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रेगिस्तान में बसेगा भविष्य का शहर, जानें दुनिया का सबसे हाई-टेक सिटी कैसे बनेगा NEOM

Saudi Arabia Future City Project: NEOM प्रोजेक्ट क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज ने लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य है एक भविष् का हाई-टेक शहर बनाना है.

Saudi Arabia NEOM City Project: सऊदी अरब (Saudi Arabia) में भविष्य का शहर बन रहा है. एक ऐसा शहर बनाया जा रहा है जिसकी खासियत सुनकर एक बार को लगता है कि क्या सच में इंसानों ने इतनी तरक्की कर ली है कि इतने बड़े स्केल पर इतना बड़ा और मॉडर्न शहर तैयार किया जा सके. हम बात कर रहे हैं सऊदी अरब के NEOM सीटी प्रोजेक्ट की. इसे 2017 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअजीज ने लॉन्च किया था. यह उत्तर पश्चिम सऊदी अरब में बन रहा भविष्य का ऐसा शहर है जो 100% नवीकरणीय ऊर्जा से चलेगा. मतलब नो डीजन, नो कोयला.  चलिए आपको निओम सिटी प्रोजेक्ट की विशेषताओं से लेकर उसको बनाने में आ रही परेशानियों के बारे में सबकुछ प्वाइंट्स में बताते हैं.

कैसा बनेगा NEOM सिटी?

सऊदी अरब अपनी पारंपरिक छवि से आगे बढ़कर एक नई पहचान गढ़ रहा है जिसमें तकनीक, नवाचार और पर्यावरण के क्षेत्र में आगे रहने की. इसी दिशा में देश का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है “NEOM City”, जिसे वर्ष 2017 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ ने लॉन्च किया था. यह केवल एक शहर नहीं, बल्कि आने वाले समय का ऐसा शहरी चमत्कार बनने जा रहा है जो पूरी तरह 100% नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित होगा.

क्या है NEOM नाम का मतलब?

‘NEOM’ नाम दो भाषाओं के मिलन से बना है, “Neo” (ग्रीक भाषा से) जिसका अर्थ है “नया”, “M” अरबी शब्द “Mustaqbal” से लिया गया है, जिसका अर्थ है “भविष्य”. साथ ही “M” क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नाम का पहला अक्षर भी दर्शाता है.  इस तरह यह नाम न केवल अर्थपूर्ण है बल्कि सऊदी अरब की नई सोच का प्रतीक भी है “नया भविष्य”.

क्या है निओम सिटी का उद्देश्य?

सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था लंबे समय से तेल के निर्यात पर आधारित रही है. लेकिन “विजन 2030” के तहत देश अब इस निर्भरता को खत्म कर नई दिशा में बढ़ रहा है. निओम सिटी का मुख्य लक्ष्य है —

  • आर्थिक विविधता को बढ़ावा देना
  • तकनीक, विज्ञान, शिक्षा और पर्यटन को नई ऊंचाइयां देना
  • स्थायी और हरित (Green) विकास के नए मानक स्थापित करना

क्राउन प्रिंस का मानना है कि यह प्रोजेक्ट सऊदी अरब को भविष्य के लिए तैयार करेगा और पूरी दुनिया को दिखाएगा कि स्थिरता और विकास साथ-साथ चल सकते हैं.

निओम सिटी बनाने में कितना बैठेगा खर्च?

 

निओम सिटी की अनुमानित लागत लगभग 37 लाख करोड़ रुपये (500 अरब डॉलर) बताई गई है. हालांकि, परियोजना के बढ़ते पैमाने को देखते हुए यह खर्च आने वाले वर्षों में कई गुना तक बढ़ सकता है. यह प्रोजेक्ट 26,500 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है यानी दिल्ली से करीब 17 गुना बड़ा. इतने विशाल क्षेत्र में एक पूरी तरह स्मार्ट और स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित शहर बसाना अपने आप में अभूतपूर्व चुनौती है.

निओम सिटी के चार प्रमुख प्रोजेक्ट

निओम केवल एक शहर नहीं बल्कि चार इनोवेटिव ज़ोनों का समूह है, जो मिलकर भविष्य की शहरी अवधारणा को आकार दे रहे हैं:

1. The Line (द लाइन):

यह निओम का सबसे चर्चित हिस्सा है  एक 170 किलोमीटर लंबा और 500 मीटर ऊंचा रेखीय शहर, जिसमें न तो सड़कें होंगी, न कारें, और न प्रदूषण. यहां परिवहन पूरी तरह हाई-स्पीड ट्रांजिट और AI-आधारित सिस्टम से होगा. हर सुविधा पांच मिनट की दूरी पर होगी, और पूरा शहर दर्पण जैसी बाहरी दीवारों से घिरा होगा.

2. Oxagon (ऑक्सागॉन):

यह निओम का औद्योगिक क्षेत्र होगा, जो दुनिया का सबसे बड़ा फ्लोटिंग (तैरता हुआ) औद्योगिक कॉम्प्लेक्स बनने जा रहा है. इसका उद्देश्य है कि हाई-टेक, ऑटोमेशन और स्थायी उद्योगों को बढ़ावा देना, जहाँ उत्पादन शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ होगा.

3. Trojena (ट्रोजेना):

यह निओम का पहाड़ी क्षेत्र है, जहां सालभर बर्फ गिरती है. इसे एक प्रीमियम विंटर टूरिज़्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां स्की रिसॉर्ट्स, झीलें, लक्ज़री विला और अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स इवेंट्स होंगे। यहां 2029 के एशियन विंटर गेम्स भी आयोजित किए जाएंगे.

4. Sindalah (सिंदलाह):
यह लक्ज़री बीच आइलैंड है, जो निओम का पर्यटन केंद्र होगा. यहां सुपर यॉट्स, पांच सितारा होटल, गोल्फ कोर्स और समुद्री खेल जैसी सुविधाएं होंगी, जो इसे मध्य पूर्व का नया ‘रिवेरा’ बना देंगी.

प्रोजेक्ट बनाने में क्या हैं चुनौतियां और विवाद

इतनी विशाल और महत्वाकांक्षी परियोजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं —

  • पर्यावरणीय प्रभावों को नियंत्रित करना
  • रेगिस्तानी इलाके में पानी और निर्माण सामग्री की आपूर्ति
  • स्थानीय समुदायों का पुनर्वास
  • प्रोजेक्ट के विशाल खर्च को दीर्घकालिक रूप से वहन करना

कई अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठनों ने इसके पारिस्थितिक प्रभावों को लेकर चिंता जताई है, लेकिन सऊदी सरकार का दावा है कि यह “ग्रीन डेवलपमेंट” का सबसे बड़ा उदाहरण बनेगा.

 

Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024.

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