World Oil Reserves: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल जंग की वजह से पूरी दुनिया में तेल को लेकर चिंता बढ़ने लगी है. ऐसे में आइए जानते हैं कि दुनिया के वो 5 देश कौन से हैं? जिनके पास सबसे ज्यादा तेल का भंडार है.
दुनिया के वो 5 देश कौन से हैं? जिसके पास सबसे ज्यादा तेल का भंडार है
इंडिया तेल भंडार: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी जंग के बीच पूरी दुनिया में तेल को लेकर संकट के बादल छाने की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में आइए जानते हैं कि किस देश के पास ज्यादा तेल का भंडार है? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनिया भर में तेल के पक्के भंडार लगभग 1.7 ट्रिलियन बैरल होने का अनुमान है, जिसमें वेनेजुएला का सबसे बड़ा हिस्सा है, उसके बाद सऊदी अरब, कनाडा और ईरान का नंबर आता है.
हालांकि आंकड़े सोर्स और साल के हिसाब से थोड़े अलग-अलग होते हैं. हालांकि देश एनर्जी के रिन्यूएबल सोर्स की ओर बढ़ रहे हैं, फिर भी तेल के भंडार इंटरनेशनल लेवल पर एनर्जी सिक्योरिटी और स्टेबिलिटी का एक बेसिक हिस्सा बने हुए हैं.
दुनिया में तेल के रिजर्व कुछ ही देशों में बहुत ज्यादा जमा हैं, यह एक ऐसा फैक्टर है जो एनर्जी और ट्रेड और दुनिया की अलग-अलग अंदरूनी जियोपॉलिटिक्स को तय करता है. आइए आज हम 5 देशों के बारे में जानते हैं, जिनके पास तेल का भंडार सबसे ज्यादा है. तेल रिजर्व के मामले में वेनेजुएला पहले, सऊदी अरब दूसरे, ईरान तीसरे, इराक चौथे और कनाडा पांचवें स्थान पर आता है. इसके अलावा, भारत इस रैंकिंग में 25वें स्थान पर आता है.
वेनेज़ुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल रिज़र्व है, जिसमें 303.2107 बिलियन बैरल (19.4107 प्रतिशत) है. राजनीतिक अस्थिरता और पाबंदियों के बावजूद इसका ओरिनोको बेल्ट एक स्ट्रेटेजिक एनर्जी रिसोर्स है. इस देश की इकॉनमी तेल पर आधारित है और इसलिए यह देश की कमाई का मुख्य सोर्स है, लेकिन इसका ठीक से इस्तेमाल न होने से ग्रोथ रुकती है. दुनिया भर में वेनेज़ुएला के रिज़र्व, OPEC प्लान और अमेरिकी विदेश नीति पर अभी तक इस्तेमाल नहीं किए गए पोटेंशियल और असर को दिखाते हैं.
सऊदी अरब के पास 267.2 बिलियन (17.1 0 -1) बैरल का रिज़र्व है. इसकी इकॉनमी तेल पर चलती है जो विज़न 2030 डाइवर्सिफ़िकेशन को ऑपरेट करता है. OPEC की प्रतिनिधि आवाज़ होने के नाते यह प्रोडक्शन को एडजस्ट करके दुनिया के मार्केट को स्थिर करने में भूमिका निभाता है. इसके डिपॉज़िट इसे जियोपॉलिटिकल फ़ायदा देते हैं, जिससे मिडिल ईस्ट की पॉलिटिक्स के साथ-साथ दुनिया की एनर्जी पॉलिटिक्स में भी इसकी बात पक्की हो जाएगी.
ईरान के पास 209 बिलियन बैरल का रिजर्व है. इस वक्त ईरान अमेरिका और इजराइल से जंग लड़ रहा है. इसके अलावा, ईरान का होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा है. जिस रास्ते से पूरी दुनिया में तेल भेजा जाता है. इस वजह से भी ईरान तेलों के उत्पादन के मामले में काफी महत्वपूर्ण देश है. ईरान की अर्थव्यवस्था भी तेल पर काफी हद तक निर्भर करती है. ईरान OPEC का सदस्य है.
इराक में साबित रिज़र्व 201 बिलियन बैरल हैं, जो पूरे ग्लोबल रिज़र्व का 9.3 प्रतिशत है। इराकी इकॉनमी मुख्य रूप से तेल से होने वाले रेवेन्यू पर आधारित है जो रिकंस्ट्रक्शन और लोगों को सर्विस देने के लिए फिस्कल सपोर्ट का काम करता है. OPEC के अंडर, इराक में OPEC के डिपॉज़िट सप्लाई स्टेबिलिटी के लिए बहुत ज़रूरी हैं. लेकिन लगातार पॉलिटिकल अशांति और स्ट्रक्चरल दिक्कतों ने इसके इस्तेमाल को सीमित कर दिया है, लेकिन यह ग्लोबल एनर्जी मार्केट में एक बड़ा फ्रंटरनर बना हुआ है.
कनाडा का तेल रिजर्व 170 बिलियन बैरल है, जो दुनिया के रिज़र्व का लगभग 10.4 प्रतिशत है, जो खास तौर पर ऑयल सैंड्स में जमा है. ये रिसोर्स अल्बर्टा की इकॉनमी की ग्रोथ और देश के एक्सपोर्ट में अहम भूमिका निभाते हैं. कनाडा खुद को इंटरनेशनल लेवल पर एक बैलेंस्ड देश के तौर पर दिखाता है, जिसके पास तेल के रिसोर्स हैं और जो एनवायरनमेंटल मैनेजर बनने के लिए पूरी तरह से कमिटेड है, जो इसे यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका और यूरोप में फिर से शुरू करने का एक भरोसेमंद सोर्स बनाता है, लेकिन यह ग्लोबल क्लाइमेट नेगोशिएशन में भी शामिल है.
भारत के पास करीब 4.8 बिलियन बैरल तेल रिजर्व है, दुनिया भर में टॉप 25 देशों में आता है, लेकिन अपनी 85% से ज़्यादा कच्चे तेल की ज़रूरतों के लिए अभी भी इम्पोर्ट पर बहुत ज़्यादा निर्भर है. ग्लोबल प्राइस शॉक और सप्लाई में रुकावटों से होने वाले रिस्क को कम करने के लिए देश अपने स्ट्रेटेजिक तेल रिज़र्व को बढ़ा रहा है.
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