Missile interceptors System: अमेरिका–इज़रायल–ईरान के युध्द में इन मिसाइलों से रक्षा के लिए इंटरसेप्टर सिस्टम्स का यूज किया जाता है. चलिए जानते हैं ये एयर डिफेंस सिस्टम से कैसे अलग होता है?
मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम क्या है?
Missile interceptors System: अमेरिका–इज़रायल–ईरान के युध्द में मिसाइलों की बौझार देखने को मिली. कोई भी देश यह नहीं चाहेगा कि उसके ऊपर मिसाइल से हमला हो और नुकसान झेलना पड़े. इसलिए कई देशों के पास इन मिसाइलों से रक्षा के लिए इंटरसेप्टर सिस्टम्स का यूज किया जाता है. यह एयर डिफेंस सिस्टम का ही एक भाग होता है, जो हवा में ही दुश्मन देश की मिसाइल को मार गिराती हैं.
किसी भी देश के लिए यह काफी अहम चीज है, जो उसकी रक्षा करती है. यह एयर डिफेंस का वह हिस्सा होता है, जो आने वाले टारगेट को बीच में ही रोककर उसे खत्म करता है. मतलब इंटरसेप्टर को ‘मार गिराने वाला’ भाग कहा जाता है.
Missile interceptors System एक बड़े सैन्य संरचना को परिभाषित करती है. यह आने वाली शत्रु मिसाइलों का पता लगाती है, उन्हें ट्रैक करने और उनके टारगेट के पहुंचने से पहले ही उसे खत्म करने के लिए डिजाइन की गई है. यह बहुत तेजी से काम करती है. आप सोच सकते हैं कि कोई मिसाइल जमीन पर गिरने से पहले ही उसके टारगेट, टाइमिंग और उसे नष्ट करने तक की प्रोसेस कितनी जल्दी होती होगी?
शेओंगुंग II: साउथ कोरिया का मीडियम-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम जिसमें 360° रडार और वर्टिकल लॉन्च कैपेबिलिटी है. यह कम ऊंचाई वाली क्रूज़ मिसाइलों और फारस की खाड़ी के ऊपर टैक्टिकल बैलिस्टिक खतरों के खिलाफ असरदार है.
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