Lady Aghori Kali Nand Giri: उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा कि उज्जैन के श्मशान घाट पर रहने वाले विष्णुनाथ महाराज की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 301 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
उज्जैन में लेडी अघोरी गिरफ्तार
Lady Aghori Kali Nand Giri: उज्जैन के श्मशान घाट से सामने आए एक वीडियो ने हर किसी को हैरान कर दिया है. वीडियो में खुद को ‘लेडी अघोरी’ बताने वाली काली नंद गिरी कथित तौर पर जलती चिता के पास तलवार लिए खड़ी दिखाई दे रही हैं और चिता से मांस खाते हुए नजर आती हैं. वीडियो वायरल होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और अब आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस सिर्फ इस घटना की जांच नहीं कर रही, बल्कि उनके पुराने रिकॉर्ड, कथित तांत्रिक गतिविधियों और कमाई के स्रोतों को लेकर भी पड़ताल कर रही है. आखिर इस वीडियो के पीछे की पूरी कहानी क्या है और पुलिस को किन आरोपों की जांच करनी पड़ रही है? आइए जानते हैं.
उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने कहा कि उज्जैन के श्मशान घाट पर रहने वाले विष्णुनाथ महाराज की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 301 के तहत मामला दर्ज किया गया है. धारा 301 कब्रिस्तान में बिना इजाजत घुसने, अंतिम संस्कार में बाधा डालने या किसी इंसानी लाश का अपमान करने से जुड़ी है.
शर्मा ने कहा, “उसे (मंगलवार को) गिरफ्तार किया गया था. कोर्ट ने उसे 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.”कथित वीडियो में, आरोपी हाथ में तलवार लिए जलती हुई चिता के पास खड़ी दिख रही है और एक जगह पर वह चिता से मांस खाती हुई भी दिख रही है. घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज की गई.
उज्जैन के जीवाजीगंज पुलिस स्टेशन को मिली शिकायत के मुताबिक, गिरी का जन्म अल्लूरी श्रीनिवास नाम के एक आदमी के तौर पर हुआ था और उसने ट्रांसजेंडर की पहचान अपना ली है.
उज्जैन में सोशल मीडिया पर उसकी मौजूदगी है, जहां उसे ‘लेडी अघोरी’ कहा जाता है. उसके वीडियो, जो अक्सर मंदिरों और धार्मिक जगहों पर फिल्माए जाते हैं, उनमें आध्यात्मिक रस्में और सनातन धर्म पर बयान होते हैं.एसपी ने कहा कि गिरी के पिछले रिकॉर्ड की डिटेल में जांच शुरू की गई है, क्योंकि ऐसी शिकायतें मिली हैं कि उसने तेलंगाना में एक छात्रा को धोखा दिया और एक दूसरी महिला से तांत्रिक पूजा करने के बहाने 10 लाख रुपये ले लिए.
शर्मा ने कहा, “हम (मामलों के बारे में) और उसकी इनकम के सोर्स की जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं.” पीटीआई के मुताबिक, जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि सभ्य समाज में ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं. उन्होंने कहा, “अघोरी साधना को कॉन्फिडेंशियल रखना ज़रूरी है; इसे पब्लिक नहीं किया जा सकता. कोई भी साधक जो इसे पब्लिक करता है, वह धोखेबाज़ हो सकता है. यह समझना चाहिए कि ऐसे काम, जिनमें इंसानी मांस खाना दिखाया जाता है, वैम्पायरिज़्म की कैटेगरी में आते हैं.”
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