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विरासत में मिली राजनीति; कहानी उस बाहुबली की जिसे मिली उम्रकैद; फिर पत्नी को बनाया विधायक

Who is Bahubali Rajballabh Yadav?  राजबल्लभ यादव ने इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ा. उन्होंने अपना पहला ही चुनाव जीत लिया, जिससे यह मैसेज गया कि नवादा में असली प्लेयर वही हैं. हालांकि, इंडिपेंडेंट जीतने के बाद भी वे असेंबली में लालू के साथ ही रहे. 2000 में लालू ने उन्हें RJD से टिकट दिया और राजबल्लभ चुनाव जीत गए. लालू ने उन्हें लेबर मिनिस्टर बनाया.

Who is Bahubali Rajballabh Yadav?  कुछ ही महिने पहले बिहार में चुनाव हुआ और सपथ ग्रहण का वीडियो खूब वायरल हुआ जिसमे एक महिला विधायक शपथ लेते समय सही से हिंदी भी नहीं पढ़ पा रही थी. तब लोगों ने सोशल मीडिया पर कहा  ‘नीतीश की अनपढ़ महिला विधायक जो सही से हिंदी नहीं पढ़ पा रही है वो नवादा का विकास कैसे करेगी’. इस महिला विधायक का नाम था  विभा देवी जिसने राजद के कौशल यादव को 27594 वोटों से हराया था. 

उत्साहित, विभा देवी ने नवादा सीट पर बड़ी जीत दर्ज की लेकिन उनकी पहचान सिर्फ एक विधायक तक सीमित नहीं है. वह उस शख्स की पत्नी हैं, जिसका नाम बिहार की राजनीति में दबदबे और विवाद दोनों के लिए जाना जाता है राजबल्लभ यादव. माइनिंग व्यापार से राजनीति में कदम रखने वाले इस बाहुबली नेता ने सत्ता की ऊंचाइयां भी देखीं और रेप के गंभीर आरोपों में कई साल तक जेल की सलाखों के पीछे भी बितायें.

साल 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया जा चुका था. इसका असर पूरे देश के साथ-साथ बिहार में भी महसूस किया गया. बिहार में प्रेसिडेंट रूल लगाने की बात हो रही थी. लालू प्रसाद यादव अभी-अभी मुख्यमंत्री बने थे. उन्होंने असेंबली का स्पेशल सेशन बुलाया और अपनी मेजॉरिटी साबित करने का फैसला किया. सरकार खतरे में थी और लालू को इसे बचाने के लिए कुछ विधायक चाहिए थे. तब कृष्णा यादव उनकी मदद के लिए आगे आए. वे पहली बार नवादा से BJP के टिकट पर चुनाव जीते थे. उन्होंने BJP से अलग होकर लालू की मदद की. बीजेपी के पास 39 विधायक थे. बीजेपी से अलग हुए कृष्णा यादव राजबल्लभ यादव के बड़े भाई थे.

नवादा की पॉलिटिक्स पर दो नेताओं का दबदबा

1990 के दशक से लेकर अब तक नवादा की पॉलिटिक्स पर सिर्फ दो नेताओं का दबदबा रहा पहले राजबल्लभ यादव और दूसरे कौशल यादव. दोनों को पॉलिटिकल विरासत मिली. राजबल्लभ जो एक जाने-माने माइनिंग बिज़नेसमैन थे पॉलिटिक्स से दूर अपना खुद का बिज़नेस चला रहे थे. 1994 में अपने बड़े भाई कृष्णा यादव के गुज़र जाने के बाद, वे 1995 में पॉलिटिक्स में आए. उम्मीद थी कि लालू यादव कृष्णा यादव की जगह राजबल्लभ को लाएंगे लेकिन लालू ने चंद्रभूषण यादव को टिकट दे दिया. 

इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर लड़ा चुनाव

राजबल्लभ यादव ने इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ा. उन्होंने अपना पहला ही चुनाव जीत लिया, जिससे यह मैसेज गया कि नवादा में असली प्लेयर वही हैं. हालांकि, इंडिपेंडेंट जीतने के बाद भी वे असेंबली में लालू के साथ ही रहे. 2000 में लालू ने उन्हें RJD से टिकट दिया और राजबल्लभ चुनाव जीत गए. लालू ने उन्हें लेबर मिनिस्टर बनाया. कौशल यादव जो 1970 से नवादा के बगल वाली गोविंदपुर सीट पर राज कर रहे थे नवादा सीट पर कब्ज़ा करना चाहते थे. 2005 में वे कामयाब हो गए. उन्होंने अपनी पत्नी पूर्णिमा यादव को इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर मैदान में उतारा. पूर्णिमा यादव ने राजबल्लभ यादव को चुनाव में हराया था. उस समय राजबल्लभ मंत्री थे.

कौशल और राजबल्लभ की दोस्ती

2010 में कौशल यादव जेडीयू में शामिल हो गए. उन्होंने गोविंदपुर से चुनाव लड़ा और अपनी पत्नी के लिए नवादा से टिकट हासिल किया. एक बार फिर, नवादा में उनका मुकाबला राजबल्लभ से हुआ. कौशल यादव और उनकी पत्नी दोनों ने सीट जीती.इस गठबंधन से कौशल और राजबल्लभ के बीच दोस्ती हुई, जो तीन साल में ही टूट गई. 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ग्रैंड अलायंस में शामिल हो गए. इसका असर नवादा पर पड़ा. कट्टर दुश्मन राजबल्लभ और कौशल यादव भी साथ आ गए. राजबल्लभ नवादा से चुनाव लड़े जबकि गोविंदपुर सीट कौशल यादव के खाते में चली गई. उन्होंने वहां से अपनी पत्नी पूर्णिमा यादव को मैदान में उतारा. राजबल्लभ 10 साल बाद विधानसभा में लौटे. 

रेप के मामले में उम्रकैद की सजा

लेकिन 2016 में MLA बनने के ठीक एक साल बाद राजबल्लभ यादव के खिलाफ एक नाबालिग से रेप के आरोप में FIR दर्ज की गई. केस दर्ज होने के बाद RJD ने उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया. केस कोर्ट में गया और 2018 में POCSO कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई. नतीजतन विधानसभा से उनकी मेंबरशिप खत्म कर दी गई. 

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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