Nepal Flood: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों का अंतिम संस्कार उनके परिवार वाले करेंगे. उन्हें लावारिस लाशों के तौर पर आखिरी विदाई नहीं दी जाएगी.
अज्ञात शव और DNA सैंपल संभालकर रखेगी नेपाल सरकार
Nepal Flood: 26 अगस्त को नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद से मलबे से 682 लाशें बरामद की गई हैं. कुछ लाशों की पहचान हो गई है, जबकि नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने उन लोगों के लिए एक प्लान बनाया है जिनकी पहचान नहीं हो पाई है. नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों का अंतिम संस्कार उनके परिवार वाले करेंगे. उन्हें लावारिस लाशों के तौर पर आखिरी विदाई नहीं दी जाएगी. इसलिए, सरकार उन लाशों के DNA सैंपल और पहचान से जुड़े सबूत संभालकर रखेगी जिनकी पहचान हो गई है. जिन लाशों की पहचान हो गई है, उन्हें उनके रिश्तेदारों को सौंप दिया गया है.
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा कि बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 682 हो गई है, और लगभग 3,000 लोग लापता हैं. लापता लोगों में 287 भारतीय भी हैं. हालांकि, सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाशों की पहचान करना है. अब तक रसुवा, धाडिंग नुवाकोट, चितवन, तनहुन, गोरखा, नवलपरासी ईस्ट और नवलपरासी वेस्ट में 675 लाशें मिल चुकी हैं. जिन लाशों की पहचान नहीं हो पाई है, उन्हें एयरटाइट बैग में रखकर अनआइडेंटिफाइड एंड अनक्लेम्ड बॉडीज़ मैनेजमेंट (फर्स्ट अमेंडमेंट) डायरेक्टिव 2026 के तहत सुरक्षित रखा जाएगा. पहचान के लिए DNA सैंपल और दूसरे सबूत सुरक्षित रखे जाएंगे.
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नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने कहा कि सरकार ने जिन लाशों की पहचान नहीं हुई है, उन्हें सुरक्षित रखने का फैसला किया है, लेकिन पानी में रहने की वजह से वे खराब हो गई हैं, जिससे उन्हें सुरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है. नतीजतन, पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है. इसलिए, नेपाल सरकार ने दुनिया भर के देशों से फ्रीजर और फ्रीजर ट्रक देने में मदद की अपील की है. नेपाल सरकार अपील करती है कि अगर दुनिया यह खास मदद देती है, तो यह इंसानियत का सबसे बड़ा फर्ज होगा. दिवंगत आत्माओं के शव मोक्ष के लिए उनके प्रियजनों को लौटा दिए जाएंगे.
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल के मुताबिक, नेपाल सरकार को कुदरती आफ़त से हुए नुकसान की भरपाई और फिर से बनाने के लिए $4 से $5 बिलियन की ज़रूरत होगी. 33,000 से 40,000 करोड़ रुपये की ज़रूरत है क्योंकि अचानक आई बाढ़ ने आठ ज़िलों को तबाह कर दिया है और 100,000 लोगों को नुकसान पहुँचाया है, जिन्हें फिर से बसाने की ज़रूरत है. नेपाल को मदद की ज़रूरत है और उम्मीद है कि दोस्त देश मदद करेंगे. जो दोस्त नहीं हैं, वे भी इंसानियत के नाते मदद के लिए आगे आएँगे. इस मुश्किल समय में सभी को एक साथ आकर इंसानियत के प्रति अपना फ़र्ज़ निभाना चाहिए, ताकि इंसानियत का धर्म पूरा हो सके.
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