Nepal US Mustang Uranium Processing: कुछ वर्षों पहले नेपाल में एक बड़ा यूरेनियम भंडार मिलने की खबर आई थी, लेकिन इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में इस बात की सुगबुगाहट बढ़ रही है कि क्या नेपाल यह यूरेनियम भंडार अमेरिका को सौंप देगा.
मुस्तांग स्पेशल जोन
काठमांडू: कुछ वर्षों पहले नेपाल में एक बड़ा यूरेनियम भंडार मिलने की खबर आई थी, लेकिन इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में इस बात की सुगबुगाहट बढ़ रही है कि क्या नेपाल यह यूरेनियम भंडार अमेरिका को सौंप देगा.
इस बात की अटकल उस वक्त और बढ़ गई है जब अमेरिका के विदेश राज्य मंत्री समीर पॉल कपूर अचानक नेपाल का दौरा कर रहे हैं. समीर पॉल की यह आधिकारिक यात्रा इसलिए भी ख़ास है क्योंकि इस बार वो सिर्फ नेपाल की यात्रा पर आएंगे. आमतौर पर जब भी कोई अमेरिकी अधिकारी इस तरह की यात्रा पर आता था तो वो नेपाल के साथ श्रीलंका और बांग्लादेश की भी यात्रा करता था.
जानकारी के मुताबिक नेपाल के लो मन्थांग, अपर मुस्तांग में 30 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को “मुस्तांग स्पेशल जोन” के रूप में घोषित किया जा सकता है. स्पेशल जोन घोषित करके ही इस क्षेत्र को “पैक्स सिलिका” गठबंधन के तहत अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया को यूरेनियम प्रोसेसिंग के लिए विशेष अधिकार दिए जा सकते हैं.
बता दें कि नेपाल की पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की और वित्त मंत्री रामेश्वर खनाल सार्वजनिक तौर पर इस समझौते से इनकार करते रहे हैं लेकिन कुछ गोपनीय दस्तावेजों के अनुसार नेपाल की पूर्व सरकार ने मार्च 2026 में MCC प्रोजेक्ट की ऊर्जा को नए AI डेटा केंद्रों से जोड़ने और डेटा संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका को सैद्धांतिक सहमति दे चुकी है. मुस्तांग के अलावा यूरेनियम के अन्य संभावित स्थलों में मकवानपुर और सिंधुली भी शामिल हैं.
दरअसल, नेपाल और अमेरिका के बीच 2017 में ‘MCC प्रोजेक्ट’ नाम के एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे. इस समझौते के तहत अमेरिका ने नेपाल को बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अनुदान दिया था. नेपाल के लोगों ने इस परियोजना का कड़ा विरोध किया था. ऐसा माना जाता है कि यह विरोध पड़ोसी देश चीन के द्वारा उकसाया गया था.
इस समय चीन दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम आपूर्तिकर्ता है. अगर अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के पास यूरेनियम की पहुंच सुनिश्चित हो जाती है, तो यह चीन के लिए बड़ी समस्या बन सकती है.
साल 2014 के आसपास नेपाल के खान एवं भूगर्भ विभाग ने ‘लो मान्थांग’ (मुस्तांग) में यूरेनियम की एक बड़ी खान होने की पुष्टि की थी. यह भंडार लगभग 10 किमी लंबा और 3 किमी चौड़ा बताया जाता है जो नेपाल-चीन सीमा के काफी करीब (सिर्फ 10 किमी दूर) स्थित है. अध्ययन किया गया तो पता चला कि यह यूरेनियम ‘मीडियम ग्रेड’ का है, जिसे ऊर्जा और रणनीतिक उद्देश्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. नेपाल सरकार के सामने समस्या ये है कि वर्तमान में यूरेनियम निकालने या उसे प्रोसेस करने के लिए उनके पास जरूरी तकनीक, पैसा और इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, इसके लिए उन्हें किसी विदेशी सरकार से मदद लेनी होगी. अमेरिका के लिए ये एक बड़ा अवसर है, मदद करने के बहाने उसे इस क्षेत्र के यूरेनियम पर अधिकार मिलेगा, इसलिए वो किसी हालत में इसे गंवाना नहीं चाहेगा और हर कीमत पर नेपाल सरकार से समझौता करना चाहेगा. वहीं दूसरी ओर चीन के लिए ये एक बड़ा खतरा बन सकता है, क्योंकि ये भंडार नेपाल और चीन की सीमा के बेहद करीब है.
मल्टीपोलर प्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नेपाल सरकार मुस्तांग में पाए गए यूरेनियम की प्रोसेसिंग की जिम्मेदारी संयुक्त राज्य अमेरिका को सौंपने की तैयारी कर रही है. हालांकि, इंडिया न्यूज इस दावे की पुष्टि नहीं करता है.
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