US Supreme Court Tariff Decision: सबसे बड़ा और हैरान कर देने वाला मसला यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नहीं बताया कि वह डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर फैसला कब सुनाएगा. कोर्ट ने अगली तारीख भी नहीं बताई है.
ट्रंप के मेंटल हेल्थ पर अमेरिकी नेताओं ने उठाए सवाल
US Supreme Court Tariff Decision: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (14 जनवरी, 2026) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के टैरिफ पर अपना फैसला नहीं सुनाया. यह दूसरी बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने 9 जनवरी, 2026 को भी फैसला टाल दिया था. अब 14 जनवरी को भी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा इस मसले पर अपना फैसला टाला है. मीडिया रिपोर्ट्स के मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (14 जनवरी, 2026) को कुल तीन मामलों में अपना फैसला सुनाया. वहीं ताज्जुब इस बात का है कि इनमें ट्रंप के टैरिफ का मामला शामिल नहीं था. अमेरिका ही नहीं नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों की नजरें भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी थीं.
गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल में ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा की थी.फिर उसे तीन महीनों के लिए टाल दिया था. आखिर में जुलाई में रेसिप्रोकल टैरिफ लागू हो गया. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1977 के एक कानून का इस्तेमाल दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने के लिए किया. जानकारों का कहना है कि इंटरनेशनल इमर्जेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत दूसरे देशों पर ट्रंप ने यह टैरिफ लगाया. आरोप है कि ट्रंप द्वारा 1977 के इस कानून का इस्तेमाल दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने के लिए नहीं किया जा सकता. यह अलग बात है कि डोनाल्ड ट्रंप ने हर विरोध को दरकिनार करते हुए टैरिफ थोपा.
ट्रंप टैरिफ को लेकर अमेरिका के तीन कोर्ट इस मामले में खिलाफ ही अपना फैसला सुना चुके हैं. कोर्ट पहले ही सख्त लहजे में कहा चुका है कि डोनाल्ड ट्रंप ने जिस कानून के तहत कई देशों पर टैरिफ लगाया है, वह कहीं से भीा सही नहीं है. तीनों कोर्ट का मानना था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ लगातार अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है.
बताया जाता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निजी गुस्सा निकालने के लिए भी दूसरे देशों पर टैरिफ लगा रहे हैं. इस कड़ी में सबसे ज्यादा टैरिफ भारत पर लगाया है. पूर्व में भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया फिर रूस से क्रूड ऑयल खरीदने पर भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया. ट्रंप इस बात से खफा है कि भारत और चीन जैसे देश रूस से तेल खरीदते हैं। इससे रूस को पैसे मिलते हैं. रूस इन पैसों का इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में करता है.
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