Who Is Gyanesh Kumar: 27 जनवरी 1964 को आगरा में जन्मे ज्ञानेश कुमार बचपन से ही होनहार स्टूडेंट थे. वह क्लास में टॉपर थे. उनके पिता डॉ. सुबोध गुप्ता 65 साल पहले यहीं बस गए थे और चीफ इलेक्शन कमिश्नर के पद से रिटायर हुए थे. वह क्वींस कॉलेज वाराणसी में टॉपर थे.
ज्ञानेश कुमार कौन हैं?
Who Is Gyanesh Kumar: जब से बंगाल में SIR प्रोसेस शुरू हुआ है तब से सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार पर हमला कर रही है. TMC का आरोप है कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर BJP के इशारे पर काम कर रहे हैं.इस बीच बुधवार को TMC के सीनियर नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में आने वाले चुनावों को लेकर एक मीटिंग के दौरान चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने तृणमूल कांग्रेस के डेलीगेशन से कहा, “दफा हो जाओ.”
उन्होंने मीडिया से कहा, “मैं आपको बताना चाहता हूं कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने मीटिंग शुरू होने के सात मिनट के अंदर हमसे क्या कहा. ‘दफा हो जाओ.’ इसलिए हम चले गए. हम पार्लियामेंट में दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी हैं.” तो चलिए जानते हैं कि ज्ञानेश कुमार कौन हैं?
चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार बहुत पढ़े-लिखे परिवार से आते हैं ज्ञानेश कुमार के परिवार में IAS, IPS और IRS ऑफिसर रहे हैं, जिनमें 28 सदस्य डॉक्टर हैं. ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के 1988 बैच के IAS ऑफिसर हैं.
2025 में उन्हें 26वें चीफ इलेक्शन कमिश्नर के तौर पर चुना गया. 27 जनवरी 1964 को आगरा में जन्मे ज्ञानेश कुमार बचपन से ही होनहार स्टूडेंट थे. वह क्लास में टॉपर थे. उनके पिता डॉ. सुबोध गुप्ता 65 साल पहले यहीं बस गए थे और चीफ इलेक्शन कमिश्नर के पद से रिटायर हुए थे. वह क्वींस कॉलेज वाराणसी में टॉपर थे.
उन्होंने लखनऊ के कैल्विन तालुकदार कॉलेज से 12वीं क्लास में टॉप किया था. उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री ली. उन्होंने एक साल तक हुडको के लिए भी काम किया.ज्ञानेश कुमार ने 1988 में सिविल सर्विस एग्जाम पास किया और केरल कैडर के IAS ऑफिसर बने. उनकी पहली पोस्टिंग तिरुवनंतपुरम में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के तौर पर हुई थी.
ज्ञानेश कुमार के पास हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री भी है. उन्होंने UPA सरकार के दौरान 2007 से 2012 तक मिनिस्ट्री ऑफ़ डिफेंस में जॉइंट सेक्रेटरी के तौर पर काम किया. 2014 में उन्होंने दिल्ली में केरल सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर के तौर पर काम किया. रिटायर होने के बाद 15 मार्च, 2024 को उन्हें इलेक्शन कमिश्नर अपॉइंट किया गया.
चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के परिवार में इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS), इंडियन पुलिस सर्विस (IPS), और इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) के सदस्य शामिल हैं. घर पर परिवार के नाम लिखे हैं. ज्ञानेश के भाई, मनीष कुमार, एक IRS ऑफिसर हैं.
बहन रोली के पति उपेंद्र कुमार जैन एक IPS ऑफिसर हैं. ज्ञानेश कुमार की बेटी मेधा रूपम 2014 बैच की IAS ऑफिसर हैं. मेधा के पति मनीष बंसल भी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हैं. उनकी दूसरी बेटी अभिश्री, एक IRS ऑफिसर हैं. अभिश्री के पति, अक्षय लाबरू, त्रिपुरा कैडर के 2018 बैच के IAS ऑफिसर हैं. उनकी शादी आगरा के मशहूर डॉक्टर ओपी आर्य (दिवंगत) की बेटी अनुराधा से हुई है.
ज्ञानेश कुमार ने भगवान श्री राम की मूर्ति चुनने और आर्टिकल 370 का ड्राफ्ट बनाने में अहम भूमिका निभाई.वे श्री राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रतिनिधि थे.वे भगवान श्री राम के बचपन के रूप की मूर्ति चुनने वाली जूरी के सदस्य थे. उन्होंने रक्षा मंत्रालय में इस्लामिक स्टेट की हिंसक गतिविधियों के बीच इराक से 183 भारतीयों को निकालने में अहम भूमिका निभाई. केंद्र सरकार ने 2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म कर दिया था. IAS ऑफिसर ज्ञानेश कुमार गृह मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी थे. उन्होंने जम्मू-कश्मीर रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट 2019 का ड्राफ्ट बनाने में अहम भूमिका निभाई थी.2023 में कोऑपरेटिव सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हुए, उन्होंने मल्टी-स्टेट सोसाइटीज (अमेंडमेंट) एक्ट 2016 को आगे बढ़ाया.
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