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‘CBI का इंतजार था, पर ED आ गई…’ कौन हैं चंदन सिंह जीना जिनकी वजह से हरीश रावत को देना पड़ा इस्तीफा? घर मिले 3200000 कैश, सोना और लग्ज़री घड़ियां

Who is Chandan Singh Jeena: UKSSSC भर्ती घोटाले में ED की एंट्री से उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है. पूर्व सीएम हरीश रावत के पीए चंदन सिंह जीना के ठिकानों से 32 लाख रुपये कैश, सोना और 12 महंगी घड़ियां बरामद हुई हैं. इस बड़ी कार्रवाई के तुरंत बाद हरीश रावत ने कांग्रेस के अहम पदों से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है. आखिर रावत ने यह कदम क्यों उठाया और इस बयान के पीछे की असली वजह क्या है?

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Last Updated: September 12, 2026 12:33:05 IST

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को कांग्रेस संगठन के दो अहम पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. यह कदम उन्होंने अपने निजी सहायक (PA) चंदन सिंह जीना के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद उठाया है. यह जांच साल 2016 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में हुई धांधली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी है.

रावत ने साफ किया कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी करीबी से जुड़े विवाद के कारण भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी की लड़ाई कमजोर पड़े. इसी वजह से उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने का फैसला किया है.

जीना के घर से 32 लाख कैश, सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद

ईडी ने गुरुवार को देहरादून में पूर्व UKSSSC अधिकारियों, OMR शीट स्कैनिंग से जुड़ी प्राइवेट कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और बिचौलियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी. इस दौरान हरीश रावत के पीए चंदन सिंह जीना के घर से 32 लाख रुपये नकद, 200.5 ग्राम सोना (13 सोने के सिक्के और 7 सोने की चेन) और 12 लग्जरी घड़ियां (रोलेक्स, राडो, पियाजे, मोवाडो, टिसोट और कैसियो एडिफिस) बरामद हुईं.

इसके अलावा, एजेंसी ने जीना और उनके परिजनों के बैंक खातों में जमा 52.16 लाख रुपये फ्रीज कर दिए हैं और उनके मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया है. ईडी का आरोप है कि जीना ने बड़े पैमाने पर नकद खर्च किए हैं, जिनका कोई वैध जरिया वह नहीं बता पाए.

चंदन सिंह जीना फिलहाल हरीश रावत के पीए हैं. इससे पहले जब रावत 2014 से 2017 के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री थे, तब जीना उनके विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में तैनात थे.

क्या है 2016 की भर्ती धांधली का मामला?

यह मामला उत्तराखंड पुलिस और विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज चार एफआईआर पर आधारित है. ईडी के मुताबिक, 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में OMR उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित कस्टडी से हटाकर आयोग के तत्कालीन सचिव के आवास पर ले जाया गया था. वहां कम भरे गए उत्तर पुस्तिकाओं के रोल नंबर नोट कर कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को दिए गए. इसके बाद अवैध पैसों के बदले OMR शीट के गोलों को फर्जी तरीके से भरा गया और उन्हें दोबारा सील कर दिया गया.

हरीश रावत बोले- आरोपों पर यकीन करना मुश्किल

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा, ‘टेलीविजन पर समाचार दिखाया जा रहा है कि देहरादून में मेरे पीए के निवास पर काफी मात्रा में नकदी व जेवरात मिले हैं अथवा दिलवाए गए हैं. इसकी सच्चाई आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी. यह सही है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और जब भी मैं सरकार अथवा संगठन में रहा हूं, उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं.’

जीना को एक सज्जन, विनम्र और परिश्रमी व्यक्ति बताते हुए उन्होंने आगे लिखा, ‘यदि ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा में उन्होंने ओएमआर शीट में हेराफेरी की है और इस कुकृत्य का साक्ष्य है तो मैं इस कथित कृत्य पर लज्जित हूं. मगर मुझे इस आरोप पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है.’

इस्तीफे का कारण

अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए रावत ने लिखा कि उत्तराखंड की राजनीति चुनावी दौर में प्रवेश कर रही है और उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है.

‘जब लोग मुझसे पूछते थे कि चुनाव कब होंगे, तो मैं मजाक में कहता था कि जब मेरे दरवाजे पर सीबीआई की दस्तक होगी, तब चुनाव घोषित हो जाएंगे. इस बार मेरे घर के बजाय मेरे एक सहयोगी के घर पर दस्तक हुई है और एक नैरेटिव बनाने का प्रयास किया जा रहा है.’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं और राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के जरिए शिक्षा व्यवस्था के भ्रष्टाचार को उठा रहे हैं. ऐसे समय में वह अपनी वजह से पार्टी के अभियान को प्रभावित नहीं होने देना चाहते.

‘ऐसे समय में यदि मुझसे जुड़ी किसी कार्रवाई से पार्टी की लड़ाई कमजोर पड़ती है, तो मैं ऐसा कभी नहीं चाहूंगा. इसलिए मैंने एक बड़ा फैसला लिया है. मैं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्य समिति में स्थायी आमंत्रित सदस्य हूं. मैं इन दोनों दायित्वों से विनम्रतापूर्वक हटना चाहता हूं, ताकि मेरी वजह से पार्टी की लड़ाई को नुकसान न पहुंचे.’

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को कांग्रेस संगठन के दो अहम पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. यह कदम उन्होंने अपने निजी सहायक (PA) चंदन सिंह जीना के परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद उठाया है. यह जांच साल 2016 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा आयोजित ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में हुई धांधली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी है.

रावत ने साफ किया कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी करीबी से जुड़े विवाद के कारण भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी की लड़ाई कमजोर पड़े. इसी वजह से उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने का फैसला किया है.

जीना के घर से 32 लाख कैश, सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद

ईडी ने गुरुवार को देहरादून में पूर्व UKSSSC अधिकारियों, OMR शीट स्कैनिंग से जुड़ी प्राइवेट कंप्यूटर एजेंसी के मालिक और बिचौलियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी. इस दौरान हरीश रावत के पीए चंदन सिंह जीना के घर से 32 लाख रुपये नकद, 200.5 ग्राम सोना (13 सोने के सिक्के और 7 सोने की चेन) और 12 लग्जरी घड़ियां (रोलेक्स, राडो, पियाजे, मोवाडो, टिसोट और कैसियो एडिफिस) बरामद हुईं.

इसके अलावा, एजेंसी ने जीना और उनके परिजनों के बैंक खातों में जमा 52.16 लाख रुपये फ्रीज कर दिए हैं और उनके मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया है. ईडी का आरोप है कि जीना ने बड़े पैमाने पर नकद खर्च किए हैं, जिनका कोई वैध जरिया वह नहीं बता पाए.

चंदन सिंह जीना फिलहाल हरीश रावत के पीए हैं. इससे पहले जब रावत 2014 से 2017 के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री थे, तब जीना उनके विशेष कार्य अधिकारी (OSD) के रूप में तैनात थे.

क्या है 2016 की भर्ती धांधली का मामला?

यह मामला उत्तराखंड पुलिस और विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज चार एफआईआर पर आधारित है. ईडी के मुताबिक, 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा में OMR उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित कस्टडी से हटाकर आयोग के तत्कालीन सचिव के आवास पर ले जाया गया था. वहां कम भरे गए उत्तर पुस्तिकाओं के रोल नंबर नोट कर कंप्यूटर एजेंसी के कर्मचारियों को दिए गए. इसके बाद अवैध पैसों के बदले OMR शीट के गोलों को फर्जी तरीके से भरा गया और उन्हें दोबारा सील कर दिया गया.

हरीश रावत बोले- आरोपों पर यकीन करना मुश्किल

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट में लिखा, ‘टेलीविजन पर समाचार दिखाया जा रहा है कि देहरादून में मेरे पीए के निवास पर काफी मात्रा में नकदी व जेवरात मिले हैं अथवा दिलवाए गए हैं. इसकी सच्चाई आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी. यह सही है कि श्री जीना मेरे ओएसडी रहे हैं और जब भी मैं सरकार अथवा संगठन में रहा हूं, उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं.’

जीना को एक सज्जन, विनम्र और परिश्रमी व्यक्ति बताते हुए उन्होंने आगे लिखा, ‘यदि ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा में उन्होंने ओएमआर शीट में हेराफेरी की है और इस कुकृत्य का साक्ष्य है तो मैं इस कथित कृत्य पर लज्जित हूं. मगर मुझे इस आरोप पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है.’

इस्तीफे का कारण

अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए रावत ने लिखा कि उत्तराखंड की राजनीति चुनावी दौर में प्रवेश कर रही है और उनके खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है.

‘जब लोग मुझसे पूछते थे कि चुनाव कब होंगे, तो मैं मजाक में कहता था कि जब मेरे दरवाजे पर सीबीआई की दस्तक होगी, तब चुनाव घोषित हो जाएंगे. इस बार मेरे घर के बजाय मेरे एक सहयोगी के घर पर दस्तक हुई है और एक नैरेटिव बनाने का प्रयास किया जा रहा है.’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं और राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के जरिए शिक्षा व्यवस्था के भ्रष्टाचार को उठा रहे हैं. ऐसे समय में वह अपनी वजह से पार्टी के अभियान को प्रभावित नहीं होने देना चाहते.

‘ऐसे समय में यदि मुझसे जुड़ी किसी कार्रवाई से पार्टी की लड़ाई कमजोर पड़ती है, तो मैं ऐसा कभी नहीं चाहूंगा. इसलिए मैंने एक बड़ा फैसला लिया है. मैं उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी का सदस्य हूं और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्य समिति में स्थायी आमंत्रित सदस्य हूं. मैं इन दोनों दायित्वों से विनम्रतापूर्वक हटना चाहता हूं, ताकि मेरी वजह से पार्टी की लड़ाई को नुकसान न पहुंचे.’

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