी सिर्फ और सिर्फ 3 घंटे 29 मिनट में ही पूरी की. तो वहीं, इतनी कम उम्र में खुले पानी (Open Water Swimming) में इतनी लंबी दूरी तय करना उनके शारीरिक और मानसिक मजबूती के लिए सबसे ज्यादा मुश्किल था. दूसरी तरफ जैसे ही वो गेटवे ऑफ इंडिया पहुंची तो वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों के साथ उनका भव्य स्वागत किया.

प्रेरणा और भविष्य की राह

किउचेनघन की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, कोच के साथ-साथ उनके परिवार का सबसे ज्यादा स्पोर्ट देखने को मिल रहा है. तो वहीं, असम जैसे राज्य से निकलकर, जहां नदियां तो बहुत हैं लेकिन समुद्री तैराकी के मौके बेहद ही कम सीमित हैं.

हालांकि, मुंबई के अरब सागर में यह कारनामा करना अब तक अद्भुत माना जा रहा है. जिसको लेकर खेल विशेषज्ञों ने जानकारी देते हुए बताया कि अगर उन्हें सही प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलती रहीं, तो वे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम और भी ज्यादा रोशन करना चाहेंगी. 

उनकी यह कहानी उन सभी बच्चों और अभिभावकों के लिए एक प्रेरणा है जो उम्र को केवल एक संख्या मानते हैं. किउचेनघन ने यह साबित कर दिया है कि अगर आपके सपने बड़े हैं तो इन्हें पूरे करने की हिम्मत भी होनी चाहिए.

Darshna Deep

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