Twisha Sharma Case: ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी उनकी सास और रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया है. बुधवार को अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए साफ कर दिया कि फिलहाल उन्हें राहत देना उचित नहीं होगा. कोर्ट का मानना है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कई अहम सबूतों की जांच रिपोर्ट आना बाकी है. ऐसे में जांच पूरी होने से पहले आरोपी को जमानत देना सही नहीं होगा.
कोर्ट ने बताया ये कारण
गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच सुनवाई कर रही थी. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 26 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इसके बाद बुधवार शाम को कोर्ट ने 23 पन्नों का विस्तृत आदेश जारी किया. अदालत ने अपने आदेश में मामले की गंभीरता और अब तक सामने आए तथ्यों पर विस्तार से विचार किया. कोर्ट ने कहा कि ट्विशा की मौत से ठीक पहले की परिस्थितियां, सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखा गया है. जांच के दौरान सामने आई सामग्री को देखने के बाद फिलहाल आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता.
फॉरेंसिक और डिजिटल रिपोर्ट का इंतजार
हाई कोर्ट ने जमानत खारिज करने के पीछे जांच अधूरी होने को भी अहम वजह माना. अदालत के मुताबिक, BNSS की धारा 193(9) के तहत मामले की आगे की जांच जारी है. अभी कई महत्वपूर्ण फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल सबूतों से जुड़ी रिपोर्ट सामने आनी बाकी हैं. कोर्ट ने माना कि ये रिपोर्ट जांच के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो सकती हैं. जब तक इनसे जुड़ी जरूरी जानकारियां सामने नहीं आ जातीं, तब तक आरोपी को जमानत देना उचित नहीं होगा. इसी आधार पर गिरिबाला सिंह की याचिका खारिज कर दी गई.
क्या है पूरा ट्विशा शर्मा मौत मामला?
बता दें कि ट्विशा शर्मा की शादी एक ऐसे मामले में चर्चा में आई थी, जिसमें उनकी मौत के बाद ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगे. ट्विशा की मौत के मामले में उनके पति और ससुराल पक्ष के सदस्यों की भूमिका को लेकर जांच शुरू हुई थी. इसी मामले में उनकी सास गिरिबाला सिंह, जो रिटायर्ड जिला जज हैं, आरोपी हैं. पुलिस मौत से जुड़े हालात, सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य डिजिटल व फॉरेंसिक सबूतों की जांच कर रही है. गिरिबाला सिंह ने इसी मामले में जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन अदालत ने जांच अधूरी होने और महत्वपूर्ण रिपोर्ट लंबित रहने के कारण उनकी याचिका खारिज कर दी. अब मामले की आगे की जांच और आने वाली रिपोर्टों पर सबकी नजरें टिकी हैं.
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