Budget 2026 में चाबहार और बांग्लादेश पर भारत के बड़े फैसले! जानिए इस कूटनीतिक 'मास्टरस्ट्रोक' के पीछे की पूरी कहानी...
बांग्लादेश के लिए बाहरी सहायता आधी हो गई और चाबहार का बजट 'शून्य'
Union Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को बजट पेश करते हुए देश के अलग-अलग वर्गों को कई फायदे दिए, जिसमें रोज़गार, शिक्षा, कृषि और छोटे शहरों के विकास पर ध्यान दिया गया. बजट में यह भी बताया गया कि भारत अलग-अलग देशों को कितनी वित्तीय सहायता देगा. ‘देशों को सहायता के तहत आवंटन बढ़ाकर ₹5,686 करोड़ कर दिया गया है, जो पिछले साल के बजट अनुमान ₹5,483 करोड़ से लगभग 4% ज़्यादा है. भारत ने इस साल बांग्लादेश को दी जाने वाली वित्तीय सहायता घटाकर ₹60 करोड़ कर दी है. पिछले साल बांग्लादेश को ₹120 करोड़ की वित्तीय सहायता मिली थी. अफगानिस्तान को पिछले साल जितनी ही वित्तीय सहायता मिलेगी, ₹150 करोड़. आइए देखते हैं कि बजट में दूसरे देशों के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं.
भारत द्वारा विदेशी देशों को दी जाने वाली सहायता में से सबसे बड़ा बजट भूटान को आवंटित किया गया है. भूटान को ₹2,289 करोड़ की वित्तीय सहायता मिलेगी. इस साल बांग्लादेश को वित्तीय सहायता के लिए ₹60 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो पिछले साल से कम है. अफगानिस्तान को वित्तीय सहायता पिछले साल जितनी ही रहेगी. इस बार भी इसके लिए ₹150 करोड़ आवंटित किए गए हैं.
बांग्लादेश की सहायता राशि में की गई यह कटौती भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति में एक बड़े बदलाव को दिखा रहा है. इससे बांग्लादेश की नई सरकार को यह साफ संदेश मिल जाएगा कि भारत अब संबंधों को केवल पुराने इतिहास के भरोसे नहीं चलाएगा, बल्कि ‘जैसा व्यवहार वैसा सहयोग’ की नीति के साथ चलेगा। इससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक खिंचाव बढ़ सकता है, क्योंकि यहांआर्थिक मदद कम करने को अक्सर असंतोष व्यक्त करने के तौर पर देखा जाए सकता है. लेकिन भारत के लिए एक और मुश्किल खड़ा हो हो सकता है, बांग्लादेश के इस वित्तीय खालीपन का फायदा चीन उठा सकता है. चीन यहां अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर सकता है, जो भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती बन सकती है.
इस साल के केंद्रीय बजट में ईरान में चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए कोई बजट आवंटन शामिल नहीं था. यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले साल चाबहार बंदरगाह के लिए ₹400 करोड़ आवंटित किए गए थे (2025-26 के संशोधित अनुमानों में). हाल के दिनों में कई हलकों में यह भी चर्चा हुई है कि अमेरिका के दबाव के कारण भारत भविष्य में चाबहार बंदरगाह परियोजना से पीछे हट सकता है.
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