हैदराबाद को न सिर्फ इसकी ऐतिहासिक इमारतों (Historic Monuments) के लिए, बल्कि इसके बेजोड़ खान-पान की वजह से आधिकारिक तौर पर भारत की 'बिरयानी कैपिटल' (The Biryani Capital of India) भी कहा जाता है. यहां का बिरयानी कल्चर (Biryani Culture) केवल भोजन नहीं, बल्कि एक जीवित विरासत है जो कई सालों से चलता आ रहा है.
The 'Biryani Capital of India'
Which City Is Known As The ‘Biryani Capital of India’: भारत की ‘बिरयानी कैपिटल’ के रूप में हैदराबाद को जाना जाता है. इस शहर का नाम आते ही सबसे पहली चीज़ जो ज़हन में आती है, वह है यहां की खुशबूदार और मशहूर ‘हैदराबादी दम बिरयानी’. तो वहीं, यहां बिरयानी सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि एक भावना और लोगों के जीवनशैली का सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है.
हैदराबादी बिरयानी का इतिहास लगभग 400 साल पुराना है. ऐसा माना जाता है कि इसकी शुरुआत निज़ामों के शाही रसोईघर (खंसामाओं) से हुई थी. जानकारी के मुताबिक, दरअसल, यह मुग़लई और ईरानी शैली के साथ स्थानीय ‘दक्खनी’ मसालों का एक अनूठा संगम है. तो वहीं, 18वीं शताब्दी में आसफ़ जाह प्रथम (प्रथम निज़ाम) के समय में इस डिश ने अपनी खास पहचान बनाई, जो आज पूरी दुनिया भर में सबसे ज्यादा मशहूर है.
इतना ही नहीं, हैदराबादी बिरयानी को इसकी विशिष्ट ‘दम पुख्त’ शैली के लिए भी सबसे ज्यादा जाना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘कच्ची बिरयानी’ बनाने की विधि है. जहां, कच्चे मांस (चिकन या मटन) को मसालों और दही के साथ मैरीनेट किया जाता है और फिर उसे अधपके बासमती चावल के साथ परतों में सजाया जाता है.
इसके अलावा, हांडी के किनारों को आटे की लोई से सील कर दिया जाता है ताकि भाप (Steam) अंदर ही रहे, और फिर धीमी आंच पर मांस और चावल एक साथ पकते हैं, जिससे मसालों का रस चावल के एक-एक दाने में समा जाता है. इसके साथ ही इसमें केसर, तली हुई प्याज़ पुदीना और इलायची का संतुलन इसे अन्य शहरों की बिरयानी से कहीं ज्यादा तीखा और सुगंधित बनाता है.
हैदराबाद में बिरयानी का क्रेज ऐसा है कि यहां हर दिन लाखों प्लेटें परोसी जाती हैं.
1. पैराडाइज (Paradise)
इसे दुनिया का सबसे बड़ा बिरयानी सेंटर माना जाता है. यह साल 1953 में एक छोटे से कैफे से शुरू हुआ यह रेस्टोरेंट आज एक वैश्विक ब्रांड बन चुका है.
2. बावर्ची (Bawarchi)
आरटीसी क्रॉस रोड्स स्थित यह रेस्टोरेंट अपनी प्रामाणिकता (Authenticity) के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है. तो वहीं, यहां की भीड़ इसकी लोकप्रियता की गवाही देती है.
3. कैफे बहार और शादाब
पुराने हैदराबाद की गलियों में स्थित ये रेस्टोरेंट आज भी निज़ामी दौर के असली स्वाद को बरकरार रखे हुए हैं, जिससे लोग बड़े ही पसंद के साथ खाना पसंद करते हैं.
हैदराबाद में बिरयानी केवल त्यौहारों तक सीमित नहीं है. यह नाश्ते (मिर्च का सालन के साथ), लंच और देर रात के डिनर का भी एक तरह से महतवपूर्ण हिस्सा माना जाता है. फिर चाहे आलीशान शादी हो या सड़क किनारे का कोई छोटा सा होटल, बिरयानी का ‘लेवल’ यहाँ हमेशा ऊंचा रहता है और साथ ही यहां के लोग अपनी बिरयानी को लेकर बहुत भावुक होते हैं.
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